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उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय :किसान की बेटी लक्ष्मी को मिले तीन स्वर्ण पदक

Fri, 05 Mar 2021 01:42 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 05 Mar 2021 01:42 AM IST
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Uttar Pradesh Rajarshi Tandon Open University: Farmer's daughter Lakshmi gets three gold medals
prayagraj news : राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में छात्रों को मेडल प्रदान किया गया। - फोटो : prayagraj
उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में किसान की बेटी लक्ष्मी गुप्ता को तीन स्वर्ण पदक मिले, जिनमें कुलाधिपति स्वर्ण पदक भी शामिल है। लक्ष्मी गोरखपुर की रहने वाली हैं। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने मेधावियों के बीच कुल 19 स्वर्ण पदक वितरित किए और खास यह कि तीन चौथाई पदक छात्राओं के खाते में गए। 
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वहीं, 28659 शिक्षार्थियों को उपाधि प्रदान की गई, जिनमें 15492 पुरूष और 13167 महिला शिक्षार्थी शामिल हैं। मुक्त विवि के नवनर्मित अटल प्रेक्षागृह में आयोजित दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने 19 स्वर्ण पदक प्रदान किए, जिनमें से पांच पदक छात्रों और 14 पदक छात्राओं की झेली में आए। इसके साथ ही तीन शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। इससे पूर्व कुलपति प्रोफेसर कामेश्वर नाथ सिंह ने कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं  मुख्य अतिथि मुकुल कानिटकर का स्वागत किया और विश्वविद्यालय की गत वर्ष की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
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इन्हें मिले स्वर्ण पदक

स्नातकोत्तर वर्ग 
मानविकी विद्याशाखा से देवरिया छात्र रंजय कुमार सिंह, समाज विज्ञान विद्याशाखा से मऊ के छात्र रजत विश्ववकर्मा, प्रबंधन अध्ययन विद्याशाखा से मथुरा की छात्रा तिवारी स्वाति रमाशंकर, शिक्षा विद्या शाखा से आजमगढ़ की छात्रा नेहा सिंह और विज्ञान विद्याशाखा के तहत मथुरा के छात्र स्वप्निल चौहान शामिल हैं। 
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स्नातक वर्ग
मानविकी विद्याशाखा से अंबेडकर नगर की छात्रा विभा यादव, समाज विज्ञान विद्याशाखा से कानपुर देहात की छात्रा रिद्धि सिंह, प्रबंधन अध्ययन विद्याशाखा से मथुरा की छात्रा अंजली, कंप्यूटर एवं सूचना विज्ञान विद्याशाखा से देवरिया की छात्रा वीनस चौरसिया, शिक्षा विद्याशखा से गोरखपुर की छात्रा लक्ष्मी गुप्ता और विज्ञान विद्याशाखा से आजमगढ़ के छात्र अभिनंदन यादव शामिल हैं।

दानदाता स्वर्ण पदक
बाबू ओमप्रकाश गुप्त स्मृति स्वर्ण पदक गोरखपुर अध्ययन केंद्र की बीएड की छात्रा लक्ष्मी गुप्ता, कैलाशपत नेवेटिया स्मृति स्वर्ण पदक प्रयागराज की छात्रा शगुफ्ता खान, स्वर्गीय अनिल मीना चक्रवर्ती स्मृति स्वर्ण पदक कानपुर देहात बीए की छात्रा रिद्धि सिंह एवं गोरखपुर छात्रा आशा यादव, प्रो. एमपी दुबे पर्यावरण-गांधी चिंतन एवं शांति अध्ययन उत्कृष्टता स्वर्ण पदक प्रयागराज के मनीष  कुमार मिश्र, प्रो. एमपी दुबे दिव्यांग मेघा स्वर्णपदक जौनपुर के छात्र शाहनवाज सिद्दिकी, पंडित सोहन लाल द्विवेदी स्मृति स्वर्णपदक आजमगढ़ की छात्रा निकिता को मिला।

बौधिक परंपरा का आत्ममंथन करे युवा पीढ़ी

भारत की युवा पीढ़ी को हमारी उज्ज्वल, आध्यात्मिक एवं बौद्धिक परंपरा का स्वाध्याय पूर्वक आत्ममंथन करना चाहिए। हमारे प्राध्यापकों का भी यह कर्तव्य है कि वे छात्रों को अपने आचार, विचार और ज्ञान के अवबोध के माध्यम से प्रभावित करें। यह बात भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में अपने दीक्षांत भाषण कहीं।

