संगमनगरी में 83 प्रतिशत तक दिखेगा ग्रहण, ग्रहण काल में करें ये पांच उपाय
- ग्रहण काल को पुण्यकाल माना जाता है, इसलिए इस दौरान कामनापूर्ति के लिए अनुष्ठान करें।
- ग्रहण के आरंभ से मोक्ष तक मंत्र जाप, कीर्तन और भजन करें
- ग्रहण के समय गंगा या संगम स्नान करने से पुण्य लाभ की प्राप्ति होती है।
- ग्रहण के आरंभ और ग्रहण पूर्ण होने पर भी करें स्नान
- ग्रहण के मोक्ष के बाद गरीबों को अन्न, तिल, गुड़, तेल खिचड़ी और वस्त्र का दान करना चाहिए
विस्तार
रविवार को पड़ने वाले सूर्य ग्रहण का दुर्लभ नजारा हर किसी के लिए खास होगा। सुबह 9:16 बजे से आरंभ होने वाले ग्रहण को संगमनगरी में 83 प्रतिशत तक देखा जा सकेगा। ग्रहण का सूतक शनिवार रात ही लग गया है। इसके बाद मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए, जो ग्रहण के मोक्षकाल तक बंद रहेंगे। सबसे अहम बात यह कि इस सूर्यग्रहण पर छह ग्रह वक्री होंगे।
सूतक लगते ही शनिवार की रात 10:30 बजे मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। इसी के साथ रविवार को ग्रहण के मोक्षकाल तक मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। संगम स्थित बड़े हनुमान, मां अलोपशंकरी, मां कल्याणी देवी, मां ललिता देवी, हनुमत निकेतन, न्यायविद् हनुमान, अलौकिक शनिधाम, तक्षकतीर्थ, पड़िला महादेव, सोमेशेवर महादेव, मकामेश्वर, नागवासुकि, वेणी माधव समेत शहर के अन्य मंदिरों के कपाट सविधि पूजन आरती के साथ बंद कर दिए गए।
सूर्य ग्रहण से पहले सूतक काल में सभी शुभ कार्य भी स्थगित कर दिए गए। इसी के साथ भगवान सूर्य के मोक्ष की कामना से मंदिरों, मठों के बाहर और घरों में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए भजन-कीर्तन शुरू कर दिया गया।
रविवार को संगम में स्नान कर मंत्रों का जाप और ईष्ट देव का लोग ध्यान करेंगे। ज्योतिषाचार्य पं ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार सूतक काल में लोगों को अन्न जल नहीं ग्रहण करना चाहिए और न ही देव मूर्तियों को स्पर्श करना चाहिए। हालांकि बालक, वृद्ध और रोगी के लिए यह प्रतिबंध नहीं है।
ग्रहण काल
- सूर्य ग्रहण दिन में 9:16 बजे आरंभ हो जाएगा।
- मध्याह्न काल दोपहर 12:10 बजे
- मोक्ष शाम 3:04 बजे होगा।