फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Ration shop operators did not get relief from the High Court

मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द करने से इनकार : राशन दुकान संचालकों को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

Sat, 05 Feb 2022 01:28 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 05 Feb 2022 01:28 AM IST
सार

मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से जिला आपूर्ति अधिकारी के सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान को निरस्त किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। दुकान संचालकों पर आरोप है कि उन्होंने एक ही आधार कार्ड पर दर्जनों नामों से राशन का वितरण कर दिया।

विज्ञापन
Ration shop operators did not get relief from the High Court
court - फोटो : Social Media

विस्तार

सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के संचालकों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा 25 नवंबर 2019 को पारित आदेश को सही ठहराया है। साथ ही मेरठ के जिला आपूर्ति अधिकारी द्वारा दिए गए दुकान लाइसेंस रद्दीकरण के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने अवधेश कुमार सहित 104 याचिकाओं को खारिज करते हुए दिया है। कोर्ट सभी मामलों पर एक साथ सुनवाई कर रही थी।

विज्ञापन



मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से जिला आपूर्ति अधिकारी के सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान को निरस्त किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। दुकान संचालकों पर आरोप है कि उन्होंने एक ही आधार कार्ड पर दर्जनों नामों से राशन का वितरण कर दिया। मेरठ में 2017 में इस तरह से चार हजार मामले सामने आए थे। इसी तरह के और मामले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों में पाए गए।
विज्ञापन



मेरठ में  जांच के बाद आरोप सही पाने पर जिला आपूर्ति अधिकारी ने दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी, विभु राय सहित अन्य अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि यह गड़बड़ी याचिकाकर्ताओं की तरफ से नहीं की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन




क्योंकि, ई-पॉश मशीन से केवल डेटा फीडिंग किया जाता है, उसमें कोई बदलाव उनके द्वारा नहीं किया जा सकता है। डेटा में परिवर्तन विभाग द्वारा ही किया जा सकता है। इसलिए याचिकाकर्ताओं को उत्तरदायी नहीं बनाया जा सकता है। कोर्ट ने पाया कि डेटा सक्षम प्राधिकारी के द्वारा प्रमाणित किए जाने के बाद ही लॉक हो सकता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed