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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   World Bee Day: India is a rich home to over 800 species of bees, but the world is shrinking.

World Bee Day : भारत मधुमक्खियों की 800 से अधिक प्रजातियों का समृद्ध घर, पर सिमट रहा संसार

Wed, 20 May 2026 06:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 20 May 2026 06:57 PM IST
सार

हर साल 20 मई को दुनिया भर में विश्व मधुमक्खी दिवस मनाया जाता है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जगदीश सैनी ने हमारे पारिस्थितिकी तंत्र और खाद्य सुरक्षा में इन नन्हे जीवों की भूमिका को रेखांकित किया।

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World Bee Day: India is a rich home to over 800 species of bees, but the world is shrinking.
विश्व मधुमक्खी दिवस। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

हर साल 20 मई को दुनिया भर में विश्व मधुमक्खी दिवस मनाया जाता है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जगदीश सैनी ने हमारे पारिस्थितिकी तंत्र और खाद्य सुरक्षा में इन नन्हे जीवों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में एनिमल पॉलिनेशन (परागण) का वार्षिक बाजार मूल्य लगभग 2352 बिलियन डॉलर है। इस पूरे परागण चक्र में अकेले मधुमक्खियां 73 प्रतिशत की जिम्मेदारी संभालती हैं। यदि ये लुप्त हो गईं तो पूरी वैश्विक खाद्य शृंखला और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। भारत वर्तमान में मधुमक्खियों की 800 से अधिक प्रजातियों का समृद्ध घर है।

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राज्यों के आंकड़ों में भारी असंतुलन

वैज्ञानिक शोध के अनुसार, देश के 10 बायोग्राफिकल जोन्स (जलवायु क्षेत्रों) में मधुमक्खियों का प्रादेशिक वितरण काफी असमान है। उत्तराखंड और हिमाचल जैसे हिमालयन राज्यों में इनकी सघनता सबसे अधिक है, जबकि उत्तर प्रदेश जैसे मैदानी राज्य इस ग्राफ में काफी पीछे छूट रहे हैं।
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यूपी में कीटनाशकों का बढ़ा ग्राफ

उत्तर प्रदेश वर्तमान में सबसे ज्यादा कीटनाशकों का उपयोग करने वाले देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है, जो यहां मधुमक्खियों की आबादी घटने का मुख्य कारण है। इसी प्रादेशिक कमी (गैप) को दूर करने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र इस क्षेत्र में विशेष अनुसंधान कर रहे हैं।

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बी-वेनम और प्रोपोलिस पर शोध

शहद के अलावा मधुमक्खियों से मिलने वाले प्रोपोलिस और बी-वेनम (जहर) पर भी शोध चल रहा है। इनके डंक में मौजूद विशेष केमिकल्स का उपयोग भविष्य में कई बड़ी बीमारियों की दवाइयां और एंटीबायोटिक्स के विकल्प तैयार करने में किया जा रहा है।

ग्रामीण रोजगार का बड़ा जरिया

मौनपालन ग्रामीण भारत में रोजगार सृजन का बड़ा जरिया बन चुका है। आंकड़ों के अनुसार, देश में 20 करोड़ से अधिक मधुमक्खी कॉलोनियों की क्षमता मौजूद है, जो 60 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों और बेरोजगार युवाओं को कम लागत में आजीविका प्रदान कर सकती है।

बहुउपयोगी बी-वैक्स के लाभ

शहद निष्कर्षण के बाद प्राप्त होने वाला बी-वैक्स (मोम) औषधीय और औद्योगिक रूप से बेहद कीमती है। इसमें मौजूद एंटी-माइक्रोबियल गुणों के कारण इसका उपयोग त्वचा संक्रमण, जलने के घावों को ठीक करने, सौंदर्य प्रसाधनों (लिप बाम, क्रीम) और प्रदूषण-मुक्त मोमबत्तियां बनाने में प्रमुखता से होता है।

परागण चक्र और नेस्टिंग बिहेवियर

मकरंद इकट्ठा करते समय मधुमक्खियां नर पौधे के परागकण को अनजाने में मादा पौधे के स्टिग्मा पर गिरा देती हैं, जिससे फूल फल में बदल जाता है। सामान्य मधुमक्खियों से अलग कई जंगली प्रजातियां सॉइल नेस्टिंग करती हैं यानी मिट्टी के भीतर सुरंगें बनाकर रहती हैं।

ऑस्ट्रेलिया तक सीमित है मधुमक्खियों का सातवां स्टेनोट्रिटिडे परिवार

वैश्विक स्तर पर मौजूद मधुमक्खियों के सात प्रमुख परिवारों में से छह परिवार भारत में मिलते हैं। इनमें कोलेटिडे परिवार की 518 प्रजातियों में से 15 भारत में दर्ज हैं। हालांकि, आदिम और अत्यंत दुर्लभ माना जाने वाला सातवां परिवार स्टेनोट्रिटिडे भारत में नहीं पाया जाता। यह पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप तक सीमित है।

मधुमक्खियों अस्तित्व पर मंडराते बड़े खतरे

वर्तमान में मधुमक्खियां पांच बड़े खतरों कीटनाशक, मोनोकल्चर (एक ही तरह की खेती), हैबिटैट लॉस (आवास का नुकसान), पैथोजन स्प्रेड (व्यावसायिक बीमारियां) और क्लाइमेट चेंज से जूझ रही हैं। एकल खेती के कारण विशिष्ट पौधों पर निर्भर रहने वाली मधुमक्खियों को भोजन नहीं मिल पाता है।

संरक्षण के लिए व्यावहारिक उपाय

मधुमक्खियों के संरक्षण के लिए केमिकल फ्री वातावरण को बढ़ावा देना होगा। इसके प्रयोग के तौर पर इविवि परिसर में पेड़ों पर पांच आर्टिफिशियल नेस्ट (कृत्रिम घोंसले) लगाए गए हैं। साथ ही, मिट्टी में घोंसला बनाने वाली मक्खियों की रक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए बी-वॉलंटियर्स की टीमें तैयार करने की सख्त आवश्यकता है।

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