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हाईकोर्ट इलाहाबाद की दो हजार महिला वकीलों ने गृहमंत्री को भेजा प्रत्यावेदन
Mon, 27 Jul 2020 01:10 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 27 Jul 2020 01:10 AM IST
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Amit Shah
- फोटो : ANI
कोरोना संकट से जूझ रहे वकीलों और न्यायपालिका को उबारने के लिए महिला अधिवक्ताओं ने पहल की है। देश भर की दो हजार से अधिक महिला अधिवक्ताओं ने कोरोना के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे अधिवक्ता समाज की सहायता एवं अप्रत्यक्ष (वर्चुअल) न्यायालयों के ढांचे को सुधारने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को प्रत्यावेदन भेजा है।
इन महिला वकीलों ने लॉकडाउन के कारण मार्च माह से न्यायिक प्रणाली के सुचारु रूप से कार्य न करने से आर्थिक तंगी झेल रहे अधिवक्ता समाज की पीड़ा को समझते हुए उचित नियम एवं शर्तों पर आसान किश्तों पर ऋण दिए जाने की गुहार केंद्रीय गृहमंत्री से लगाई है।
महिला अधिवक्ताओं ने इसके लिए गत 21 जुलाई को हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की। अभियान प्रारंभ होने के मात्र 40 घंटों के भीतर करीब 2000 महिला अधिवक्ताओं ने इस पहल के लिए अपनी सहमति जताई। जम्मू कश्मीर से केरल व राजस्थान से मेघालय तक लगभग 400 जिलों की महिला वकीलों ने इसे समर्थन दिया है। प्रत्यावेदन की प्रति प्रधानमंत्री, विधि एवं न्याय मंत्री एवं वित्त मंत्री को भी उचित कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
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एडवोकेट कमला मिश्रा का कहना है कि अनलॉक प्रक्रिया के दौरान न्यायालय बहुत कम कार्य कर पा रहे हैं और आज के समय में अप्रत्यक्ष (वर्चुअल) न्यायालयों की आवश्यकता एवं प्रासंगिकता बढ़ गई है। अधिकतर अधिवक्ताओं के पास लैपटॉप, स्कैनर, अच्छे सिग्नल के लिए उचित मानक वाले वाईफाई जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आदि नहीं है।
बार एसोसिएशन भी इस सबके लिए सक्षम नहीं दिख रहे हैं। इस कारण वकील न्याय निष्पादन प्रणाली (जस्टिस डिलेवरी सिस्टम) की उचित सहायता नहीं कर पा रहे हैं। अधिवक्ता कमला मिश्रा ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की अर्चना त्यागी, सुजाता चौधरी, ज्योति बाला, अनीता सिंह, वत्सला उपाध्याय आदि महिला अधिवक्ता भी इस ऐतिहासिक प्रयास में सहभाग कर रहीं हैं।
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इन महिला वकीलों ने लॉकडाउन के कारण मार्च माह से न्यायिक प्रणाली के सुचारु रूप से कार्य न करने से आर्थिक तंगी झेल रहे अधिवक्ता समाज की पीड़ा को समझते हुए उचित नियम एवं शर्तों पर आसान किश्तों पर ऋण दिए जाने की गुहार केंद्रीय गृहमंत्री से लगाई है।
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महिला अधिवक्ताओं ने इसके लिए गत 21 जुलाई को हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की। अभियान प्रारंभ होने के मात्र 40 घंटों के भीतर करीब 2000 महिला अधिवक्ताओं ने इस पहल के लिए अपनी सहमति जताई। जम्मू कश्मीर से केरल व राजस्थान से मेघालय तक लगभग 400 जिलों की महिला वकीलों ने इसे समर्थन दिया है। प्रत्यावेदन की प्रति प्रधानमंत्री, विधि एवं न्याय मंत्री एवं वित्त मंत्री को भी उचित कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
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एडवोकेट कमला मिश्रा का कहना है कि अनलॉक प्रक्रिया के दौरान न्यायालय बहुत कम कार्य कर पा रहे हैं और आज के समय में अप्रत्यक्ष (वर्चुअल) न्यायालयों की आवश्यकता एवं प्रासंगिकता बढ़ गई है। अधिकतर अधिवक्ताओं के पास लैपटॉप, स्कैनर, अच्छे सिग्नल के लिए उचित मानक वाले वाईफाई जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आदि नहीं है।
बार एसोसिएशन भी इस सबके लिए सक्षम नहीं दिख रहे हैं। इस कारण वकील न्याय निष्पादन प्रणाली (जस्टिस डिलेवरी सिस्टम) की उचित सहायता नहीं कर पा रहे हैं। अधिवक्ता कमला मिश्रा ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की अर्चना त्यागी, सुजाता चौधरी, ज्योति बाला, अनीता सिंह, वत्सला उपाध्याय आदि महिला अधिवक्ता भी इस ऐतिहासिक प्रयास में सहभाग कर रहीं हैं।