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यूपी : हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के आरोपी को किया बरी, जिला न्यायाल ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा
Thu, 15 Dec 2022 11:28 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 15 Dec 2022 11:28 PM IST
सार
मामले में याची पर अपनी पत्नी की हत्या करने का आरोप था। पत्नी के भाई ने बदायूं जिले के उघैती थाने में दहेज अधिनियम की धारा 2/3 और आईपीसी की धारा 498ए और 304बी के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
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मुकदमा
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बदायूं जिला न्यायालय के फैसले को पलटते हुए याची को पत्नी की हत्या के आरोप से मुक्त करते हुए बरी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा, निचली अदालत का फैसला एक तरफा था। लिहाजा आरोपी को बरी किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ.कौशल जयेंद्र ठाकर और न्यायमूर्ति अजय त्यागी ने अनिल की अपील को स्वीकार करते हुए दिया।
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मामले में याची पर अपनी पत्नी की हत्या करने का आरोप था। पत्नी के भाई ने बदायूं जिले के उघैती थाने में दहेज अधिनियम की धारा 2/3 और आईपीसी की धारा 498ए और 304बी के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जिला अदालत में मामले की सुनवाई केदौरान अभियोजन की ओर से 11 गवाह पेश किए। जिला न्यायालय ने पति अनिल को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये की सजा सुनाई।
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मामले में पति ने जिला न्यायालय केफैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। पति ने अपने को बेकसूर बताया। कोर्ट ने कहा, साक्ष्य अधिनियम की धारा 100 से 114 तक तथ्यों को साबित करने का बोझ उस व्यक्ति पर होता है, जो कोई बात जानता है। साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 इसका अपवाद है। कोर्ट ने अपने दो आदेशों का हवाला भी दिया। निचली अदालत ने तथ्यों को सही तरीके से समझा नहीं और पति को गलत दोषी ठहराया। लिहाजा, पति को आरोप से मुक्त करते हुए उसे बरी किया जाता है।
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