{"_id":"5a4531ec4f1c1b0d698c4c56","slug":"151448436585-ambedkar-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्ची न मिलने से खेतों में खड़ी है करीब 5 हजार हेक्टेयर में पेड़ी गन्ना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्ची न मिलने से खेतों में खड़ी है करीब 5 हजार हेक्टेयर में पेड़ी गन्ना
Updated Fri, 29 Dec 2017 12:49 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पांच हजार हेक्टेयर पेड़ी गन्ना खेतों खड़ा, किसान परेशान
अंबेडकरनगर। अकबरपुर चीनी मिल से अभी तक गन्ना बिक्री की पर्ची नहीं मिलने से किसानों को तगड़ा झटका लगा है। इससे सैकड़ों किसानों का पांच हजार हेक्टेयर पेड़ी गन्ना अभी खेतों में ही खड़ा है। उस गन्ने की बिक्री के बाद खाली खेत में गेहूं, सरसो आदि की बोआई करने की आए लगाए किसान बेहद निराश हैं। उनकी तैयारी पर मिल के रवैए के चलते पानी फिर गया है।
शिकायत के बावजूद पर्ची नहीं मिलने से किसानों का धैर्य जवाब दे रहा है। किसानों का आरोप है कि स्थानीय काश्तकारों को पर्ची नहीं दी जा रही और दूसरे जनपद से गन्ने की खरीद की जा रही है। चीनी मिल अकबरपुर की स्थापना के बाद से जिले में गन्ने की खेती बढ़ी है। चीनी मिल प्रबंधन द्वारा खरीद को लेकर किए जाने वाले दावे पेराई सत्र शुरु होते हवाई साबित होने लगते हैं।
मौजूदा पेराई सत्र शुरु हुए एक माह से अधिक समय बीत गया, लेकिन अभी तक जिले के किसानों का पेड़ी गन्ना खरीदा नहीं जा सका है। किसान पेड़ी गन्ने की बिक्री करने के बाद खाली खेत में गेहूं या फिर अन्य फसल की बोआई करते हैं। जिले में 18 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में पौधा गन्ना और करीब 12 हजार हेक्टेयर में पेड़ी गन्ना बोया गया था। परन्तु मिल प्रबंधन की ढिलाई के चलते अभी तक करीब 5 हजार हेक्टेयर का पेड़ी गन्ना खरीदा नहीं गया है जबकि मिल प्रबंधन पेड़ी गन्ने की खरीद पहले करता है।
विज्ञापन
किसानों का कहना है कि चीनी मिल प्रबंधन की मनमानी से उन्हें तगड़ा झटका लगा है। कटरिया सम्मनपुर के अनंतराम वर्मा व बिपिन सिंह का कहना है कि मिल के चलते उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। दोनों किसानों के पास तीन बीघा पेड़ी गन्ना है। अभी तक उन्हें एक भी पर्ची नहीं मिल सकी है। उन्होंने पेड़ी गन्ने की बिक्री के बाद खाली खेत में सरसों व गेहूं की बोआई करने की तैयारी की थी।
राजेसुल्तानपुर के प्रेमनरायण यादव व विनोद सिंह का छह बीघा पेड़ी गन्ना खेत में ही लगा है। यह स्थिति मिल से पर्ची नहीं मिलने के चलते है। गन्ना बिकने के बाद दूसरी फसल उगाने की उम्मीद अब खत्म हो गई है। इस तरह कटेहरी के प्रदीप कुमार, अरियौना के राजेन्द्र, बरधा भिउरा के प्रकाश राय, प्रदीप कुमार, मंगल वर्मा, कृष्ण प्रताप, हनुमान वर्मा समेत सैकड़ों किसान गन्ने की बिक्री के लिए पर्ची नहीं मिलने से परेशान हैं।
अनंतराम वर्मा, महेन्द्र यादव, सुनील शर्मा, जगदीश प्रसाद आदि का कहना है कि बीते दिनों इस बावत डीएम अखिलेश सिंह को बताया तो उन्होंने आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिला। उसके एक सप्ताह बाद भी पर्ची नहीं मिल सकी। ऐसे में उन्होंने सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
कैलेंडर के हिसाब से दी जा रही पर्ची
