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हाईकोर्ट : ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में वर्षों तक पद पर बने रहने के मामले में सरकार से मांगा जवाब

Sat, 05 Sep 2026 04:40 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 05 Sep 2026 04:40 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में पदाधिकारियों के लंबे समय तक पद पर बने रहने और सदस्यों के मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही 20 अप्रैल 2026 के आदेश का संचालन अगली तारीख तक रोक दिया है।

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Seeks response from the government regarding office bearers holding posts in group housing societies for years
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में पदाधिकारियों के लंबे समय तक पद पर बने रहने और सदस्यों के मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही 20 अप्रैल 2026 के आदेश का संचालन अगली तारीख तक रोक दिया है।

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न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने संस्थागत वित्त और रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स के प्रधान सचिव को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। मामला एल्डेको आमंत्रण अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन से जुड़ा है। याचिका में 20 अप्रैल 2026 को डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स, गाजियाबाद की ओर से पारित उस आदेश को चुनौती दी गई है। इसमें नई प्रबंधन समिति गठित होने तक सोसाइटी के पदाधिकारियों की वित्तीय शक्तियों पर रोक लगाई गई थी।
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कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कहा कि उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट (प्रमोशन ऑफ कंस्ट्रक्शन, ओनरशिप एंड मेंटेनेंस) नियमावली-2011 के मॉडल बायलॉज के नियम 26 में पदाधिकारियों के कार्यकाल और उनके उत्तराधिकारियों के निर्वाचित होने तक पद पर बने रहने से जुड़े प्रावधानों की व्याख्या जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि यदि चुनाव नहीं कराने के कारण पदाधिकारी अनिश्चितकाल तक पद पर बने रहते हैं तो कार्यकाल की निर्धारित सीमा का उद्देश्य ही निष्फल हो जाएगा।
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हाईकोर्ट ने यह भी गंभीरता से लिया कि कुछ सदस्यों को मेंटेनेंस, बिजली या अन्य बकाया जमा नहीं करने के आधार पर मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने की बात सामने आई है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या कानून, नियम या पंजीकृत बायलॉज ऐसी रोक की अनुमति देते हैं और इसके दुरुपयोग से बचने के लिए क्या सुरक्षा उपाय हैं।


कोर्ट ने गाजियाबाद के डिप्टी रजिस्ट्रार को आदेश की प्रति अपने क्षेत्र की सभी ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों को भेजने और उनके नोटिस बोर्ड पर चस्पा कराने का आदेश दिया है, ताकि अपार्टमेंट मालिक और अन्य संबंधित लोग इन मुद्दों पर अपने सुझाव कोर्ट के समक्ष रख सकें। अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को दोपहर दो बजे तय की है। 

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