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धान बिक्री को भटक रहे किसान, नहीं हो रही खरीद
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अंबेडकरनगर। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित पांच एजेंसियों के 73 केंद्रों पर लक्ष्य के सापेक्ष 86.57 प्रतिशत धान खरीद के बाद एजेंसियों ने अब किसानों का धान लेना लगभग बंद कर दिया है। इससे किसानों को धान बेचने के लिए भटकना पड़ रहा है। अब तक 17 हजार 532 किसानों को धान बिक्री का लाभ मिल सका है।
खाद्य विभाग ने जहां लक्ष्य से 36 प्रतिशत अधिक धान की खरीद की, वहीं भारतीय खाद्य निगम ने लक्ष्य के सापेक्ष मात्र पांच प्रतिशत धान की खरीदारी की। अब जबकि केंद्रों पर धान खरीद का कार्य ठप पड़ गया है, तो ऐसे में शेष बचे किसानों को आढ़तियों के हाथों औने पौने दाम पर धान बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।
एक नवंबर 2018 से प्रारंभ हुआ धान खरीद का कार्य मौजूदा समय में पूरी तरह ठप पड़ा है। ऐसा तब है, जबकि खरीद का कार्य 28 फरवरी तक जारी रखने का निर्देश है। निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति न किए जाने के बावजूद खरीद कार्य ठप होने से किसानों को अपनी उपज बिक्री करने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
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उन्हें आढ़तियों के हाथों औने पौने दाम पर धान बिक्री करने को मजबूर होना पड़ रहा है। धान खरीद को लेकर एजेंसियां कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारतीय खाद्य निगम ने लक्ष्य के सापेक्ष मात्र पांच प्रतिशत धान की ही खरीद की है। इससे इतर खाद्य विभाग ने लक्ष्य के सापेक्ष 36 प्रतिशत अधिक धान की खरीद की।
खाद्य एवं विपणन विभाग के लिपिक शैलेंद्र ने बताया कि पांच एजेंसियों के 73 केंद्रों पर मिले लक्ष्य एक लाख 32 हजार 600 एमटी के सापेक्ष 17 हजार 500 किसानों के 114734.362 एमटी की खरीद हुई, जो कि लक्ष्य का 86.57 प्रतिशत है।
इसमें खाद्य विभाग के 20 केंद्रों पर 48 हजार 600 एमटी के सापेक्ष 10 हजार एक किसान का 66136.920 एमटी, पीसीएफ के 37 केंद्र पर 35 हजार एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 3265 किसानों का 19298.600 एमटी, यूपीपीसीयू के 12 केंद्रों पर 21 हजार एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 2934 किसानों का 18387.360 एमटी, कर्मचारी कल्याण निगम के 3 केंद्र पर 10 हजार एमटी के सापेक्ष 1148 किसानों का 9863.80 एमटी, भारतीय खाद्य निगम के एक केंद्र पर 18 हजार एमटी के सापेक्ष 184 किसानों का 1047.680 एमटी धान खरीदा गया।
50 क्विंटल से अधिक खरीद पर हो जांच
अकबरपुर के किसान जियाराम पटेल व दिलीप वर्मा ने कहा कि गत वर्ष एक किसान से 100 क्विंटल से अधिक धान खरीद में अनियमितता का मामला सामने आया था। कुछ के विरुद्ध केस भी दर्ज कराया गया था। इस बार शासन के निर्देशानुसार 100 क्विंटल से कम बिक्री पर जांच न किए जाने की जानकारी पर एजेंसीधारकों व मिल मालिकों ने मिलकर बड़ी गड़बड़ी की है। इस बार 60 से 70 क्विंटल तक का धान फर्जी किसानों के नाम पर खरीदा गया है। इसकी जांच कराने की आवश्यकता है। 50 क्विंटल से अधिक बिक्री करने वाले प्रत्येक किसान की जांच कराई जाए। साथ ही दोषियों के विरुद्ध केस दर्ज कर कार्रवाई की जाए। भीटी के किसान रमेश तिवारी व राजेश सिंह ने कहा कि धान खरीद का कार्य तक तब जारी रखना चाहिए, जब तक कि सभी किसान अपनी उपज की बिक्री न कर लें।
वर्जन
नियमित रूप से हो रही धान खरीद
