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हाईकोर्ट : दुकान के किराए की वसूली भूमि राजस्व अधिनियम के तहत सही नहीं

Sun, 09 Jul 2023 04:19 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 09 Jul 2023 04:19 PM IST
सार

याचियों ने दुकान के बकाया किराए की वसूली के लिए बरेली नगर पालिका परिषद के कार्यकारी अधिकारी द्वारा जारी किए गए वसूली प्रमाणपत्रों और धारा 173-ए (बकाया के रूप में करों की वसूली) के तहत कलेक्टर द्वारा भूमि राजस्व अधिनियम के तहत जारी किए गए वसूली नोटिस को चुनौती दी थी।

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Recovery of shop rent is not correct under Land Revenue Act
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दुकान के किराए की वसूली भूमि राजस्व अधिनियम के तहत करने को सही नहीं माना है। कोर्ट ने कहा है कि यूपी नगर पालिका अधिनियम के तहत किसी भी नगर पालिका को अधिनियम की धारा 173-ए के तहत किसी दुकान के किराए के बकाया भूमि राजस्व के बकाए के रूप में वसूली नहीं जा सकता है। भूमि राजस्व अधिनियम के तहत कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस को रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने मंजीत सिंह व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
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याचियों ने दुकान के बकाया किराए की वसूली के लिए बरेली नगर पालिका परिषद के कार्यकारी अधिकारी द्वारा जारी किए गए वसूली प्रमाणपत्रों और धारा 173-ए (बकाया के रूप में करों की वसूली) के तहत कलेक्टर द्वारा भूमि राजस्व अधिनियम के तहत जारी किए गए वसूली नोटिस को चुनौती दी थी।
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याचियों के अधिवक्ता ने कहा कि नगर पालिका द्वारा उसे आवंटित दुकान के कब्जे वाले किसी भी दुकानदार पर बकाया किराया यूपी नगर पालिका अधिनियम की धारा 292 के तहत ही वसूला जा सकता है। इसे धारा 173-ए या धारा 291 के तहत भूमि राजस्व के रूप में वसूल नहीं किया जा सकता है। जिसके तहत कलेक्टर को भूमि पर भू राजस्व के रूप में किराया एकत्र करने का अधिकार प्राप्त है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कलेक्टर द्वारा जारी किए गए वसूली प्रमाण पत्र और वसूली उद्धरण को अधिकार क्षेत्र के बिना होने के कारण रद्द कर दिया।
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यह माना कि यूपी नगर पालिका अधिनियम 1912 नगर पालिका को किसी दुकान के किराए का बकाया भूमि राजस्व के बकाया के रूप में वसूल करने का अधिकार नहीं देता है। किसी भी बकाया के भुगतान के लिए बकाएदार को 15 दिन की अवधि प्रदान की जाती है। यह भी माना गया कि उक्त अवधि के भीतर अपना बकाया पूरा करने में विफल रहने के बाद ही नगर पालिका अधिनियम के अध्याय छह के तहत आगे की कार्यवाही शुरू की जा सकती है लेकिन भू राजस्व के तहत किराए की वसूली नहीं जा सकती है।
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