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स्वास्थ्य : टाइट जींस-लेगिंग से दब रही नस, युवाओं में घुटना व कमर दर्द की समस्या

Sun, 06 Sep 2026 05:02 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 06 Sep 2026 05:02 PM IST
सार

तंग कपड़े पहनने का शौक अब सेहत पर भारी पड़ रहा है। खासतौर से जींस व लेगिंग पहनने की शौकीन महिलाओं में घुटना व कमर दर्द की समस्या अधिक देखने को मिल रही है।

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Tight jeans and leggings compressing nerves; knee and back pain issues among the youth.
तंग कपड़ों से दब रही नस, युवा हो रहे बीमारियों के शिकार। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

तंग कपड़े पहनने का शौक अब सेहत पर भारी पड़ रहा है। खासतौर से जींस व लेगिंग पहनने की शौकीन महिलाओं में घुटना व कमर दर्द की समस्या अधिक देखने को मिल रही है। इसे मेराल्जिया पैरेस्थेटिका रोग कहते है। सिर्फ स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) में एक साल के भीतर 103 मामले दर्ज किए गए हैं।

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न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश सोनकर का कहना है कि यह समस्या जांघ के बाहरी हिस्से की संवेदना पहुंचाने वाली नस पर दबाव के कारण होती है। इससे त्वचा पर जलन, चुभन व सुन्नपन महसूस होता है। इस प्रकार की 75 फीसदी समस्या 30 से 50 वर्ष उम्र के बीच के लोगों के अधिक देखने को मिलती है।
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यह समस्या महिला व पुरुष दोनों में होती है। टाइट जींस, लेगिंग, कसी बेल्ट व पैजामे का कसा नाड़ा लैटरल क्यूटेनियस नर्व पर लगातार दबाव डालता है। यह नस कमर के पास से निकलकर जांघ के बाहरी हिस्से तक जाती है। लंबे समय तक दबाव रहने से नस के काम करने में परेशानी आती है।

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प्रमुख लक्षण
1-जांघ के बाहरी या आगे के हिस्से में सुई चुभने जैसा एहसास या तेज जलन।
2-प्रभावित हिस्से की त्वचा का सुन्न हो जाना।
3-हल्के से स्पर्श व कपड़ों के रगड़ खाने पर भी दर्द या असहजता होना।

कैसे करें बचाव

1-ढीले व आरामदायक कपड़े पहनें व कमर पर टाइट बेल्ट बांधने से बचें।
2- यदि वजन अधिक है, तो इसे नियंत्रित करने से नस पर पड़ने वाला दबाव कम होता है।
3-शुरुआती स्तर पर दर्द निवारक दवाएं व डॉक्टर की सलाह से टॉपिकल क्रीम (जैसे लीडोकेन) दी जाती हैं।

बीमारी महिला-पुरुष दोनों में देखने को मिलती है। खासतौर से जिन लोगों में मोटापा होता है। ऐसे लोगों को वजन कम करने के साथ ढीले कपड़े पहनना चाहिए। इसके अलावा शरीर में विटामिन डी 3 व विटामिन बी 12 की कमी न होने दें। -डॉ. कमलेश सोनकर, विभागाध्यक्ष, न्यूरोलॉजी विभाग, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।

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