धान खरीद का कार्य ठप नहीं है। जिन केंद्रों पर किसान उपज लेकर नहीं पहुंच रहे हैं, वहां खरीद का कार्य ठप है। कहा कि किसान अपनी उपज लेकर संबंधित केंद्र पर जाएं, उनके धान की खरीद अवश्य की जाएगी।
- अजित प्रताप सिंह, खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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खाद्य विभाग ने जहां लक्ष्य से 36 प्रतिशत अधिक धान की खरीद की, वहीं भारतीय खाद्य निगम ने लक्ष्य के सापेक्ष मात्र पांच प्रतिशत धान की खरीदारी की। अब जबकि केंद्रों पर धान खरीद का कार्य ठप पड़ गया है, तो ऐसे में शेष बचे किसानों को आढ़तियों के हाथों औने पौने दाम पर धान बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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एक नवंबर 2018 से प्रारंभ हुआ धान खरीद का कार्य मौजूदा समय में पूरी तरह ठप पड़ा है। ऐसा तब है, जबकि खरीद का कार्य 28 फरवरी तक जारी रखने का निर्देश है। निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति न किए जाने के बावजूद खरीद कार्य ठप होने से किसानों को अपनी उपज बिक्री करने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
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उन्हें आढ़तियों के हाथों औने पौने दाम पर धान बिक्री करने को मजबूर होना पड़ रहा है। धान खरीद को लेकर एजेंसियां कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारतीय खाद्य निगम ने लक्ष्य के सापेक्ष मात्र पांच प्रतिशत धान की ही खरीद की है। इससे इतर खाद्य विभाग ने लक्ष्य के सापेक्ष 36 प्रतिशत अधिक धान की खरीद की।
खाद्य एवं विपणन विभाग के लिपिक शैलेंद्र ने बताया कि पांच एजेंसियों के 73 केंद्रों पर मिले लक्ष्य एक लाख 32 हजार 600 एमटी के सापेक्ष 17 हजार 500 किसानों के 114734.362 एमटी की खरीद हुई, जो कि लक्ष्य का 86.57 प्रतिशत है।
इसमें खाद्य विभाग के 20 केंद्रों पर 48 हजार 600 एमटी के सापेक्ष 10 हजार एक किसान का 66136.920 एमटी, पीसीएफ के 37 केंद्र पर 35 हजार एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 3265 किसानों का 19298.600 एमटी, यूपीपीसीयू के 12 केंद्रों पर 21 हजार एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 2934 किसानों का 18387.360 एमटी, कर्मचारी कल्याण निगम के 3 केंद्र पर 10 हजार एमटी के सापेक्ष 1148 किसानों का 9863.80 एमटी, भारतीय खाद्य निगम के एक केंद्र पर 18 हजार एमटी के सापेक्ष 184 किसानों का 1047.680 एमटी धान खरीदा गया।
50 क्विंटल से अधिक खरीद पर हो जांच
अकबरपुर के किसान जियाराम पटेल व दिलीप वर्मा ने कहा कि गत वर्ष एक किसान से 100 क्विंटल से अधिक धान खरीद में अनियमितता का मामला सामने आया था। कुछ के विरुद्ध केस भी दर्ज कराया गया था। इस बार शासन के निर्देशानुसार 100 क्विंटल से कम बिक्री पर जांच न किए जाने की जानकारी पर एजेंसीधारकों व मिल मालिकों ने मिलकर बड़ी गड़बड़ी की है। इस बार 60 से 70 क्विंटल तक का धान फर्जी किसानों के नाम पर खरीदा गया है। इसकी जांच कराने की आवश्यकता है। 50 क्विंटल से अधिक बिक्री करने वाले प्रत्येक किसान की जांच कराई जाए। साथ ही दोषियों के विरुद्ध केस दर्ज कर कार्रवाई की जाए। भीटी के किसान रमेश तिवारी व राजेश सिंह ने कहा कि धान खरीद का कार्य तक तब जारी रखना चाहिए, जब तक कि सभी किसान अपनी उपज की बिक्री न कर लें।
वर्जन
नियमित रूप से हो रही धान खरीद
धान खरीद का कार्य ठप नहीं है। जिन केंद्रों पर किसान उपज लेकर नहीं पहुंच रहे हैं, वहां खरीद का कार्य ठप है। कहा कि किसान अपनी उपज लेकर संबंधित केंद्र पर जाएं, उनके धान की खरीद अवश्य की जाएगी।
- अजित प्रताप सिंह, खाद्य एवं विपणन अधिकारी