किसानों को घबराने की जरूरत नही है। सारी व्यवस्थाएं ऑनलाइन हैं। किसान इंटरनेट के जरिए पर्ची की स्थिति जान सकते हैं। कैलेंडर के आधार पर किसानों को पर्ची भेजी जा रही है। सभी किसानों के गन्ने की खरीद सुनिश्चित की जाएगी।
-प्रदीप सिंह सालार, जीएम चीनी मिल अकबरपुर
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। अकबरपुर चीनी मिल से अभी तक गन्ना बिक्री की पर्ची नहीं मिलने से किसानों को तगड़ा झटका लगा है। इससे सैकड़ों किसानों का पांच हजार हेक्टेयर पेड़ी गन्ना अभी खेतों में ही खड़ा है। उस गन्ने की बिक्री के बाद खाली खेत में गेहूं, सरसो आदि की बोआई करने की आए लगाए किसान बेहद निराश हैं। उनकी तैयारी पर मिल के रवैए के चलते पानी फिर गया है।
शिकायत के बावजूद पर्ची नहीं मिलने से किसानों का धैर्य जवाब दे रहा है। किसानों का आरोप है कि स्थानीय काश्तकारों को पर्ची नहीं दी जा रही और दूसरे जनपद से गन्ने की खरीद की जा रही है। चीनी मिल अकबरपुर की स्थापना के बाद से जिले में गन्ने की खेती बढ़ी है। चीनी मिल प्रबंधन द्वारा खरीद को लेकर किए जाने वाले दावे पेराई सत्र शुरु होते हवाई साबित होने लगते हैं।
विज्ञापन
मौजूदा पेराई सत्र शुरु हुए एक माह से अधिक समय बीत गया, लेकिन अभी तक जिले के किसानों का पेड़ी गन्ना खरीदा नहीं जा सका है। किसान पेड़ी गन्ने की बिक्री करने के बाद खाली खेत में गेहूं या फिर अन्य फसल की बोआई करते हैं। जिले में 18 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में पौधा गन्ना और करीब 12 हजार हेक्टेयर में पेड़ी गन्ना बोया गया था। परन्तु मिल प्रबंधन की ढिलाई के चलते अभी तक करीब 5 हजार हेक्टेयर का पेड़ी गन्ना खरीदा नहीं गया है जबकि मिल प्रबंधन पेड़ी गन्ने की खरीद पहले करता है।
विज्ञापन
किसानों का कहना है कि चीनी मिल प्रबंधन की मनमानी से उन्हें तगड़ा झटका लगा है। कटरिया सम्मनपुर के अनंतराम वर्मा व बिपिन सिंह का कहना है कि मिल के चलते उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। दोनों किसानों के पास तीन बीघा पेड़ी गन्ना है। अभी तक उन्हें एक भी पर्ची नहीं मिल सकी है। उन्होंने पेड़ी गन्ने की बिक्री के बाद खाली खेत में सरसों व गेहूं की बोआई करने की तैयारी की थी।
राजेसुल्तानपुर के प्रेमनरायण यादव व विनोद सिंह का छह बीघा पेड़ी गन्ना खेत में ही लगा है। यह स्थिति मिल से पर्ची नहीं मिलने के चलते है। गन्ना बिकने के बाद दूसरी फसल उगाने की उम्मीद अब खत्म हो गई है। इस तरह कटेहरी के प्रदीप कुमार, अरियौना के राजेन्द्र, बरधा भिउरा के प्रकाश राय, प्रदीप कुमार, मंगल वर्मा, कृष्ण प्रताप, हनुमान वर्मा समेत सैकड़ों किसान गन्ने की बिक्री के लिए पर्ची नहीं मिलने से परेशान हैं।
अनंतराम वर्मा, महेन्द्र यादव, सुनील शर्मा, जगदीश प्रसाद आदि का कहना है कि बीते दिनों इस बावत डीएम अखिलेश सिंह को बताया तो उन्होंने आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिला। उसके एक सप्ताह बाद भी पर्ची नहीं मिल सकी। ऐसे में उन्होंने सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
कैलेंडर के हिसाब से दी जा रही पर्ची
किसानों को घबराने की जरूरत नही है। सारी व्यवस्थाएं ऑनलाइन हैं। किसान इंटरनेट के जरिए पर्ची की स्थिति जान सकते हैं। कैलेंडर के आधार पर किसानों को पर्ची भेजी जा रही है। सभी किसानों के गन्ने की खरीद सुनिश्चित की जाएगी।
-प्रदीप सिंह सालार, जीएम चीनी मिल अकबरपुर