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प्रयागराज में चारों ओर बरसा रंग, लाल हुआ चौक

Sat, 23 Mar 2019 12:54 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 23 Mar 2019 12:54 AM IST
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The rainy color around the Prayagraj, the Lal Chowk
holi - फोटो : प्रयागराज
फागुन की दस्तक के  साथ ही होलियारों ने रंगों से भीगने, भिगोने की जो तैयारियां की थीं, होली पर उसका ‘फुल प्रदर्शन’ हुआ। पूरे दो दिनों तक पूरा शहर रंगों की बारिश में भीगता हुआ होली की खुमारी में सराबोर रहा। स्पीकरों, लाउडस्पीकरों से ‘रंग बरसे’ बजता और शहर के अलग-अलग मोहल्लों में रंग बरसता रहा। कोई खुमारी तो कोई बिना खुमारी ही होली, होलियारे, हुड़दंग के संगम में मगन होकर रंगों में भीगता और नाचता रहा। रंगों की बारिश के बीच ना ना करते हुए तरह-तरह के गुझिया, पापड़, चिप्स और दही में पड़े ‘बड़े’ के साथ जाने कितने पकवानों का लोग लुत्फ लेते रहे।
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दारागंज में दमकल होली की धूम रही लेकिन चौक, लोकनाथ को पूरे शहर की होली का केंद्र ही रहा। यहां की होली ऐसी निराली रही कि स्थानीय लोग ही नहीं पास-पड़ोस के मोहल्ले वालों ने भी आकर होली खेली। परंपरागत तरीके से लोकनाथ मिलन संघ के रविंद्र पांडेय की देखरेख में मातादीन रेवड़ी के बगल में राधा कृष्ण मंदिर में अबीर-गुलाल से पूजन किया गया।
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लोकनाथ व्यायामशाला में गुझिया-पापड़ और ठंडई के बीच छोटों ने बड़ों के पांव छूकर आशीर्वाद लिया और बड़े-बुजुर्गों ने छोटों को अबीर-गुलाल लगाकर आशीर्वाद लिया। फिर होलियारों का काफिला लोकनाथ चौराहे पहुंचा।
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यहां पहले से ही रंगों के ड्रम तो भरे ही थे, छिद्रयुक्त पाइपों के फव्वारों से भी रंग बरसाने की पूरी व्यवस्था थी। होलियारों की टोली पहुंची तो फव्वारे रंग बरसने लगे। पहले धीमे लेकिन धीरे-धीरे यह सिलसिला तेज होता गया। होली के नए पुराने गीतों और रंगों की बारिश के बीच होलियारों का रंगों में भीगते हुए एक दूसरे को पहले अबीर-गुलाल और फिर रंगों से भिगोने का क्रम शुरू हुआ तो फिर दोपहर के बाद तकरीबन शाम तक जारी रहा। रंगों से तन-मन भीगा तो फिर कपड़े फाड़ने का दौर शुरू हुआ। पहले युवाओं ने एक दूसरे के ‘ऊपर’ के कपड़े फाड़े और फिर बाकी कपड़े भी फाड़े गए।


चेहरे लाल-पीले करते हुए युवाओं ने एक दूसरे के कपड़े भी फाड़े । फिर उन्हें एक-एक करके केबल, टेलीफोन के तारों पर लटकाने का क्रम शुरू हुआ तो बस देखते ही देखते तारों पर चीथड़ों की कतारें लग गईं। दोपहर के बाद बुजुर्गों की ओर से कई-कई बार होली बंद करने की अपील की जाती रही लेकिन युवाओं का जोश शाम तक जारी ही रहा। अशोक पुरवार, श्रीरंजन चौरसिया, ब्रजेश पुरवार, मोहनजी टंडन, निखिल पांडेय, शिवनंदन पांडेय, नीरज गुप्ता, अनिल चौरसिया आदि ने युवाओं और बुजुर्गों के बीच सेतु का काम करते हुए होली सकुशल पूरा होने में सहयोग किया।
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