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कोहरे का प्रकोप कम होने से लोगों ने ली राहत की सांस
Updated Wed, 27 Dec 2017 10:33 PM IST
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कड़ाके की ठंड ने कंपकंपाया
अंबेडकरनगर। कड़ाके की ठंड से बुधवार को भी लोग कंपकंपाए। कोहरे का प्रकोप कुछ कम होने से किसानों ने राहत की सांस ली। दिन में धूप तो निकली, मगर अधिक तपिश नहीं होने के चलते इससे लोगों को ठंड से निजात नहीं मिल सकी।
गौरतलब है कि, तीन दिन से घने कोहरे के चलते आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। कोहरे ने फूल वाली फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालना शुरू कर दिया था। बुधवार को कोहरे का प्रकोप कुछ कम हुआ, तो सबसे अधिक किसानों ने राहत की सांस ली। कारण ये कि कोहरे से न सिर्फ फूल वाली फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था, बल्कि आलू की फसल पर भी पाला पड़ने की आशंका बढ़ गई थी। बुधवार को दिन में धूप निकली, तो न सिर्फ किसान, बल्कि ठंड से कांप रहे लोगों को भी कुछ राहत महसूस हुई। हालांकि धूप में अधिक तपिश नहीं होने से इसका समुचित लाभ लोगों को नहीं मिल सका। शाम होते ही कड़ाके की ठंड से लोग कंपकंपा उठे। देर शाम तक सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। ठंड के चलते जरूरी काम होने पर ही लोग बाहर निकले। उधर, ठंड बढ़ने के बावजूद प्रशासन द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। ठंड से बचने के लिए लोगों को खुद ही व्यवस्था करनी पड़ रही है। और तो और कंबल का भी सुचारु ढंग से वितरण नहीं हो सका। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लोग कड़ाके की ठंड में ठिठुर रहे हैं।
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अंबेडकरनगर। कड़ाके की ठंड से बुधवार को भी लोग कंपकंपाए। कोहरे का प्रकोप कुछ कम होने से किसानों ने राहत की सांस ली। दिन में धूप तो निकली, मगर अधिक तपिश नहीं होने के चलते इससे लोगों को ठंड से निजात नहीं मिल सकी।
गौरतलब है कि, तीन दिन से घने कोहरे के चलते आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। कोहरे ने फूल वाली फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालना शुरू कर दिया था। बुधवार को कोहरे का प्रकोप कुछ कम हुआ, तो सबसे अधिक किसानों ने राहत की सांस ली। कारण ये कि कोहरे से न सिर्फ फूल वाली फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था, बल्कि आलू की फसल पर भी पाला पड़ने की आशंका बढ़ गई थी। बुधवार को दिन में धूप निकली, तो न सिर्फ किसान, बल्कि ठंड से कांप रहे लोगों को भी कुछ राहत महसूस हुई। हालांकि धूप में अधिक तपिश नहीं होने से इसका समुचित लाभ लोगों को नहीं मिल सका। शाम होते ही कड़ाके की ठंड से लोग कंपकंपा उठे। देर शाम तक सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। ठंड के चलते जरूरी काम होने पर ही लोग बाहर निकले। उधर, ठंड बढ़ने के बावजूद प्रशासन द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। ठंड से बचने के लिए लोगों को खुद ही व्यवस्था करनी पड़ रही है। और तो और कंबल का भी सुचारु ढंग से वितरण नहीं हो सका। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लोग कड़ाके की ठंड में ठिठुर रहे हैं।
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