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दो पक्षों की जिद में फंसी शिक्षक भर्ती
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Teacher stuck in insistence of two parties
प्रयागराज। परिषदीय स्कूलों में 69 हजार शिक्षक भर्ती दो पक्षों की जिद में फंस गई है। एक ओर जहां शिक्षामित्र पूर्व में हुई 68500 शिक्षक भर्ती वाले पुराने कटऑफ के आधार पर परीक्षा की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर बीएड डिग्री धारक नए कटऑफ के आधार पर भर्ती पूरी करने की मांग कर रहे हैं। इस बात को लेकर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। परीक्षार्थियों का आरोप है कि सरकार की ओर से कोर्ट में लगने वाली तारीख पर महाधिवक्ता के नहीं आने से मामला लटक रहा है। मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के चलते चार लाख से अधिक अभ्यर्थी रिजल्ट के इंतजार में हैं।
बेसिक शिक्षा परिषद से संबद्घ प्राथमिक स्कूलों में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती के लिए छह जनवरी 2019 को लिखित परीक्षा हुई थी। परीक्षा में साढ़े चार लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने भागीदारी की। भर्ती परीक्षा पूरी होने के बाद शासन ने कटऑफ तय कर किया। नए कटऑफ में सामान्य वर्ग के लिए 65 फीसदी और आरक्षित वर्ग के लिए 60 फीसदी अंक पाना अनिवार्य कर दिया। परीक्षा के बाद कटऑफ तय किए जाने का शिक्षामित्रों ने विरोध कर दिया। शिक्षामित्रों ने कटऑफ तय करने की प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चुनौती दे दी। शिक्षामित्रों का कहना है कि इससे पहले 68500 सहायक अध्यापकों की भर्ती में सामान्य एवं ओबीसी के लिए 45 फीसदी और एससी-एसटी के लिए 40 फीसदी अंक तय किए थे।
शिक्षामित्रों की मांग थी कि उसी के अनुरूप कटऑफ तय हो। एक दिसंबर 2018 को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा डॉ. प्रभात कुमार की ओर से परीक्षा का शासनादेश जारी हुआ था उसमें न्यूनतम अर्हता अंक का कोई जिक्रनहीं था। छह जनवरी 2019 को परीक्षा के एक दिन बाद उत्तीर्ण प्रतिशत 60/65 प्रतिशत कर दिया। नए आदेश में स्पष्ट किया गया था कि 150 अंकों की परीक्षा में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 97 और आरक्षित वर्ग के लिए 90 अंक लाना अनिवार्य कर दिया गया। बीएड अभ्यर्थियों ने नई मेरिट का समर्थन किया तो बीटीसी-शिक्षामित्र अभ्यर्थियों ने पुराने नियम के आधार पर भर्ती कराने की मांग की। परीक्षार्थियों की मांग के बाद शासन ने तर्क दिया कि 68500 शिक्षक भर्ती में मात्र एक लाख अभ्यर्थी शामिल थे जबकि 69 हजार शिक्षक भर्ती में चार लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए। मेरिट निर्धारण का पूरा मामला शासन में विचाराधीन होने से परीक्षार्थियों दुविधा बनी है।
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पेपर लीक मामले की जांच ठंडे बस्ते में
0 सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की आर से परिषदीय स्कूलों में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के जांच ठंडे बस्ते में पड़ी है। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र नकल कराने वालों केहाथ में पहुंच जाने के मामले की जांच रिपोर्ट को एक बार फिर से 68500 शिक्षक भर्ती की तरह दबाने की कोशिश की जा रही है।
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बेसिक शिक्षा परिषद से संबद्घ प्राथमिक स्कूलों में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती के लिए छह जनवरी 2019 को लिखित परीक्षा हुई थी। परीक्षा में साढ़े चार लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने भागीदारी की। भर्ती परीक्षा पूरी होने के बाद शासन ने कटऑफ तय कर किया। नए कटऑफ में सामान्य वर्ग के लिए 65 फीसदी और आरक्षित वर्ग के लिए 60 फीसदी अंक पाना अनिवार्य कर दिया। परीक्षा के बाद कटऑफ तय किए जाने का शिक्षामित्रों ने विरोध कर दिया। शिक्षामित्रों ने कटऑफ तय करने की प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चुनौती दे दी। शिक्षामित्रों का कहना है कि इससे पहले 68500 सहायक अध्यापकों की भर्ती में सामान्य एवं ओबीसी के लिए 45 फीसदी और एससी-एसटी के लिए 40 फीसदी अंक तय किए थे।
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शिक्षामित्रों की मांग थी कि उसी के अनुरूप कटऑफ तय हो। एक दिसंबर 2018 को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा डॉ. प्रभात कुमार की ओर से परीक्षा का शासनादेश जारी हुआ था उसमें न्यूनतम अर्हता अंक का कोई जिक्रनहीं था। छह जनवरी 2019 को परीक्षा के एक दिन बाद उत्तीर्ण प्रतिशत 60/65 प्रतिशत कर दिया। नए आदेश में स्पष्ट किया गया था कि 150 अंकों की परीक्षा में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 97 और आरक्षित वर्ग के लिए 90 अंक लाना अनिवार्य कर दिया गया। बीएड अभ्यर्थियों ने नई मेरिट का समर्थन किया तो बीटीसी-शिक्षामित्र अभ्यर्थियों ने पुराने नियम के आधार पर भर्ती कराने की मांग की। परीक्षार्थियों की मांग के बाद शासन ने तर्क दिया कि 68500 शिक्षक भर्ती में मात्र एक लाख अभ्यर्थी शामिल थे जबकि 69 हजार शिक्षक भर्ती में चार लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए। मेरिट निर्धारण का पूरा मामला शासन में विचाराधीन होने से परीक्षार्थियों दुविधा बनी है।
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पेपर लीक मामले की जांच ठंडे बस्ते में
0 सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की आर से परिषदीय स्कूलों में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के जांच ठंडे बस्ते में पड़ी है। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र नकल कराने वालों केहाथ में पहुंच जाने के मामले की जांच रिपोर्ट को एक बार फिर से 68500 शिक्षक भर्ती की तरह दबाने की कोशिश की जा रही है।