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अचानक पहुंची महिला आयोग की टीम, खंगाला हॉस्टल
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प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास परिसर में छात्राओं की सुरक्षा का मसला राज्यसभा में उठने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम मंगलवार की शाम अचानक महिला हॉस्टल परिसर में छात्राओं की सुरक्षा का जायजा लेने पहुंच गई। इस दौरान टीम की सदस्यों ने कई छात्राओं से बात की और हॉस्टल में सुविधाओं एवं असुविधाओं के बारे में उनसे पूछा। टीम बुधवार को भी रहेगी और महिला हॉस्टल का निरीक्षण करेगी। साथ ही टीम इविवि प्रशासन के अफसरों से भी बातचीत करेगी।
हालांकि पूर्व में जारी कार्यक्रम के अनुसार महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा को आना था लेकिन उनकी जगह महिला आयोग की सदस्य राहुला देसाई आ गईं। आयोग से आई छह सदस्यीय टीम मंगलवार शाम छह बजे के आसपास महिला छात्रावास परिसर में पहुंच गई। इविवि प्रशासन के अफसरों को भी उनके आने की कोई पूर्व सूचना नहीं थी। आयोग की सदस्यों ने सरोजनी नायडू हॉस्टल, हॉल ऑफ रेजिडेंस और प्रियदर्शनी हॉस्टल का निरीक्षण किया। बाकी तीन हॉस्टलों का निरीक्षण बुधवार को होगा।
सूत्रों के अनुसार पूछताछ के छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल में केवल पुरुष गार्ड हैं जबकि महिला सुरक्षा कर्मियों को भी होना चाहिए। मेस में गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिला। डिस्पेंसरी में दवाएं नहीं मिलतीं और हॉस्टल में लगा आरओ भी खराब पड़ा है। आयोग की सदस्यों ने दो से ढाई घंटे तक हॉस्टल का निरीक्षण किया और छात्राओं से उनकी सुरक्षा के मसले पर भी विस्तार से बातचीत की। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान हॉस्टल अधीक्षिकाओं को वहां से हटा दिया गया, ताकि छात्राएं खुलकर अपनी बात रख सकें।
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ऋचा ने सौंपी 200 पन्नों की रिपोर्ट
हॉस्टल के निरीक्षण से पहले छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह ने सर्किट हाउस में महिला आयोग की सदस्य से मिलकर 200 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में ऋचा ने तमाम साक्ष्यों के साथ इविवि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए आयोग की सदस्यों ने ऋचा से कुछ अन्य दस्तावेज भी मांगे हैं, जो ऋचा बुधवार को उपलब्ध कराएंगी।
कुलपति, परीक्षा नियंत्रक का मुद्दा भी उठा
आयोग की सदस्य से बातचीत के दौरान ऋचा सिंह ने कुलपति और परीक्षा नियंत्रक का मुद्दा भी उठाया। ऋचा ने कहा कि कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू की जांच के लिए कुलपति के खिलाफ जांच के लिए इविवि प्रशासन ने ही कमेटी का गठन कर लिया और इस कमेटी ने उन्हें क्लीन चिट भी दे दी। वहीं, उत्पीड़न के आरोप में घिरे होने के बावजूद प्रो. रामेंद्र सिंह को परीक्षा नियंत्रक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई।
कमेटी के गठन पर उठे सवाल
ऋचा ने महिला आयोग की सदस्य को बताया कि इविवि में महिला उत्पीड़न की शिकायत सुनने के लिए आंतरिक कमेटी नहीं बनी थी। उन्होंने जब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने आननफानन में कमेटी का गठन कर दिया। वह भी यूजीसी के मानकों के अनुरूप नहीं है। वहीं विश्वविद्यालय में महिला सलाहकार बोर्ड का भी गठन नहीं किया गया है। ऋचा के साथ इविवि की महिला सलाहकार बोर्ड की पूर्व चेयरमैन प्रो. रंजन कक्कड़ ने भी सदस्य से मुलाकात की और उन्हें बताया कि इविवि प्रशासन की तानाशाही के कारण ही उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था।
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हालांकि पूर्व में जारी कार्यक्रम के अनुसार महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा को आना था लेकिन उनकी जगह महिला आयोग की सदस्य राहुला देसाई आ गईं। आयोग से आई छह सदस्यीय टीम मंगलवार शाम छह बजे के आसपास महिला छात्रावास परिसर में पहुंच गई। इविवि प्रशासन के अफसरों को भी उनके आने की कोई पूर्व सूचना नहीं थी। आयोग की सदस्यों ने सरोजनी नायडू हॉस्टल, हॉल ऑफ रेजिडेंस और प्रियदर्शनी हॉस्टल का निरीक्षण किया। बाकी तीन हॉस्टलों का निरीक्षण बुधवार को होगा।
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सूत्रों के अनुसार पूछताछ के छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल में केवल पुरुष गार्ड हैं जबकि महिला सुरक्षा कर्मियों को भी होना चाहिए। मेस में गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिला। डिस्पेंसरी में दवाएं नहीं मिलतीं और हॉस्टल में लगा आरओ भी खराब पड़ा है। आयोग की सदस्यों ने दो से ढाई घंटे तक हॉस्टल का निरीक्षण किया और छात्राओं से उनकी सुरक्षा के मसले पर भी विस्तार से बातचीत की। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान हॉस्टल अधीक्षिकाओं को वहां से हटा दिया गया, ताकि छात्राएं खुलकर अपनी बात रख सकें।
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ऋचा ने सौंपी 200 पन्नों की रिपोर्ट
हॉस्टल के निरीक्षण से पहले छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह ने सर्किट हाउस में महिला आयोग की सदस्य से मिलकर 200 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में ऋचा ने तमाम साक्ष्यों के साथ इविवि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए आयोग की सदस्यों ने ऋचा से कुछ अन्य दस्तावेज भी मांगे हैं, जो ऋचा बुधवार को उपलब्ध कराएंगी।
कुलपति, परीक्षा नियंत्रक का मुद्दा भी उठा
आयोग की सदस्य से बातचीत के दौरान ऋचा सिंह ने कुलपति और परीक्षा नियंत्रक का मुद्दा भी उठाया। ऋचा ने कहा कि कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू की जांच के लिए कुलपति के खिलाफ जांच के लिए इविवि प्रशासन ने ही कमेटी का गठन कर लिया और इस कमेटी ने उन्हें क्लीन चिट भी दे दी। वहीं, उत्पीड़न के आरोप में घिरे होने के बावजूद प्रो. रामेंद्र सिंह को परीक्षा नियंत्रक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई।
कमेटी के गठन पर उठे सवाल
ऋचा ने महिला आयोग की सदस्य को बताया कि इविवि में महिला उत्पीड़न की शिकायत सुनने के लिए आंतरिक कमेटी नहीं बनी थी। उन्होंने जब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने आननफानन में कमेटी का गठन कर दिया। वह भी यूजीसी के मानकों के अनुरूप नहीं है। वहीं विश्वविद्यालय में महिला सलाहकार बोर्ड का भी गठन नहीं किया गया है। ऋचा के साथ इविवि की महिला सलाहकार बोर्ड की पूर्व चेयरमैन प्रो. रंजन कक्कड़ ने भी सदस्य से मुलाकात की और उन्हें बताया कि इविवि प्रशासन की तानाशाही के कारण ही उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था।