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विवि में नए सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sat, 14 Feb 2015 11:49 PM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आगामी सत्र से अच्छे दिनों की शुरुआत हो गई है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का यह दावा सच साबित होगा इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी लेकिन नए कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी का गठन और अब फरवरी में ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू किए जाने से इसकी उम्मीद जरूर बंधी है। प्रवेश समिति की शनिवार को हुई बैठक में एडमिशन सेल के नए निदेशक के नाम की घोषणा कर दी गई। डीएसडब्ल्यू तथा रसायन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर जगदम्बा सिंह को दोबारा यह जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने फरवरी के आखिरी सप्ताह में प्रवेश प्रक्रिया का संभावित कार्यक्रम तैयार कर रजिस्ट्रार को सौंपे जाने की बात कही। सबकुछ सही रहा तो 11 जुलाई को नया सत्र शुरू होने से पहले प्रवेश प्रक्रिया खत्म हो जाएगी और विश्वविद्यालय खुलने के साथ ही कक्षाएं शुरू हो जाएंगी।
पिछले साल 23 मार्च को प्रोफेसर जगदम्बा सिंह को निदेशक बनाए जाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद प्रवेश के लिए नोटिफिकेशन को लेकर एक महीने से अधिक समय तक विवाद बना रहा। काफी दबाव के बाद नोटिफिकेशन हो सका और प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो सकी। इसके बाद भी लगातार विवाद बना रहा। इसका नतीजा रहा कि सितंबर तक दाखिले ही होते रहे। डीफिल में अब भी प्रवेश प्रक्रिया चल ही रही है। इसकी वजह विश्वविद्यालय और संघटक कालेजों में पढ़ाई तो बाधित रही ही, मेधावी छात्र-छात्राएं भी दूसरे संस्थानों में चले गए। यहां दाखिला पाने वाले ज्यादातर विद्यार्थी वे हैं जिनका कहीं प्रवेश नहीं हुआ। हालांकि फरवरी के पहले पखवारा में ही प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक की नियुक्ति से इस नाउम्मीदी से निजात की उम्मीद बंधी है। प्रवेश समिति की बैठक में प्रोफेसर जगदम्बा सिंह को यह जिम्मेदारी दोबारा दिए जाने का निर्णय लिया गया।
प्रोफेसर जगदम्बा सिंह ने बताया कि कोर कमेटी गठित कर फरवरी आखिरी सप्ताह में प्रवेश परीक्षाओं की संभावित तिथि तय कर ली जाएगी। उन्होंने बताया कि इसमें अन्य संस्थानों की प्रवेश परीक्षाओं, भर्ती परीक्षाओं आदि को ध्यान में रखा जाएगा। स्नातक प्रवेश परीक्षा (यूजीएटी) के लिए बोर्ड तथा परास्नातक प्रवेश परीक्षा (पीजीएटी) के लिए स्नातक के एग्जाम को भी ध्यान में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि जुलाई के पहले सप्ताह में प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर लेने का लक्ष्य है। बैठक में बीएड को दो साल करने तथा शारीरिक शिक्षा विभाग में आगामी सत्र से एमपीएड तथा डीफिल कोर्स शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा गया। सदस्यों ने इन प्रस्तावों को पहले बोर्ड ऑफ स्टडीज में रखे जाने की बात कही।
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कई विभागों ने शोध प्रवेश परीक्षा (क्रेट-2014) में सीट बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था। इसमें कई मामले आरक्षण के विवाद को लेकर भी रहे लेकिन प्रवेश समिति ने सीट बढ़ाने से मना कर दिया। सदस्यों का कहना था कि प्रक्रिया शुरू होने से पहले विभागों की ओर से जितने सीट पर दाखिले की मांग की गई थी उतने पर ही प्रवेश होगा। आखिरी समय में इस तरह से सीट नहीं बढ़ाई जा सकती।
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पिछले साल 23 मार्च को प्रोफेसर जगदम्बा सिंह को निदेशक बनाए जाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद प्रवेश के लिए नोटिफिकेशन को लेकर एक महीने से अधिक समय तक विवाद बना रहा। काफी दबाव के बाद नोटिफिकेशन हो सका और प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो सकी। इसके बाद भी लगातार विवाद बना रहा। इसका नतीजा रहा कि सितंबर तक दाखिले ही होते रहे। डीफिल में अब भी प्रवेश प्रक्रिया चल ही रही है। इसकी वजह विश्वविद्यालय और संघटक कालेजों में पढ़ाई तो बाधित रही ही, मेधावी छात्र-छात्राएं भी दूसरे संस्थानों में चले गए। यहां दाखिला पाने वाले ज्यादातर विद्यार्थी वे हैं जिनका कहीं प्रवेश नहीं हुआ। हालांकि फरवरी के पहले पखवारा में ही प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक की नियुक्ति से इस नाउम्मीदी से निजात की उम्मीद बंधी है। प्रवेश समिति की बैठक में प्रोफेसर जगदम्बा सिंह को यह जिम्मेदारी दोबारा दिए जाने का निर्णय लिया गया।
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प्रोफेसर जगदम्बा सिंह ने बताया कि कोर कमेटी गठित कर फरवरी आखिरी सप्ताह में प्रवेश परीक्षाओं की संभावित तिथि तय कर ली जाएगी। उन्होंने बताया कि इसमें अन्य संस्थानों की प्रवेश परीक्षाओं, भर्ती परीक्षाओं आदि को ध्यान में रखा जाएगा। स्नातक प्रवेश परीक्षा (यूजीएटी) के लिए बोर्ड तथा परास्नातक प्रवेश परीक्षा (पीजीएटी) के लिए स्नातक के एग्जाम को भी ध्यान में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि जुलाई के पहले सप्ताह में प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर लेने का लक्ष्य है। बैठक में बीएड को दो साल करने तथा शारीरिक शिक्षा विभाग में आगामी सत्र से एमपीएड तथा डीफिल कोर्स शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा गया। सदस्यों ने इन प्रस्तावों को पहले बोर्ड ऑफ स्टडीज में रखे जाने की बात कही।
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कई विभागों ने शोध प्रवेश परीक्षा (क्रेट-2014) में सीट बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था। इसमें कई मामले आरक्षण के विवाद को लेकर भी रहे लेकिन प्रवेश समिति ने सीट बढ़ाने से मना कर दिया। सदस्यों का कहना था कि प्रक्रिया शुरू होने से पहले विभागों की ओर से जितने सीट पर दाखिले की मांग की गई थी उतने पर ही प्रवेश होगा। आखिरी समय में इस तरह से सीट नहीं बढ़ाई जा सकती।