वाराणसी बम धमाका : आरोपी वलीउल्ला प्रयागराज कोर्ट में पेश, राष्ट्र द्रोह में खुद को बताया निर्दोष
गाजियाबाद जेल में बंद फूलपुर निवासी वलीउल्ला को कड़ी सुरक्षा के बीच मंगलवार दोपहर कचहरी लाया गया। फिर उसे कोर्ट में पेश किया गया। जहां उसने अपना पक्ष रखा। अदालत ने सफाई साक्ष्य के लिए गवाहों को सूची मांगी।
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राष्ट्र द्रोह और वाराणसी बम धमाकों के आरोपित वलीउल्ला और उबैदउल्ला को मंगलवार दोपहर प्रयागराज की जिला अदालत में पेश किया गया। वलीउल्ला ने 2001 में प्रयागराज के फूलपुर थाने में दर्ज राष्ट्र द्रोह के मुकदमे में अपने आप को निर्दोष बताया और कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है। इसके लिए वह गवाह पेश करेगा। इस पर अदालत ने गवाहों की सूची दाखिल करने और उन्हें पेश कराए जाने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।
गाजियाबाद जेल में बंद फूलपुर निवासी वलीउल्ला को कड़ी सुरक्षा के बीच मंगलवार दोपहर कचहरी लाया गया। फिर उसे कोर्ट में पेश किया गया। जहां उसने अपना पक्ष रखा। अदालत ने सफाई साक्ष्य के लिए गवाहों को सूची मांगी। इस पर उसने कहा कि वह अदालत को गवाहों की सूची सौंपेगा। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता गुलाब चंद्र अग्रहरि ने आपत्ति जताई गई। कहा गया कि मामला बहुत पुराना हो चुका है। अदालत ने इस पर सुनवाई की तिथि निर्धारित कर दी।
मामले में पुलिस ने वाराणसी बम धमाकों से पहले 18 अप्रैल 2001 को भी प्रयागराज के फूलपुर में वलीउल्ला और उसके भाई समेत कुछ अन्य लोगों को भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ने, जिहाद करने और इससे संबंधित साहित्य एकत्र करने जैसे आरोप में गिरफ्तार किया था। अभियुक्त मुस्तकीम अभी तक फरार है जबकि तीन जमानत पर रिहा हैं।
संकट मोचन मंदिर में हुए धमाके में अदालत ने दोषी करार दिया
वलीउल्ला को दोबारा वाराणसी में कैंट स्टेशन और संकट मोचन मंदिर में सात मार्च 2006 को हुए बम धमाकों के मामले में गिरफ्तार किया था। उसे यहां से गाजियाबाद जेल भेज दिया गया था। तब से वह गाजियाबाद जेल में ही बंद है। वाराणसी बम धमाकों में उसे सजा सुनाई जा चुकी है जबकि प्रयागराज के फूलपुर में 2001 के मुकदमे में सुनवाई कोर्ट में जारी है।
कई साल बाद मंगलवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया। जबकि पिछली कई तारीख से प्रशासन को उसकी पेशी के लिए पत्र लिखा जा रहा था। अदालत में अभियोजन पक्ष की गवाही समाप्त होने पर वलीउल्ला का बयान दर्ज हो चुका है। अदालत ने उसे इसलिए तलब किया था कि वह अपने प्रतिरक्षा में किसी साक्षी को पेश करना चाहता है अथवा नहीं, पेशी के दौरान उसने अपने अधिवक्ता को गवाहों के नाम बताए हैं।