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लक्ष्य था 809 का, हो सके सिर्फ 335 गांव ही ओडीएफ

Thu, 15 Mar 2018 11:49 PM IST
Updated Thu, 15 Mar 2018 11:49 PM IST
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लक्ष्य था 809 का, हो सके सिर्फ 335 गांव ही ओडीएफ
अंबेडकरनगर। गांवों को ओडीएफ करने के लिए संचालित स्वच्छ भारत मिशन योजना जिले में पूरी तरह धराशायी हो गई है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मार्च 2018 तक जिले 809 गांवों को ओडीएफ करने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन अब तक मात्र 335 गांव ही ओडीएफ हो सके हैं। धनाभाव व डीपीआरओ कार्यालय की लापरवाही का ही नतीजा है कि 809 गांवों के सापेक्ष 341 गांवों में अब तक शौचालय का निर्माण ही नहीं शुरू हो सका है। ओडीएफ घोषित किए गए 335 गांवों में लगभग 30 हजार शौचालय का निर्माण हुआ है, जबकि 133 गांवों में 10 हजार शौचालयों का निर्माण कार्य जारी है। ऐसे में मार्च तक ओडीएफ के लक्ष्य को पूरा किया जा सकेगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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खुले में शौच रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन योजना का संचालन किया जा रहा है। योजना के तहत गांवों में ज्यादा से ज्यादा शौचालय का निर्माण कराए जाने का प्राविधान है। शासन ने 2 अक्तूबर 2018 तक जिले को, जबकि मार्च 2018 तक जिले के 809 गांव को ओडीएफ किए जाने का लक्ष्य दिया गया है। यह अलग बात है कि लक्ष्य को पूरा करने को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। 809 गांवों के सापेक्ष अब तक मात्र 335 गांव को ही ओडीएफ घोषित किया जा सका है। इन गांवों में लगभग 30 हजार शौचालय का निर्माण कराया गया है। 133 गांवों में 10 हजार शौचालय का निर्माण कार्य जारी है, जबकि 341 गांवों में अब तक शौचालय का निर्माण कार्य प्रारंभ ही नहीं हो सका है। शौचालय निर्माण में गति न पकडने का कारण धनाभाव बताया जा रहा है। विभाग के अनुसार 809 गांवों को ओडीएफ करने के लिए 68 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, लेकिन अब तक 35 करोड़ रुपये ही विभाग को उपलब्ध हो सका है। अब जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में लगभग एक पखवारे का समय शेष रह गया है, तो ऐसे में लक्ष्य को किस प्रकार पूरा किया जा सकेगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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स्वच्छता ग्राही की हैं 80 टीमें
खुले में शौच रोकने के लिए शासनस्तर पर स्वच्छताग्राही की तैनाती की गई है। इनका मुख्य कार्य गांव गांव जाकर गा्रमीणों को खुले में शौच न करने तथा अधिक से अधिक शौचालय का प्रयोग करना है। जिले में इसके लिए स्वच्छताग्राही की कुल 80 टीमें बनाई गई हैं, जिसमें 512 सदस्य शामिल हैं। प्रतिदिन इन टीमों को गांव गांव, घर घर जाकर लोगों को जागरूक करने का निर्देश है।
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मैन पावर की है कमी
जिला मुख्यालय के अलावा नगर व कस्बों में साफ सफाई की जिम्मेदारी नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों की है। सभी नगर पालिका व नगर पंचायतों में मैन पावर की कमीं है। इसके चलते ही साफ सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं आ रही है। नियमानुसार नगर पालिका परिषद क्षेत्र में 10 हजार की आबादी पर 28 सफाईकर्मियों की तैनाती होनी चाहिए। ऐसे में अकबरपुर नगर पालिका परिषद में लगभग 308 सफाईकर्मी होनी चाहिए, लेकिन 186 सफाईकर्मियों की तैनाती है। इसमें स्थाई व संविदाकर्मी शामिल हैं। मैन पावर की कमीं के बावजूद अकबरपुर नगर पालिका परिषद क्षेत्र में साफ सफाई को सुचारु करने के लिए 5 छोटा पिकअप, दो ट्रैक्टर-ट्रॉली व एक जेसीबी मशीन है।

गांव में नहीं पहुंचते सफाईकर्मी
जिले में कुल 930 ग्राम पंचायतें हैं। इन गांवों में साफ सफाई की जिम्मेदारी कुल 1741 सफाईकर्मियों पर है। सफाईकर्मियों को निर्देशित किया गया है कि वे प्रतिदिन गांवों में पहुंचकर साफ सफाई करें। यह अलग बात है कि ज्यादातर सफाईकर्मी गांव तक पहुंचते ही नहीं हैं। इसकी शिकायत डीपीआरओ कार्यालय में की भी जाती है, लेकिन इसे लेकर अधिक गंभीरता नहीं दिखाई जाती है। इसी का नतीजा है कि गांवों में साफ सफाई पटरी पर नहीं आ रही है।

वरदान साबित होगी अमृत योजना
शहरी व नगरीय क्षेत्रों में लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सके, इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा अमृत योजना का संचालन किया जा रहा है। यह योजना लोगों के लिए वरदान भी साबित हो रही है। अकबरपुर नगर पालिका परिषद क्षेत्र में पूर्व में नौ ट्यूबवेल व पांच ओवरहेड टैंक के माध्यम से जलापूर्ति की जाती थी। अब योजना के तहत प्रथम चरण में तीन ट्यूबवेल, एक ओवरहेड टैंक तथा द्वितीय चरण में 22 ट्यूबवेल व 6 ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया जाएगा। अधिशाषी अभियंता सुरेश मौर्य ने बताया कि योजना के तहत इनके निर्माण से जिला मुख्यालय पर पेयजल व्यवस्था और भी अच्छी हो जाएगी।


स्वच्छता अभियान को दी जा रही मजबूती
स्वच्छता मुहिम को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम चल रहा है। गांवों को तेजी से ओडीएफ किया जा रहा है। शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में कर्मचारियों को साफ सफाई की बेहतरी के निर्देश हैं। समय समय पर समीक्षा कर लापरवाही पाए जानेे पर कार्रवाई भी होती है। -मथुरा प्रसाद मिश्र, जिला विकास अधिकारी
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