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मीलों पैदल चलकर हंगरी के रास्ते सुरक्षित घर पहुंचा सुरेश

Sat, 05 Mar 2022 10:59 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Mar 2022 10:59 PM IST
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After walking for miles, Suresh reached home safely via Hungary.
अंबेडकरनगर के बेवाना निवासी सुरेश कुमार के यूक्रेन से गांव पहुंचने पर ग्रामीणों में रहा हर्ष का ? - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। खतरे के साये में मीलों पैदल चलकर हंगरी पहुंचे, जहां से भारतीय दूतावास के माध्यम से हवाई जहाज से दिल्ली पहुंच गए। इसके बाद अपने घर ज्ञानपुर गांव सुरक्षित पहुंच गए। घर तो आ गए, लेकिन यूक्रेन की भयावह तस्वीर अभी भी नजरों के सामने है। चारों तरफ क्षतिग्रस्त बिल्डिंग, खतरे का बजता सायरन और इसके बाद मचती भगदड़ को भूल नहीं पा रहे हैं। यह बातें शनिवार को यूक्रेन से बेवाना थाना क्षेत्र के ज्ञानपुर गांव पहुंचे एमबीबीएस के छात्र सुरेश कुमार गुप्ता ने बताईं। उन्होंने भारत सरकार व जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए अपील की कि यूक्रेन में फंसे अन्य छात्र-छात्राओं को भी सही सलामत जल्द से जल्द निकाला जाए।
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बेवाना थाना क्षेत्र के ज्ञानपुर गांव निवासी रामलाल गुप्ता का पुत्र सुरेश कुमार गुप्ता यूक्रेन के टरनोपिल शहर में रहकर एमबीबीएस कर रहा था। 5वें वर्ष का छात्र सुरेश यूक्रेन की भयावह स्थिति से दो-चार होकर सही सलामत घर तो लौट आया, लेकिन वहां पर जो कुछ देखा और जो कुछ इस दौरान उसने झेला, उसे वह भुला नहीं पा रहा है। शनिवार को गांव में उसके सही सलामत पहुंचने से परिवारीजनों व ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। सभी ने पहुंचकर उसका हालचाल जाना। साथ ही यूक्रेन के हालात के बारे में भी जानकारी हासिल की। सुरेश ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि रूसी फौज के टैंक लगातार सड़कों पर दौड़ रहे थे। मिसाइल हमले में ऊंची-ऊंची बिल्डिंग पल भर में खंडहर में तब्दील हो रही थीं। चारों तरफ अफरातफरी का माहौल था। ऐसे माहौल में खुद को बचाना बहुत मुश्किल लग रहा था।
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सुरेश ने बताया कि प्रत्येक पल ऐसा लगता था कि कहीं ऐसा न हो कि कोई बम गिरे और सब कुछ समाप्त हो जाए। जान बचाने और घर सुरक्षित पहुंचने के लिए पहले रोमानिया बार्डर पर गए। वहां सुरक्षाकर्मियों ने बार्डर पार नहीं करने दिया। इसके बाद मीलों पैदल चलकर हंगरी बार्डर पर पहुंचे। वहां बड़ी मुश्किलों से बार्डर पार करने की अनुमति प्रदान कर दी गई। हंगरी पहुंचकर भारतीय दूतावास से संपर्क किया।
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भारतीय दूतावास में उसे किसी भी तरह की मुश्किलें नहीं हुईं। खाना-पानी दिया गया। वहां पहुंचकर लगा कि अब जिंदगी बच गई, लेकिन बस एक ही जज्बा था कि जल्द से जल्द वतन पहुंच जाएं। बहरहाल हंगरी से विमान से दिल्ली पहुंचे। वहां से वह गांव पहुंच गया। यूक्रेन के हालात के बारे में कहा कि जो कुछ वहां हो रहा है, वह उसकी नजरों से ओझल नहीं हो रहा है। सुरेश ने भारत सरकार व जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। कहा कि बगैर इनके सहयोग के वह सही सलामत घर नहीं पहुंच सकता था। इस बीच सुरेश के गांव पहुंचने की जानकारी होने पर नायब तहसीलदार, राजस्वकर्मी व क्षेत्रीय लेखपाल ने गांव पहुंचकर सुरेश से मुलाकात की और जानकारी प्राप्त की।
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