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Prayagraj News: इविवि में कैंटीन की सुविधा नहीं, छात्रों संग शिक्षकों ने भी उठाई मांग
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में कैंटीन न होने के कारण घर से टिफिन लेकर आते छात्र। स
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कैंटीन की सुविधा नहीं है। इससे छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षकों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। सुबह से लेकर शाम तक कैंपस में रहने वालों खासतौर पर शोध विद्यार्थियों व शिक्षकों को खाने के लिए बाहर की दुकानों का सहारा लेना पड़ता है। इसे लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर कैंटीन की मांग भी की गई है।
विश्वविद्यालय के सीनेट परिसर में कैंटीन है लेकिन वहां भी खाना नहीं मिलता है। विज्ञान संकाय परिसर में तो यह सुविधा भी नहीं है जबकि विश्वविद्यालय में कक्षाएं सुबह आठ बजे शुरू होकर शाम तक चलती हैं। शोध छात्रों व शिक्षकों को सुबह आने के बाद देर शाम तक रुकना पड़ता है।
प्रोफेशनल स्टडीज की समृद्धि पाठक, आदित्य साहू समेत कई विद्यार्थी अपना खाना लेकर आते हैं। विज्ञान विषय के एक शोध छात्र व परास्नातक के रोहित ठाकुर का कहना है कि वे यहां अकेले रहते हैं और उन्हें सुबह ही विश्वविद्यालय आना पड़ता है। इसकी वजह से उन्हें बाहर भोजन करना पड़ता है। कई बार तो समोसा, ब्रेड पकौड़े, फल आदि खाकर ही पूरा दिन निकल जाता है। इन लोगों ने कैंपस में ऐसी कैंटीन की मांग की जहां सस्ती दर पर भोजन उपलब्ध हो।
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कई शिक्षकों ने भी कैंटीन की जरूरत बताई। उनका कहना है कि अध्ययन व शोध के अलावा प्रशासनिक कारणों से अक्सर रात आठ बजे तक रुकना पड़ता है। इस दौरान कुछ खाने के लिए मनमोहन पार्क जाना पड़ता है। वहां चौराहे पर बैठकर चाय पीना भी खराब लगता है। शिक्षकों व छात्रों की ओर से पत्र लिखकर कैंटीन की मांग की गई है।
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विश्वविद्यालय के सीनेट परिसर में कैंटीन है लेकिन वहां भी खाना नहीं मिलता है। विज्ञान संकाय परिसर में तो यह सुविधा भी नहीं है जबकि विश्वविद्यालय में कक्षाएं सुबह आठ बजे शुरू होकर शाम तक चलती हैं। शोध छात्रों व शिक्षकों को सुबह आने के बाद देर शाम तक रुकना पड़ता है।
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प्रोफेशनल स्टडीज की समृद्धि पाठक, आदित्य साहू समेत कई विद्यार्थी अपना खाना लेकर आते हैं। विज्ञान विषय के एक शोध छात्र व परास्नातक के रोहित ठाकुर का कहना है कि वे यहां अकेले रहते हैं और उन्हें सुबह ही विश्वविद्यालय आना पड़ता है। इसकी वजह से उन्हें बाहर भोजन करना पड़ता है। कई बार तो समोसा, ब्रेड पकौड़े, फल आदि खाकर ही पूरा दिन निकल जाता है। इन लोगों ने कैंपस में ऐसी कैंटीन की मांग की जहां सस्ती दर पर भोजन उपलब्ध हो।
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कई शिक्षकों ने भी कैंटीन की जरूरत बताई। उनका कहना है कि अध्ययन व शोध के अलावा प्रशासनिक कारणों से अक्सर रात आठ बजे तक रुकना पड़ता है। इस दौरान कुछ खाने के लिए मनमोहन पार्क जाना पड़ता है। वहां चौराहे पर बैठकर चाय पीना भी खराब लगता है। शिक्षकों व छात्रों की ओर से पत्र लिखकर कैंटीन की मांग की गई है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में कैंटीन न होने के कारण घर से टिफिन लेकर आते छात्र। स