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टेरर फंडिंग : विस्फोट की साजिश में युवकों की गिरफ्तारी पर पीयूसीएल ने उठाए सवाल

Thu, 30 Sep 2021 11:25 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 30 Sep 2021 11:25 AM IST
सार

  • कहा, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल व एटीएस की कार्रवाई में सत्य की बजाय लग रही कहानी

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Terror funding: PUCL raised questions on the arrest of youths in the conspiracy of the blast
Prayagraj News : Terrorist - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

आईएसआई से कनेक्शन और प्रदेश के महत्वपूर्ण स्थानों पर विस्फोट की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किए गए मुस्लिम युवकों के मामले में पीपुल यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) ने सवाल खड़े किए हैं। संगठन ने युवकों की गिरफ्तारी को गलत बताया है। कहा है कि उसमें न्यायिक प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया गया है। ऐसे में एटीएस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की कार्रवाई में सत्यता कम कहानी ज्यादा लग रही है। संगठन ने मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। 

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पीयूसीएल के सचिव मनीष सिन्हा ने बताया कि युवकों के आतंकी कनेक्शन मामले की हकीकत पता लगाने के लिए पीयूसीएल ने वरिष्ठ अधिवक्ता केके राय, अधिवक्ता सीमा आजाद, चार्ली प्रकाश, सोनी आजाद की टीम गठित की। टीम में बतौर सदस्य वह खुद भी शामिल रहे। इसके बाद तारिक और जीशान के घर वालों से मुलाकात की गई और सही तथ्यों की जानकारी की गई। टीम के सदस्यों ने कहा कि गिरफ्तार लोगों पर 10 सितंबर को एफआईआर दर्ज की गई।
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विस्फोटक के प्रकार का नहीं है जिक्र
उस एफआईआर में न तो नाम का उल्लेख है और न ही जगह का। फि र एटीएस ने आरोपितों की सही शिनाख्त कैसे की! यह समझ से परे है। एफआईआर में विस्फोटक पाए जाने, उसके स्थान और उसके प्रकार का कोई जिक्र नहीं है। फिर नैनी स्थित पोल्ट्री फार्म में ही विस्फोटक पदार्थ की बात कैसे सामने आई।
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गिरफ्तार युवक शाहरुख ने अपने वीडियो में 12 या 13 सितंबर को किसी बाक्स में रखने की बात कही है, फिर यह 10 सितंबर की एफआईआर में यह बात कैसे दर्ज हो सकती है? एटीएस ने मीडिया के सामने विस्फोटक सामग्रियों को प्रदर्शित भी नहीं किया जैसा कि वह दूसरे मामलों में करती है। संगठन ने गिरफ्तार युवकों के पाकिस्तान कनेक्शन सहित अन्य तथ्यों पर सवाल खड़े किए हैं और मामले की जांच किसी न्यायाधीश से कराने की मांग की है। 

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पीयूसीएल की टीम द्वारा खड़े किए गए सवाल?

  • एटीएस और दिल्ली स्पेशल सेल ने कानूनी प्रक्रिया की अवहेलना की है, जिससे कि गिरफ्तारियां और इस संदर्भ में पुलिस की कहानी हो रही संदेहास्पद।

 

  • एटीएस और दिल्ली स्पेशल सेल ने जिन लोगों को पाकिस्तान समर्थित इतने बड़े आतंकवादी बताया, वे लोग गिरफ्तारी की भनक लगने के बावजूद भागे नहीं पूछताछ में सहयोग किया और खुद जाकर सरेंडर किया। यह बात भी पुलिस के बड़े दावों पर सवाल खड़े करती है।

 

  • नैनी में विस्फोटक और असलहे पाए जाने की बात संदिग्ध लग रही है। क्योंकि, एफआईआर में विस्फोटक पाए जाने और उसके प्रकार या असलहों के प्रकार का कोई जिक्र नहीं है। फिर नैनी स्थित पोल्ट्री फॉर्म में ही विस्फोटक की बात कैसे सामने आई! इसके अलावा शाहरुख ने अपने वीडियो में 12 या 13 सितंबर को किसी बॉक्स के रखने की बात कही है, फिर यह 10 सितंबर की एफआईआर में कैसे दर्ज हो सकती है?

  • एटीएस ने नैनी के डांडी स्थित पोल्ट्री फॉर्म से विस्फोटक पाए जाने की बात तो कही है, लेकिन प्रेस के सामने उसका प्रदर्शन नहीं किया, जैसा कि वह दूसरे सभी मामलों में करती रही है। इससे यह साफ नहीं होता कि विस्फोटक था, तो किस प्रकार का था और कितना था। असलहे कितने और कैसे थे?

 

  • शाहरुख ने अपने वीडिया के माध्यम से जो भी कहा है, वह अदालत के समक्ष स्वीकार्य नहीं होगा। क्योंकि, यह नहीं कहा जा सकता है कि वह बात उसने बगैर किसी दबाव में कही है। यह भी हो सकता है कि 10 सितंबर को एफआईआर दर्ज करने के बाद एटीएस ने ही सबूत गढ़ने के लिए शाहरुख को लालच या धमकी देकर वह बाक्स रखवाया हो। यह सब जांच का विषय है, क्योंकि यह अजीब है कि किसी मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद आपराधिक काम किया गया है। यह भी अजीत है कि 14 सितंबर को शाहरुख ने खुद एटीएस वालों के नंबर पर फोन किया और उन्होंने उसे इग्नोर करके पूछताछ के लिए न बुलाया न गिरफ्तार किया। उसने खुद 19 सितंबर को दिन के उजाले में वीडियो बनाते हुए सरेंडर किया।

  • एटीएस, दिल्ली स्पेशल सेन ने जीशान के घर पहुंचकर पहले पूछताछ की और उसके बाद चले गए। आधे घंटे बाद दोबारा गए और गिरफ्तार किया। अगर सचमुच जीशान आईएसआई के साथ काम करने वाला आतंकवादी था, तो उसे खतरा समझ में आना चाहिए था। इस बीच वह फरार हो सकता था, लेकिन वह भागा नहीं। एटीएस वाले एक बार छोड़कर दोबारा उसे आराम से गिरफ्तार करके ले गए। यह पुलिस की बड़े पाकिस्तानी आतंकवादी वाली कहानी पर संदेह खड़ा करती है।

 

  • एटीएस ने प्रयागराज की जिला कोर्ट से कोई ट्रांजिट रिमांड पर नहीं लिया। जबकि, यह दो राज्यों के बीच का मामला है। न ही उसे 24 घंटे के अंदर कोर्ट में प्रस्तुत किया। इस तरह उसने गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन किया।
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