मुक्त विवि के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए कानिटकर कहा कि वर्तमान युग सामाजिक विमर्शों का युग है। सर्वस्पर्शी विकास की अवधारणा आज हमारे सामने है। ऐसे में समाज के वंचित वर्गों को समग्र विकास में सम्मिलित करना राष्ट्रीय शिक्षा नीति की शीर्ष प्राथमिकता है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले शिक्षार्थियों से कहा कि आप इस शिक्षा व्यवस्था से समाज में जा रहे हें। वहां जाकर सभी कुछ न कुछ योगदान करेंगे, लेकिन परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों को समृद्ध करने के लिए आपको अपने जीवन का लक्ष्य भी निर्धारित करना होगा। अत: यह संकल्प का अवसर है। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तनों की तीव्र गति के कारण विद्यार्थियों की बदलती हुई आवश्यकताओं की पूर्ति दूरस्थ व मुक्त शिक्षा ही कर सकती है। भारत में गुरुकुल की की शिक्षा ऐसी ही अध्ययन केंद्रित शिक्षा थी। 

लक्ष्मी ने शुरू से ही बनाया पढ़ाने का लक्ष्य

बीएड की परीक्षा में सर्वाधिक अंक पाकर एक कुलाधिपति स्वर्ण पदक, विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक और दानदाता स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली ग्रामीण पृष्ठभूमि की मेधावी छात्रा लक्ष्मी गुप्ता ने बचपन से ही लक्ष्य बना रखा था कि आगे चलकर अध्यापन का कार्य करेंगी और एक दिन बड़ा पुरस्कार जीतेंगी। उन्होंने अपने दोनों ही लक्ष्य पूरे किए। स्वर्ण पदक पाने के बाद लक्ष्मी ने कहा कि जहां चाह, वहां राह।

इसके साथ ही उन्हें शुरू से ही पढ़ाने का शौक रहा। लक्ष्मी गुप्ता वर्तमान में उच्च प्राथमिक विद्यालय, टेकुआपाती, सहजनवां, गोरखपुर में सहायक अध्यापक हैं। लक्ष्मी ने एक अगस्त 2013 को प्राथमिक विद्यालय कसरवल, सहजनवां में सहायक अध्यापिका के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। पुन: 29334 भर्ती में सहायक अध्यापिक, गणित विषय के पद पर चयन होने के बाद उन्होंने उच्च प्राथमिक विद्यालय, टेकुआपाती, सहजनवां, गोरखपुर में 26 सितंबर 2015 में कार्यभार ग्रहण किया।

मूलत: गोरखपुर की रहने वालीं लक्ष्मी के पिता विजय कुमार गुप्ता किसान हैं। उनकी मां सविता देवी ग्रहणी हैं। लक्ष्मी ने लक्ष्य बना रखा है कि आगे चलकर बालिकाओं के लिए कुछ करना है। उनका कहना है कि बालिकाएं दो वंशों को शिक्षित करती हैं। लक्ष्मी का मानना है कि मुक्त विश्वविद्यालय में कोर्स का विस्तार होना चाहिए और अध्ययन केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए। लक्ष्मी ने गोरखपुर विश्ववविद्यालय से वर्ष 2009 में बीएससी, 2010 में बीटीसी और 2015 में एमएससी की पढ़ाई पूी की। इसके बाद मुक्त विश्वविद्यालय वे वर्ष 2020 में बीएड की पढ़ाई पूरी की। लक्ष्मी का मानना है कि छात्र सकारात्मक सोच के साथ निरंतर कड़ी मेहनत करें तो अपने लक्ष्य में अवश्य सफल होंगे।

राज्यपाल ने किया अटल प्रेक्षागृह का लोकार्पण
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को नवनिर्मित प्रेक्षागृह का लोकार्पण किया। प्रेक्षागृह का नामकरण पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर किया गया है। इस प्रेक्षागृह में एक हजार व्यक्तियों के बैठने की क्षमता है। इस प्रेक्षागृह का शिलान्यास पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने किया था।

शिक्षकों, कर्मचारियों का तीन-तीन लाख का बीमा
मुक्त विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों का तीन-तीन लाख रुपये का बीमा कराया गया है। यह जानकारी बृहस्पतिवार को कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय की उपलब्धियां गिनाते हुए दी। उन्होंने कोविड काल में विश्वविद्यालय की ओर से छात्रहित में किए कार्यों की लंबी फेहरिस्त प्रस्तुत की। 


55 मिनट देर से शुरू हुआ समारोह
दीक्षांत समारोह 55 मिनट दे से शुरू हुआ। कार्यक्रम सुबह 10 बजे से प्रस्तावित था। शोभायात्रा सुबह 10.55 बजे पहुंची। शोभा यात्रा में शामिल कई लोगों ने लोगों ने मास्क भी नहीं पहन रखे थे।
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