मूल्यों, सरोकारों की मंजूषा है मानस
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संगम की रेती पर बसे तंबुओं के शहर में शिविर-शिविर कथा-प्रवचन, अनुष्ठान आदि की धूम है लेकिन संकल्प और उद्देश्य की दृष्टि से अक्षयवट मार्ग पर गंगा सेना के शिविर में आयोजित रामकथा निराली है। यहां श्रोताओं में कल्पवासियों के अतिरिक्त बड़ी संख्या में युवा शामिल हैं। खास यह कि यहां रामकथा सिर्फ मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन संदर्भों का बखान भर नहीं बल्कि इसे मानवीय मूल्यों और सामाजिक जीवन के सरोकारों के साथ ही सहयोग, समरसता और सद्भाव की त्रिवेणी के रूप में भी प्रस्तुत है।
बतौर कथाव्यास त्रिवेणी बांध स्थित बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक और योगगुरु स्वामी आनंद गिरि ने कहा, तुलसी की रामचरित मानस वाणी गंगा है। जिस प्रकार गंगा में पाप धुलते हैं, उसी प्रकार मानस से मन की कलुषता मिटती है। जीवन को जीने के नए उद्देश्य मिलते, मार्ग खुलते हैं। यह सिर्फ धर्मग्रंथ नहीं बल्कि संपूर्ण मानवीय मूल्यों की मंजूषा है, इसमें हर कोई अपनी समस्याओं का समाधान आसानी से प्राप्त कर सकता है। राम पूरी मानवता के लिए आदर्श हैं।
वहीं राम से ऐसी प्रार्थना भी है कि अयोध्या में उनके मंदिर के निर्माण की राह में आ रही दिक्कतें दूर हों और देश के मुस्लिम भाई उदारता का परिचय देते हुए मंदिर निर्माण में सद्भाव से सहयोग दें। राम देश की पहचान हैं। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का समाधान आमजन की अदालत से होगा, जिसमें प्रत्येक देशवासी शामिल हो फिर चाहे वह हिन्दू हो या मुसलमान। देश में शांति और सद्भाव के लिए यह पहल जरूरी है।
कथा का उद्देश्य देशवासियों विशेषकर युवाओं को राम के वास्तविक रूप से परिचित कराना है। युवा ही राष्ट्र का भविष्य हैं, वर्तमान सुधरेगा तो भविष्य स्वत: संवर जाएगा। रिश्तों के प्रति सम्मान हो, ज्ञान और संस्कृति का सम्मान हो। हर व्यक्ति को राम कथा में मन लगाना चाहिए क्योंकि इससे नैतिक पतन नहीं होगा। पारिवारिक शांति बनी रहेगी। युवा, राम और सीता के आदर्शों का अनुकरण करें और हनुमान जैसे संस्कारी, आज्ञाकारी बनें।
मंगलवार को कथा में सती महाप्रयाण और पार्वती के वरण प्रसंग की चर्चा की गई। इस दौरान ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती भी आशीर्वाद देने पहुंचे। उन्होंने कहा, राम जननायक हैं, उन्होंने जीवन में उच्च आदर्शों की स्थापना की। शिविर पहुंचने पर योगगुरु स्वामी आनंद गिरि ने उनका भव्य स्वागत किया, आरती उतारी। कथा नौ फरवरी तक रोजाना दिन में दो बजे से आरंभ होकर छह बजे तक चलेगी।