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असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर हुआ विवाद
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गलत तरीके से नौकरी पाने के आरोपी को तीन बार जारी हुआ नोटिस
इंटरव्यू के समय से ही शुरू हो चुका था विवाद, पर नहीं हो सका निर्णय
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (यूपीएचईएससी) की ओर से विज्ञापन संख्या 47 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर की जा रही भर्ती विवादों में फंस गई है। एक अभ्यर्थी का गलत तरीके से चयन होने का आरोप लगाया गया है। आयोग की ओर से आरोपित को तीन बार नोटिस जारी किया जा चुका है लेकिन, आयोग इस पर अब तक कोई निर्णय नहीं ले सका है।
मामला 18 सितंबर से चल रहा है। अभ्यर्थियों ने आयोग कार्यालय में लिखित शिकायत की थी कि असिस्टेंट प्रोफेसर अर्थशास्त्र की भर्ती के लिए इंटरव्यू में शामिल एक अभ्यर्थी ने एमए और पीएचडी की डिग्री एक साथ हासिल की, जो नियम विरुद्ध है। अभ्यर्थियों ने आयोग के कार्यालय में शिकायत के साथ साक्ष्य भी उपलब्ध कराए। हालांकि, आयोग ने एक अक्तूबर को जब रिजल्ट जारी किया तो आरोपी अभ्यर्थी को भी अंतिम रूप से चयनित घोषित कर दिया।
इसके बाद भी शिकायत करने वाले अभ्यर्थी अड़ रहे, जिस पर आयोग कार्यालय ने आरोपी को अक्तूबर में दो नोटिस जारी किए और कारण बताने को कहा। आरोपी अभ्यर्थी ने स्पष्टीकरण दिया लेकिन, इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका। इसके बाद नवंबर की शुरुआत में मामला आयोग की बैठक में रखा गया और इसके बार आयोग की ओर से तीसरा नोटिस जारी किया गया। आयोग के अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में है। आरोपी अभ्यर्थी को सुनवाई का मौका दिया गया है। जल्द ही आयोग इस पर कोई निर्णय लेगा।
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इंटरव्यू के समय से ही शुरू हो चुका था विवाद, पर नहीं हो सका निर्णय
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (यूपीएचईएससी) की ओर से विज्ञापन संख्या 47 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर की जा रही भर्ती विवादों में फंस गई है। एक अभ्यर्थी का गलत तरीके से चयन होने का आरोप लगाया गया है। आयोग की ओर से आरोपित को तीन बार नोटिस जारी किया जा चुका है लेकिन, आयोग इस पर अब तक कोई निर्णय नहीं ले सका है।
मामला 18 सितंबर से चल रहा है। अभ्यर्थियों ने आयोग कार्यालय में लिखित शिकायत की थी कि असिस्टेंट प्रोफेसर अर्थशास्त्र की भर्ती के लिए इंटरव्यू में शामिल एक अभ्यर्थी ने एमए और पीएचडी की डिग्री एक साथ हासिल की, जो नियम विरुद्ध है। अभ्यर्थियों ने आयोग के कार्यालय में शिकायत के साथ साक्ष्य भी उपलब्ध कराए। हालांकि, आयोग ने एक अक्तूबर को जब रिजल्ट जारी किया तो आरोपी अभ्यर्थी को भी अंतिम रूप से चयनित घोषित कर दिया।
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इसके बाद भी शिकायत करने वाले अभ्यर्थी अड़ रहे, जिस पर आयोग कार्यालय ने आरोपी को अक्तूबर में दो नोटिस जारी किए और कारण बताने को कहा। आरोपी अभ्यर्थी ने स्पष्टीकरण दिया लेकिन, इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका। इसके बाद नवंबर की शुरुआत में मामला आयोग की बैठक में रखा गया और इसके बार आयोग की ओर से तीसरा नोटिस जारी किया गया। आयोग के अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में है। आरोपी अभ्यर्थी को सुनवाई का मौका दिया गया है। जल्द ही आयोग इस पर कोई निर्णय लेगा।
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