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Allahabad High Court News: फर्जी दस्तावेज पर नौकरी करने वालों की जमानत खारिज
Wed, 09 Sep 2020 04:58 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 09 Sep 2020 04:58 PM IST
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इलाहाबाद हाई कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी अंकपत्र से षडयंत्र कर डाक विभाग मुरादाबाद में सरकारी नौकरी प्राप्त करने के दोषियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने उनको सुनाई गई सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। अपील को सुनवाई के लिए आठ अक्तूबर को पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने महानिबंधक कार्यालय को तीन माह में पेपर बुक तैयार करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने धर्मवीर सिंह व अन्य आरोपियों की अपील पर दाखिल जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है।
अर्जी पर वरिष्ठ अधिवक्ता जीएस चतुर्वेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव व सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता सहायक सालीसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश व संजय कुमार यादव ने बहस की।
अपीलार्थियों को सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद ने धोखाधड़ी, कूटरचना, षडयंत्र के आरोप में सात साल की कैद व सात हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अन्य आरोपों में चार साल व दो साल की सजा व दो हजार जुर्माना लगाया है।
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सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। सभी आरोपी 17 नवंबर 17 से सजा के दिन से जेल में हैं। वीरेन्द्र सिंह, सुंदर लाल, सुरेन्द्र सिंह, रोशन लाल, राजबहादुर को वर्ष 1992-93 में डाक सहायक बद्री प्रसाद की मिलीभगत से नौकरी हासिल करने का दोष सिद्ध हुआ है। नियुक्ति शैक्षिक अंकों के आधार पर की जानी थी। फर्जी मार्कशीट पेश कर नियुक्ति करा ली गई। मामले की जांच सीबीआई ने की और चार्जशीट दाखिल की। सीबीआई कोर्ट ने सभी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है, जिसे अपील में चुनौती दी गई है।
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अर्जी पर वरिष्ठ अधिवक्ता जीएस चतुर्वेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव व सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता सहायक सालीसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश व संजय कुमार यादव ने बहस की।
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अपीलार्थियों को सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद ने धोखाधड़ी, कूटरचना, षडयंत्र के आरोप में सात साल की कैद व सात हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अन्य आरोपों में चार साल व दो साल की सजा व दो हजार जुर्माना लगाया है।
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सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। सभी आरोपी 17 नवंबर 17 से सजा के दिन से जेल में हैं। वीरेन्द्र सिंह, सुंदर लाल, सुरेन्द्र सिंह, रोशन लाल, राजबहादुर को वर्ष 1992-93 में डाक सहायक बद्री प्रसाद की मिलीभगत से नौकरी हासिल करने का दोष सिद्ध हुआ है। नियुक्ति शैक्षिक अंकों के आधार पर की जानी थी। फर्जी मार्कशीट पेश कर नियुक्ति करा ली गई। मामले की जांच सीबीआई ने की और चार्जशीट दाखिल की। सीबीआई कोर्ट ने सभी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है, जिसे अपील में चुनौती दी गई है।