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स्वामी वीरेंद्रानंद और अंबिकानंद को मिलेगी महामंडलेश्वर पदवी
Fri, 29 Jan 2021 01:35 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 29 Jan 2021 01:35 AM IST
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prayagraj news : किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर प्रयागराज से महेश्वरी नंद गिरि (छोटी गुरु) और गोरखपुर से किरन नंद गिरि ।
- फोटो : prayagraj
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जूना अखाड़े में दीक्षा ग्रहण करने वाले एक महिला संन्यासिनी समेत दो संतों को हरिद्वार कुंभ में महामंडलेश्वर की पदवी दी जाएगी। बृहस्पतिवार को दोनों संतों को संन्यास की दीक्षा दी गई। इस दौरान कई महामंडलेश्वरों और संतों, महंतों ने संन्यास दीक्षा समारोह में हिस्सा लिया।
सांसारिक मायामोह का परित्याग कर गुरुवार को संन्यास धारण करने वालों में समाजसेविका अंबिकानंद गिरि के अलावा वीरेंद्रानंद गिरि शामिल हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ निवाली वीरेंद्रानंद हिमालय में साधना करते रहे हैं। जबकि साध्वी अंबिकानंद जूनागढ़ से जुड़ी रही हैं। जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक महंत हरि गिरि महाराज ने बताया कि स्वामी वीरेंद्रानंद सीबीएसई बोर्ड के 10 से अधिक स्कूलों का संचालन करते रहे हैं।
इतना ही नहीं वह उत्तराखंड में भाजपा के टिकट पर विधान सभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। वीरेंद्रानंद पालवंश राज परिवार से संबंध रखते हैं। महंत हरि गिरि ने बताया कि अबिंकानंद और स्वामी वीरेंद्रानंद दोनों को हरिद्वार कुंभ में महामंडलेश्वर की पदवी दी जा सकती है। इस पर सहमति बन गई है। यहां संन्यास दीक्षा समारोह में कई महामंडलेश्वरों और संतों ने हिस्सा लिया।
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सांसारिक मायामोह का परित्याग कर गुरुवार को संन्यास धारण करने वालों में समाजसेविका अंबिकानंद गिरि के अलावा वीरेंद्रानंद गिरि शामिल हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ निवाली वीरेंद्रानंद हिमालय में साधना करते रहे हैं। जबकि साध्वी अंबिकानंद जूनागढ़ से जुड़ी रही हैं। जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक महंत हरि गिरि महाराज ने बताया कि स्वामी वीरेंद्रानंद सीबीएसई बोर्ड के 10 से अधिक स्कूलों का संचालन करते रहे हैं।
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इतना ही नहीं वह उत्तराखंड में भाजपा के टिकट पर विधान सभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। वीरेंद्रानंद पालवंश राज परिवार से संबंध रखते हैं। महंत हरि गिरि ने बताया कि अबिंकानंद और स्वामी वीरेंद्रानंद दोनों को हरिद्वार कुंभ में महामंडलेश्वर की पदवी दी जा सकती है। इस पर सहमति बन गई है। यहां संन्यास दीक्षा समारोह में कई महामंडलेश्वरों और संतों ने हिस्सा लिया।
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