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कुर्मी राजनीति में सपा ने चला तुरुप का इक्का
AmbedkarNagar
Updated Fri, 19 Jul 2013 05:32 AM IST
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अंबेडकरनगर। दुग्ध विकास राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जाना पूर्वांचल की कुर्मी बिरादरी को साधने की दिशा में सपा का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कांग्रेस के बेनी प्रसाद वर्मा, भाजपा के विनय कटियार व बसपा के लालजी वर्मा के मुकाबले में सपा ने अब राममूर्ति वर्मा को प्रोजेक्ट किया है। कौन किस पर भारी पड़ेगा और राममूर्ति के माध्यम से चला गया दांव कितना कारगर होगा, यह तो भविष्य ही बताएगा। लेकिन इस फैसले ने पार्टी के भीतर से लेकर बाहर तक हलचल जरूर मचा दी है।
प्रदेश के मंत्रिमंडल विस्तार में जिले को एक बार फिर से बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री ने अकबरपुर के विधायक व दुग्ध विकास राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा का कद बढ़ाकर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है। इसे बसपा सरकार में जिले से रहे तीन कैबिनेट मंत्रियों के मुकाबले मौजूदा सरकार में संतुलन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है। अब तक यहां से स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन कैबिनेट मंत्री के रूप में हैं। कटेहरी विधायक शंखलाल मांझी स्वास्थ्य राज्यमंत्री हैं। राज्यमंत्री राममूर्ति को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिए जाने से बसपा के मुकाबले जिले को कम तरजीह दिए जाने के आरोपों से निजात मिल सकेगी। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे भी बढ़कर पार्टी ने यह निर्णय राममूर्ति वर्मा को पूरे पूर्वांचल में कुर्मी नेता के रूप में प्रोजेक्ट करने के चलते लिया है। कई टिकटों में किया गया फेरबदल भी इसी कवायद में शामिल है। इसी क्रम में ही उसने विधानसभा चुनाव के ठीक बाद अकबरपुर से पहली बार चुनाव जीते राममूर्ति वर्मा को राज्यमंत्री की शपथ दिला दी थी। उसी समय यह माना गया था कि पार्टी ने कुर्मी बिरादरी को अपने मिशन में शामिल कर लिया है। मंत्री रहते राममूर्ति को पूर्व घोषित प्रत्याशी हीरालाल यादव का टिकट काटकर टिकट दिया गया, तो यह संदेश और मजबूत होता दिखा। अब गुुरुवार को हुए मंत्रिमंडलीय विस्तार में राममूर्ति को कैबिनेटमंत्री का दर्जा दिया गया।
इससे यह साफ हो गया कि पार्टी ने कुर्मी मतों को अपने पाले में लाने के लिए पूर्वांचल में सबसे बड़ा दांव चल दिया है। दरअसल पूर्वांचल की कुर्मी बिरादरी की राजनीति में कांग्रेस के बेनी प्रसाद वर्मा, भाजपा के विनय कटियार व बसपा के लालजी वर्मा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। सपा का कोई नेता इस श्रेणी में शामिल नहीं था। पार्टी ने अब राममूर्ति वर्मा को इन नेताओं के मुकाबले प्रोजेक्ट कर यह जता दिया है कि लोकसभा चुनाव में उसकी खास नजर कुर्मी मतदाताओं पर रहेगी।
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प्रदेश के मंत्रिमंडल विस्तार में जिले को एक बार फिर से बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री ने अकबरपुर के विधायक व दुग्ध विकास राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा का कद बढ़ाकर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है। इसे बसपा सरकार में जिले से रहे तीन कैबिनेट मंत्रियों के मुकाबले मौजूदा सरकार में संतुलन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है। अब तक यहां से स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन कैबिनेट मंत्री के रूप में हैं। कटेहरी विधायक शंखलाल मांझी स्वास्थ्य राज्यमंत्री हैं। राज्यमंत्री राममूर्ति को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिए जाने से बसपा के मुकाबले जिले को कम तरजीह दिए जाने के आरोपों से निजात मिल सकेगी। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे भी बढ़कर पार्टी ने यह निर्णय राममूर्ति वर्मा को पूरे पूर्वांचल में कुर्मी नेता के रूप में प्रोजेक्ट करने के चलते लिया है। कई टिकटों में किया गया फेरबदल भी इसी कवायद में शामिल है। इसी क्रम में ही उसने विधानसभा चुनाव के ठीक बाद अकबरपुर से पहली बार चुनाव जीते राममूर्ति वर्मा को राज्यमंत्री की शपथ दिला दी थी। उसी समय यह माना गया था कि पार्टी ने कुर्मी बिरादरी को अपने मिशन में शामिल कर लिया है। मंत्री रहते राममूर्ति को पूर्व घोषित प्रत्याशी हीरालाल यादव का टिकट काटकर टिकट दिया गया, तो यह संदेश और मजबूत होता दिखा। अब गुुरुवार को हुए मंत्रिमंडलीय विस्तार में राममूर्ति को कैबिनेटमंत्री का दर्जा दिया गया।
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इससे यह साफ हो गया कि पार्टी ने कुर्मी मतों को अपने पाले में लाने के लिए पूर्वांचल में सबसे बड़ा दांव चल दिया है। दरअसल पूर्वांचल की कुर्मी बिरादरी की राजनीति में कांग्रेस के बेनी प्रसाद वर्मा, भाजपा के विनय कटियार व बसपा के लालजी वर्मा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। सपा का कोई नेता इस श्रेणी में शामिल नहीं था। पार्टी ने अब राममूर्ति वर्मा को इन नेताओं के मुकाबले प्रोजेक्ट कर यह जता दिया है कि लोकसभा चुनाव में उसकी खास नजर कुर्मी मतदाताओं पर रहेगी।
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