Umesh Pal Murder: अतीक के जिस शूटर को घरवालों ने बताया मरा हुआ, अब उसने किया सरेंडर, क्या पुलिस का मिला साथ?
सीबीआई से लेकर पुलिस तक अब्दुल कवि की गिरफ्तारी का सिर्फ ढिंढोरा ही पीटती रही। एक बार कुर्की होने के बावजूद उसकी कोई भनक नहीं लगी।
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उमेश पाल की हत्या में शामिल और राजू पाल की हत्या में वांछित शूटर अब्दुल कवि और कौशांबी पुलिस की कैसी सांठ-गांठ थी यह बात अब सामने आ रही है। 18 साल से अब्दुल कवि को पुलिस का संरक्षण मिला हुआ था, जिसके चलते न सिर्फ उसका शस्त्र लाइसेंस जारी हुआ बल्कि उसका नवीनीकरण भी हुआ और पुलिस उसे पकड़ न सकी। अब ये बात सामने आ रही है कि जब उमेश पाल की हत्या के बाद अब्दुल कवि का घर ढहाया गया तो उसके परिवार ने मौत की झूठी अफवाह फैला दी थी।
तलाश का ढिंढोरा पीटती रही पुलिस-सीबीआई
सीबीआई से लेकर पुलिस तक अब्दुल कवि की गिरफ्तारी का सिर्फ ढिंढोरा ही पीटती रही। एक बार कुर्की होने के बावजूद उसकी कोई भनक नहीं लगी। सवाल यह भी उठता है कि क्या शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण के लिए वह थाने और कलेक्ट्रेट नहीं आया?
यह बात सच है तो और भी गंभीर, क्योंकि बगैर आवेदक को देखे ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उसके लाइसेंस का नवीनीकरण कैसे कर दिया? फरार शूटर पांच अप्रैल को लखनऊ की सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर चुका है।
घरवालों ने कोरोना से मौत की फैलाई थी अफवाह
उमेश पाल हत्याकांड के बाद पुलिस ने उसके परिवार वालों पर शिकंजा कसा, घर ध्वस्त करा दिया तो घरवालों ने अफवाह उड़ाई कि अब्दुल कवि की कोरोना से मौत हो चुकी है। एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, परिवार वाले जब मौत का कोई साक्ष्य नहीं दे सके तो पुलिस को शक हुआ और दबाव बढ़ाया गया।
ऑनलाइन रिकाॅर्ड से गायब है लाइसेंस
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2014-15 में शस्त्र लाइसेंस के लिए यूनिक आईडी की व्यवस्था की थी। वर्ष 2009 तक तो कवि की लाइसेंसी रायफल का ऑनलाइन और ऑफलाइन ब्योरा मिल रहा है, लेकिन उसके बाद पोर्टल पर कोई जानकारी नहीं है।
राजू पाल हत्याकांड में नाम सामने आने के बाद भी शूटर अब्दुल कवि को रायफल का लाइसेंस कैसे मिल गया, इसकी जांच करा रहे हैं। इसमें जो दोषी होगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। अभी तक यह रायफल मिली भी नहीं है।-बृजेश कुमार श्रीवास्तव, एसपी