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Prayagraj : पंत के इंतजार में हरिवंश राय बच्चन ने रखा था बंगले का नाम प्रतीक्षा, नहीं पूरी हो सकी ख्वाहिश
Mon, 20 May 2024 01:45 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 20 May 2024 01:45 PM IST
सार
उत्तराखंड के कौसानी में पैदा हुए सुमित्रानंदन पंत की प्रयागराज कर्मभूमि रही है। वह लंबे समय तक प्रतापगढ़ के कालाकांकर में रहे, लेकिन उनकी इच्छा इलाहाबाद में रहने की थी। अंतत: 1940 में वह इलाहाबाद आए तो अपने करीबी नरेंद्र शर्मा के साथ नया कटरा स्थित दिलकुशा में रहने लगे।
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सुमित्रानंदन पंत।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
प्रकृति के सुकुमार कवि के रूप में विख्यात महाकवि सुमित्रानंदन पंत का एक बंगले में इंतजार कभी पूरा नहीं हुआ। वह बंगला कोई और नहीं मुंबई स्थित सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का है, जिसे दुनिया प्रतीक्षा के नाम से जानती है। अपने गहरे पारिवारिक मित्र पंत के इंतजार में उस बंगले का नाम हरिवंश राय बच्चन की सलाह पर अमिताभ बच्चन ने रखा था।
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उत्तराखंड के कौसानी में पैदा हुए सुमित्रानंदन पंत की प्रयागराज कर्मभूमि रही है। वह लंबे समय तक प्रतापगढ़ के कालाकांकर में रहे, लेकिन उनकी इच्छा इलाहाबाद में रहने की थी। अंतत: 1940 में वह इलाहाबाद आए तो अपने करीबी नरेंद्र शर्मा के साथ नया कटरा स्थित दिलकुशा में रहने लगे। वहीं हरिवंश राय बच्चन भी रहते थे। कुछ दिनों में ही बच्चन से इतनी नजदीकी हो गई कि फिर वह बच्चन के साथ ही रहने लगे। हरिवंश राय बच्चन ने अपनी आत्मकथा ‘नीड का निर्माण फिर‘ में भी पंत से अपने संबंधों को रेखांकित किया है।
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वह लिखते हैं कि पहली मुलाकात में ही पंत जी ने तेजी को और तेजी ने पंत जी को समझ लिया था। उनकी कविताओं और उनके अपने पूर्व संबंधों को मैं तेजी को पहले ही परिचित करा चुका था। वह लिखते हैं कि पंत का इरादा इलाहाबाद में रहने का था। तेजी ने उनको आमंत्रित किया कि वह हमारे साथ आकर रहें। पंत ने इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया। वे दूसरे दिन अपने सामान के साथ मेरे यहां आने वाले थे।
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हमने उनके लिए बाहरी बरामदे के एक ओर का छोटा कमरा ठीक कर दिया था। उसके ठीक दूसरी और मेरा अध्ययन कक्ष था। सरस्वती पत्रिका के संपादक अनुपम परिहार ने जयंती की पूर्व संध्या पर सुमित्रानंदन पंत से जुड़े कई संस्मरणों को साझा किया। वह बताते हैं कि पंत-बच्चन और तेजी में खूब प्रगाढ़ता हो गई थी। कविताएं सुनी- सुनाई जातीं, हंसी-मजाक भी खूब होता था।
बाद में जब तेजी ने पुत्र को जन्म दिया तब पंत उन्हें देखने गए। नवजात बालक को देखकर पंत ने बालक का नामकरण ‘अमिताभ’ किया। बाद में दूसरे पुत्र (बंटी) का नामकरण ’अजिताभ’ के रूप में पंत ने ही किया था। पंत और बच्चन के बीच प्रगाढ़ता यहीं तक सीमित नहीं रही।
अमिताभ बच्चन ने जब जंजीर, दीवार, शोले जैसी फिल्मों से हिंदी सिनेमा में अपनी जमीन बनाई और लोकप्रियता हासिल की तब उन्होंने मुंबई में अपना बंगला बनवाया। बंगले का नामकरण करने के लिए जब उन्होंने अपने पिता हरिवंश राय बच्चन से सलाह ली, तो उन्होंने प्रतीक्षा नाम दिया। बाद में पूछने पर बताया था कि उन्हें अपने एक अजीज मित्र की प्रतीक्षा है। हालांकि, उनकी यह प्रतीक्षा कभी पूरी नहीं हो सकी।
बाद में जब तेजी ने पुत्र को जन्म दिया तब पंत उन्हें देखने गए। नवजात बालक को देखकर पंत ने बालक का नामकरण ‘अमिताभ’ किया। बाद में दूसरे पुत्र (बंटी) का नामकरण ’अजिताभ’ के रूप में पंत ने ही किया था। पंत और बच्चन के बीच प्रगाढ़ता यहीं तक सीमित नहीं रही।
अमिताभ बच्चन ने जब जंजीर, दीवार, शोले जैसी फिल्मों से हिंदी सिनेमा में अपनी जमीन बनाई और लोकप्रियता हासिल की तब उन्होंने मुंबई में अपना बंगला बनवाया। बंगले का नामकरण करने के लिए जब उन्होंने अपने पिता हरिवंश राय बच्चन से सलाह ली, तो उन्होंने प्रतीक्षा नाम दिया। बाद में पूछने पर बताया था कि उन्हें अपने एक अजीज मित्र की प्रतीक्षा है। हालांकि, उनकी यह प्रतीक्षा कभी पूरी नहीं हो सकी।