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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Shankaracharya Nischalananda said on I Love Mohammed - It is not wrong to love your deity, but spreading

UP : आई लव मोहम्मद पर शंकराचार्य निश्चलानंद बोले - अपने ईष्ट से प्रेम करना गलत नहीं, उन्माद फैलाना निंदनीय

Sat, 11 Oct 2025 09:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 11 Oct 2025 09:58 PM IST
सार

पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि अपने ईष्ट से प्रेम करना गलत नहीं है, लेकिन, शिष्टाचार की बजाए उन्माद फैलाना निंदनीय है। सभी के पूर्वज हिंदू थे, जब तक हिंदू सुरक्षित है तब तक पूरा विश्व सुरक्षित है।

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Shankaracharya Nischalananda said on I Love Mohammed - It is not wrong to love your deity, but spreading
पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि अपने ईष्ट से प्रेम करना गलत नहीं है, लेकिन, शिष्टाचार की बजाए उन्माद फैलाना निंदनीय है। सभी के पूर्वज हिंदू थे, जब तक हिंदू सुरक्षित है तब तक पूरा विश्व सुरक्षित है। पुरी शंकराचार्य ने यह बातें शनिवार को नई झूंसी स्थित शिवगंगा आश्रम में सात दिवसीय प्रवास के दूसरे दिन पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं।

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पुरी शंकराचार्य ने आई लव मोहम्मद पोस्टर के सवाल के संदर्भ में आगे कहा कि मुसलमान तभी तक सुरक्षित हैं जब तक हिंदू सुरक्षित है। जहां हिंदू नहीं हैं वहां पर मुसलमान आपस में ही लड़कर मर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल में फैलाई गई अशांति के पीछे भारत को चारों तरफ से घेरने की साजिश थी। भारत में भी इस तरह का उन्माद फैलाए जाने की भी कोशिश हो रही थी। हालांकि, हमारे देश में ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है। क्योंकि भारत की जनता बेहद समझदार और सकारात्मक सोच वाली है।  

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युवाओं का परिश्रम से भागना अवसाद का बड़ा कारण

युवाओं में लगातार बढ़ रहे अवसाद और उसकी वजह से खुदकुशी की घटनाओं के बढ़ने को लेकर किए गए अमर उजाला के सवाल पर पुरी शंकराचार्य ने कहा कि युवाओं में सकारात्मक सोच की लगातार कमी होती जा रही है। वे परिश्रम से भी भाग रहे हैं। युवाओं को भरपूर परिश्रम के साथ-साथ सकारात्मक सोच भी रखनी चाहिए, तभी उनका विकास संभव होगा। जब युवा भरपूर परिश्रम करेंगे तो अपने आप अवसाद से दूर होने लगेंगे।

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उन्होंने अवसाद का एक और बड़ा कारण शास्त्र संवत शादियों के न होने की कमी को भी बताया। कहा कि प्रेम विवाह के कारण भी लगातार तलाक के मामले सामने आ रहे हैं जिससे युवा अवसाद की ओर जा रहे हैं। इसी की वजह से खुदकुशी करने जैसा आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। पुरी शंकराचार्य ने कहा कि संयुक्त परिवार की परंपरा से यह सब चीजें कम हो सकती हैं।

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