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प्राइवेट स्कूल कर रहे हैं सरकार का काम
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 11 Mar 2015 12:10 AM IST
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हाईकोर्ट ने कहा है कि छह से 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की बाध्यता है। इसलिए शिक्षा का अधिकार कानून के मद्देनजर प्राइवेट स्कूलों को ग्रांट देने की नीति में संशोधन किया जाए। उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में प्राइवेट स्कूल हैं जो बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। ऐसे विद्यालय एक प्रकार से सरकार का ही काम कर रहे हैं।
गोरखपुर के किसान आदर्श इंटर कालेज के शिक्षक परिपूर्णानंद शुक्ला और अन्य की विशेष अपील पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश डा. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने कहा कि समाज के कमजोर तबके से आने वाले बच्चे इन स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करते हैं। वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण विद्यालय अच्छे शिक्षकों की सेवाएं नहीं ले पाते। बच्चों को योग्य और प्रशिक्षित अध्यापकों द्वारा पढ़ाया जाना चाहिए। खंडपीठ ने शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि शिक्षा का तात्पर्य मात्र अक्षर ज्ञान नहीं है, शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिससे बच्चे की बुद्धि का विकास हो वह एक अच्छा नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण के काम आ सकें।
आदर्श विद्यालय के प्राइमरी सेक्शन को 1973 में इंटर कालेज के साथ संचालित करने की अनुमति दी गई। मगर राज्य सरकार ने प्राइमरी सेक्शन को सरकारी ग्रांट देने से मना कर क्योंकि वह 1989 की शिक्षा नीति के तहत कुछ शर्तें पूरी नहीं करता था। शिक्षकों का कहना था कि पिछले 15 वर्षों से पढ़ा रहे हैं। ग्रांट स्वीकृति नहीं होने के कारण उनको वेतन नहीं मिल रहा है। एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने एकलपीठ के आदेश को रद करते हुए प्रदेश सरकार को नए कानून के तहत ग्रांट देने पर विचार करने के लिए कहा है।
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गोरखपुर के किसान आदर्श इंटर कालेज के शिक्षक परिपूर्णानंद शुक्ला और अन्य की विशेष अपील पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश डा. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने कहा कि समाज के कमजोर तबके से आने वाले बच्चे इन स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करते हैं। वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण विद्यालय अच्छे शिक्षकों की सेवाएं नहीं ले पाते। बच्चों को योग्य और प्रशिक्षित अध्यापकों द्वारा पढ़ाया जाना चाहिए। खंडपीठ ने शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि शिक्षा का तात्पर्य मात्र अक्षर ज्ञान नहीं है, शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिससे बच्चे की बुद्धि का विकास हो वह एक अच्छा नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण के काम आ सकें।
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आदर्श विद्यालय के प्राइमरी सेक्शन को 1973 में इंटर कालेज के साथ संचालित करने की अनुमति दी गई। मगर राज्य सरकार ने प्राइमरी सेक्शन को सरकारी ग्रांट देने से मना कर क्योंकि वह 1989 की शिक्षा नीति के तहत कुछ शर्तें पूरी नहीं करता था। शिक्षकों का कहना था कि पिछले 15 वर्षों से पढ़ा रहे हैं। ग्रांट स्वीकृति नहीं होने के कारण उनको वेतन नहीं मिल रहा है। एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने एकलपीठ के आदेश को रद करते हुए प्रदेश सरकार को नए कानून के तहत ग्रांट देने पर विचार करने के लिए कहा है।
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