Prayagraj : इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर विशेष- पांच घंटे तहखाने में रहीं इंदिरा अपने साथ ले गईं कई राज
Indira Gandhi News : हत्या से तीन माह पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी इलाहाबाद (अब प्रयागराज) आई थीं। यह उनका निजी दौरा था। आनंद भवन में कुछ पुराने कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद उनके पांच घंटे आनंद भवन के तहखाने में बीते। वहां दर्जनों अलमारियां और बक्से रखे थे।
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हत्या से तीन माह पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी इलाहाबाद (अब प्रयागराज) आई थीं। यह उनका निजी दौरा था। आनंद भवन में कुछ पुराने कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद उनके पांच घंटे आनंद भवन के तहखाने में बीते। वहां दर्जनों अलमारियां और बक्से रखे थे। वह कई अलमारियां और बक्से साथ ले गईं लेकिन यह आज भी राज है कि उनमें क्या था।
वर्ष 1970 में आनंद भवन को जब जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल ट्रस्ट बनाया गया तो तहखाने को छोड़ बाकी संपत्ति ट्रस्ट को ट्रांसफर कर दी गई और तहखाने की देखरेख की जिम्मेदारी और उसकी चाबी मुंशी कन्हैया लाल को सौंप दी गई। नेहरू परिवार के करीबी रहे कन्हैया लाल 1934 से 1984 तक स्वराज भवन और आनंद भवन के केयरटेकर रहे।
कन्हैया लाल के दामाद व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्याम कृष्ण पांडेय बताते हैं कि सुबह 11 बजे बमरौली एयरपोर्ट पर इंदिरा गांधी का विमान उतरा था और वहां से सीधे आनंद भवन आईं। सुबह 11:30 से 12:00 बजे तक कार्यकर्ताओं से मिलीं। इसके बाद मुंशी कन्हैया लाल को साथ लेकर तहखाने में गईं। वहां नेहरू परिवार के सदस्यों के नाम से अलग-अलग कई अलमारियां और बक्से रखे हुए थे और सभी पर ताले लगे थे। इंदिरा गांधी वहां पांच घंटे तक रहीं। अलमारियों और बक्सों को खुलवाकर देखा।
कई महत्वपूर्ण दस्तावेज के साथ कुछ अलमारियां और बक्से साथ ले गईं। उनमें क्या था, यह आज भी पहेली है। केयरटेकर रहे मुंशी कन्हैया लाल ने भी पत्नी और बच्चों को इस बारे में कभी कुछ नहीं बताया। वर्ष 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद मुंशी कन्हैया लाल का भी निधन हो गया। तहखाने की चाबी कन्हैया लाल की पत्नी चंपा देवी ने अपने पास रख ली। राजीव गांधी चुनाव जीत कर अमिताभ बच्चन के साथ स्वराज भवन आए तो चंपा देवी ने चाबी राजीव गांधी को सौंप दी। उस वक्त कन्हैया लाल की बेटी किरण बाला पांडेय और दामाद श्याम कृष्ण पांडेय भी मौजूद थे।
सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर केयर टेकर बने थे कन्हैया लाल
नेहरू परिवार के करीबी रहे मुंशी कन्हैयालाल फैजाबाद में राजस्व निरीक्षक के पद पर तैनात थे। वर्ष 1934 में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और आनंद भवन की देखरेख की जिम्मेदारी उठा ली।