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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Action under the POSH Act can be taken only on a timely complaint of harassment.

हाईकोर्ट : पॉश एक्ट के तहत यौन उत्पीड़न की समयबद्ध शिकायत पर ही हो सकती है कार्रवाई

Thu, 27 Aug 2026 02:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 27 Aug 2026 02:50 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यौन उत्पीड़न की शिकायत पॉश एक्ट-2013 की धारा-9 में निर्धारित समय सीमा के बाहर की जाती है तो उस पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता। ऐसी स्थिति में मामले को नए सिरे से जांच के लिए वापस भेजना भी कानूनन उचित नहीं है।

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High Court: Action under the POSH Act can be taken only on a timely complaint of harassment.
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यौन उत्पीड़न की शिकायत पॉश एक्ट-2013 की धारा-9 में निर्धारित समय सीमा के बाहर की जाती है तो उस पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता। ऐसी स्थिति में मामले को नए सिरे से जांच के लिए वापस भेजना भी कानूनन उचित नहीं है।

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इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने प्रयागराज निवासी की विशेष अपील स्वीकार कर ली, जबकि संस्थान की विशेष अपील खारिज कर दी। याची वर्ष 2005 में संस्थान में सहायक प्रोफेसर नियुक्त हुए थे। वर्ष 2016 में कुछ छात्राओं की ओर से उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत की। आंतरिक शिकायत समिति ने जांच की और बाद में संस्थान की गवर्निंग कौंसिल ने नौ जुलाई 2017 को उन्हें फटकार की सजा देते हुए महिला छात्राओं और शोधार्थियों का शैक्षणिक पर्यवेक्षण करने से रोक दिया।
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इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। एकल पीठ ने सात मई 2026 के आदेश से सजा को रद्द कर मामले पर संस्थान को नए सिरे से विचार करने के लिए वापस भेज दिया। इस फैसले के खिलाफ याची ने विशेष अपील दायर की। खंडपीठ ने पाया कि शिकायतों में घटनाओं की तारीखें दर्ज नहीं थीं। कोर्ट ने कहा कि पॉश एक्ट की धारा-9 के तहत शिकायत घटना से अधिकतम छह महीने के अंदर की जानी चाहिए। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। कहा, प्रथम दृष्टया समय सीमा से बाहर शिकायत को शुरुआत में ही खारिज किया जा सकता है। स्पष्ट किया कि जब शिकायतें ही पोषणीय नहीं थीं तो नए सिरे से जांच का कोई आधार नहीं था।

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