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प्रयागराजः यमुनापार के किसानों को पानी देने से सिंचाई विभाग ने खड़े किए हाथ

Sat, 27 Jul 2019 12:54 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jul 2019 12:54 AM IST
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Prayagraj: Irrigation Department stand by giving water to farmers of Yamuna Pahar
Prayagraj: Irrigation Department stand by giving water to farmers of Yamuna Pahar
प्रयागराज। उम्मीद से कम बारिश इस बार यमुनापार इलाके के किसानों केलिए भारी पड़ सकती है। मेजा जलाशय का पानी अगले दो दिन में खत्म हो जाएगा। इससे बेलन नहर को पानी नहीं दिया जा सकेगा। बेलन नगर प्रखंड के अधिशासी अभियंता एसके यादव ने औसत से बहुत कम बारिश होने केचलते नहरों को मेजा जलाशय से सिंचाई के लिए पानी देने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
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यमुना पार इलाके में अभी कहीं नर्सरी तैयार हो रही है तो कहीं किसानों ने रोपाई भी शुरू कर दी है। रोपाई उन्हीं किसानों के खेतों में हो रही है, जिन्होंने निजी ट्यूबवेल लगाए हैं। शेष 90 फीसदी किसानों को बारिश के पानी या फिर बेलन नहर का ही इंतजार है। धान की रोपाई के लिए शुक्रवार को बेलन नहर में पानी छोड़ा गया लेकिन, कब पंप बंद कर दिया जाएगा, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। इस बार के हालात कुछ उलट हो गए हैं। जुलाई बीतने को है लेकिन अभी तक नौ हजार मिलियन क्यूबिक फीट क्षमता वाले मेजा जलाशय में पानी अभी नाम मात्र का ही भंडारित हो सका है।
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सिंचाई विभाग के अभियंताओं का कहना है कि अगर तेज बारिश नहीं हुई तो अगल दो दिन के बाद मेजा जलाशय से बेलन नहर को पानी नहीं दिया जा सकेगा। बेलन नहर प्रखंड के एक्सईएन एसके यादव ने इस आशय की जानकारी डीएम को भी दी है। साथ ही किसानों को भी बता दिया गया है कि वर्षा कम होने के कारण मेजा जलाशय में कम पानी संचित हो सका है। इस वजह से धान की खेती की सिंचाई के लिए मेजा जलाशय में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। उल्लेखनीय है कि यमुनापार इलाकेकी 40 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई मेजा जलाशय पर ही आधारित है। इस बार जलाशय में पानी न होने से लाखों किसानोें की धान की खेती प्रभावित होने की आशंका है।
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9,000 मिलियन क्यूबिक फीट क्षमता है मेजा जलाशय की
40 हजार हेक्टेयर यमुनापार की कृषि भूमि की सिंचाई पर पड़ेगा असर
02 दिन बाद मेजा जलाशय से बेलन नहर को नहीं दिया जा सकेगा पानी
90 फीसदी किसान बारिश या फिर नहर के पानी पर हैं आश्रित
अभी जितनी बारिश हुई है उससे जलाशय में इतना पानी नहीं है कि धान की नर्सरी डालने के लिए भी किसानों को पानी दिया जा सके। सिंचाई के लिए नहर चलाना तो दूर की बात है। फिलहाल इस संबंध में जिला प्रशासन को जानकारी दे दी गई है। एसके यादव, अधिशासी अभियंता, बेलन नहर प्रखंड।
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