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कुपोषण मुक्त करने के अभियान को लग रहा करारा झटका

Tue, 28 Aug 2018 11:16 PM IST
Updated Tue, 28 Aug 2018 11:16 PM IST
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कुपोषण मुक्त करने के अभियान को लग रहा करारा झटका
अंबेडकरनगर। जिले में बच्चों को कुपोषण मुक्त करने की योजना पूरी तरह धराशायी हो गई है। योजनाओं को जमीनी हकीकत देने को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा तनिक भी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। इसी का नतीजा है कि अगस्त में अभियान चलाकर 2 लाख 73 हजार 116 बच्चों का वजन किया गया, जिसमें 22 हजार 139 बच्चे अति कुपोषित, जबकि 48 हजार 737 बच्चे कुपोषित पाए गए।
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सबसे अधिक अकबरपुर विकास खंड में 3574 अति कुपोषित, जबकि सबसे कम भीटी में 1607 अति कुपोषित बच्चे चिन्हित किए गए। इन सभी बच्चों को अति कुपोषित की श्रेणी से बाहर निकालने के लिए जिला अस्पताल में स्थापित पोषण पुनर्वास केंद्र भेज दिया गया।
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बच्चों को कुपोषण मुक्त रखने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पुष्टाहार योजना का संचालन किया जा रहा है। योजना के तहत बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रीमिक्स लड्डू, मीठी व नमकीन दलिया दिया जाता है। यह अलग बात है कि बच्चों को योजना का समुचित लाभ दिलाने को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई जाती।
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और तो और जिले को कुपोषण मुक्त करने के लिए शासन के निर्देश पर 43 जिलास्तरीय अधिकारियों ने दो दो गांव अर्थात कुल 86 गांवों को गोद लिया था। बीती 25 अगस्त से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पोषण मेले का भी आयोजन हो रहा है। इन सबके बावजूद जिले में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में कमी नहीं हो रही है।

बाल विकास विभाग के लिपिक इंद्रजीत वर्मा ने बताया कि अगस्त में अभियान चलाकर 2 लाख 73 हजार 116 बच्चों का वजन कराया गया था। इसमें 22 हजार 139 बच्चे अति कुपोषित पाए गए। अकबरपुर विकास खंड में सबसे अधिक 3574 अति कुपोषित व भीटी में सबसे कम 1607 बच्चे चिन्हित हुए। इसके अलावा जहांगीरगंज में 2187, रामनगर में 2420, भियांव में 2259, कटेहरी में 1741, टांडा में 2681, बसखारी में 2399 व जलालपुर में 3271 अति कुपोषित बच्चों का चिन्हित किया गया। इन सभी बच्चों को जिला अस्पताल में स्थापित पोषण पुनर्वास केंद्र में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। बताया कि जांच में 48 हजार 737 बच्चे कुपोषित पाए गए।

योजनाओं का दिलाया जाए समुचित लाभ
सामाजिक कार्यकर्ता अनंतराम वर्मा ने कहा कि बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर योजनाओं का संचालन तो किया जा रहा है, लेकिन उसका लाभ बच्चों को सुचारु रूप से मिल सके, इसके लिए कोई गंभीरता नहीं दिखाई जाती। जब तक योजना को जमीनी हकीकत देने के लिए ठोस कार्य योजना नहीं तैयार की जाती, तब तक जिले को कुपोषण मुक्त नहीं किया जा सकता है। अकबरपुर के लालजी व सर्वेश ने कहा कि अतिकु पोषित बच्चों को इस श्रेणी से बाहर निकालने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।


योजनाओं का सुचारु रूप से हो रहा क्रियान्वयन
पोषण योजनाओं का सुचारु रूप से क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसका बच्चों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके, इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। अति कुपोषित बच्चों को इस श्रेणी से बाहर निकालने के लिए उनका जिला अस्पताल में समुचित इलाज कराया जाता है।
- विनोद कुमार, जिला अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी
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