प्रयागराज जिला पंचायत चुनाव : क्रॉस वोटिंग ने ध्वस्त कर दिया सपा का चक्रव्यूह
- गफलत में रहे नेता, विधायकों के साथ पहुंचे सदस्यों ने भी डॉ. वीके सिंह के पक्ष में किया मतदान
विस्तार
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में क्रॉस वोटिंग ने सपा का खेल बिगाड़ दिया। नेता गफलत में ही रह गए और सदस्यों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया। उन्हें अपने पक्ष में बनाए रखने के लिए सपा ने चक्रव्यूह की रचना की थी, लेकिन भाजपा नेता उसे तोड़ने में सफल रहे। यहां तक कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ जिला पंचायत भवन तक पहुंचे सदस्यों ने भी सपा समर्थित मालती यादव को वोट नहीं दिए।
भाजपा समर्थित 14 जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए थे। 15 अन्य सदस्यों ने भी भाजपा का दामन थाम लिया था। इस तरह से भाजपा के पास 29 सदस्य थे। वहीं सपा की ओर से 39 सदस्यों की जीत के दावे किए गए थे। हालांकि , सपा ने चुनाव से पहले प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं की थी। इसके बाद अध्यक्ष पद का चुनाव नजदीक आते-आते सपा की ओर से 61 सदस्यों के दावे किए जाते रहे। मतदान के दिन तक सपा जीत के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त थी।
करछना से एक बस में तीन दर्जन से अधिक सदस्यों को पंचायत भवन तक लाया गया। इनके अलावा यह भी दावा किया गया कि राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह के साथ तीन सदस्य हैं। इनके अलावा पांच अन्य सदस्य भी एक वरिष्ठ नेता के साथ पहुंचे। इनमें से 37 सदस्य तो एमएलसी डॉ. मान सिंह, रामवृक्ष यादव, जिलाध्यक्ष योगेश चंद्र यादव, महानगर अध्यक्ष सै.इफ्तेखार हुसैन के साथ मतदान स्थल तक पहुंचे। सदस्यों के पंचायत भवन में प्रवेश करने के बाद ही सपा के चारों नेता वहां से हटे।
इतना ही नहीं दो सदस्यों के साथ मालती यादव पहले से ही मतदान स्थल पर मौजूद रहीं। इस तरह से सपाई 48 वोट तो सुनिश्चित मानकर चल रहे थे। यानी, बहुमत के लिए जरूरी 43 मतों से कहीं अधिक वोट थे, लेकिन भाजपा की रणनीति से सपा का चक्रव्यूह ध्वस्त हो गया। सपा के चारों नेताओं के साथ मतदान स्थल तक पहुंचे सभी सदस्यों ने भी मालती यादव को वोट दे दिए और सपा समर्थित उम्मीदवार को सिर्फ 33 मत प्राप्त हुए। वहीं भाजपा समर्थित डॉ.वीके सिंह का 51 सदस्यों ने समर्थन किया।
यादव बिरादरी के सदस्यों ने भी तोड़ा भरोसा
कुल 84 में से 27 जिला पंचायत सदस्य यादव बिरादरी के हैं। सपा नेता मानकर चल रहे थे कि ये सभी सदस्य सपा समर्थित उम्मीदवार को वोट देंगे। इसीलिए सपा की ओर से मालती यादव के समर्थन की घोषणा की गई थी, लेकिन पार्टी को यहां भी झटका लगा। यादव बिरादरी के चार सदस्य तो भाजपा उम्मीदवार का समर्थन कर रहीं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा सिंह के साथ वोट देने के लिए पहुंचे।
दो पूर्व अध्यक्षों की रणनीति से पार नहीं पा सके रेवती रमण और मान सिंह
दो पूर्व जिला पंचायत अध्यक्षों का लंबा अनुभव एवं उनकी रणनीति भाजपा समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में गई। सपा के वरिष्ठ नेता रेवती रमण सिंह एवं एमएलसी डॉ. मान सिंह की रणनीति इनसे पार नहीं पा सकी। सपा समर्थित मालती यादव के चुनाव की कमान राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह और एमएलसी डॉ.मान सिंह ने संभाल रखी थी। उनकी हर सदस्य पर नजर रही। साथ में खड़े जिला पंचायत सदस्य भाजपा नेताओं के संपर्क न आ सकें, इसके लिए पार्टी की ओर से पूरा चक्रव्यूह रचा गया। 54 सदस्यों को तो जिले से बाहर भेजे जाने की बात कही जा रही थी।
इनमें से कई सदस्यों के प्रमाणपत्र भी रखवा लिए गए थे, लेकिन 25 वर्षों तक इस चुनाव का केंद्र बिंदु रहीं पूर्व अध्यक्ष केशरी देवी पटेल और रेखा सिंह सपा नेताओं की रणनीति की काट निकालने में सफल रहीं। आखिरी समय तक सपा नेताओं को गलतफहमी रही कि समर्थक सदस्यों से भाजपा नेताओं का संपर्क नहीं हो पा रहा है। सपा की ओर से लगातार शिकायत भी की जाती रही कि सदस्यों से संपर्क साधने के लिए भाजपा नेता पुलिस की मदद से परिजनों पर दबाव बना रहे हैं, जबकि दूसरे जिलों में भेजे गए सदस्य भाजपा नेताओं के संपर्क में पहले ही आ चुके थे।
रणनीति के तहत ही यह भ्रम फैलाया गया कि सदस्य भाजपा के संपर्क में नहीं आ पा रहे। कोई चूक न होने पाए इसके लिए हर सदस्य से संपर्क रखने की जिम्मेदारी अलग-अलग नेताओं को दी गई थी। चूंकि ज्यादातर जिला पंचायत सदस्य पूर्व में भी निर्वाचित हो चुके हैं या उनके परिवार से हैं। ऐसे में केशरी देवी पटेल और रेखा सिंह के पास ज्यादातर जिला पंचायत सदस्यों की कुंडली पहले से मौजूद रही, जिसका फायदा पार्टी को हुआ। इसके अलावा भाजपा की ओर से भी कई सदस्यों को बाहर भेजा गया था। ताकि, वे सपा नेताओं के संपर्क में न आने पाएं। भाजपा अपनी इस रणनीति में सफल भी रही।
भाजपा नेता आश्वस्त थे कि मिलेंगे 50 से अधिक मत
भाजपा नेता डॉ. वीके सिंह की जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त थे। वे यह भी सुनिश्चित कर चुके थे कि भाजपा समर्थित उम्मीदवार को 50 से अधिक वोट मिलेंगे। मतदान से पहले एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि 55 सदस्यों से संपर्क हो चुका है। इनमें से 50 से अधिक सदस्य डॉ. वीके सिंह के समर्थन में मतदान करेंगे।
साप्ताहिक बंदी, कोविड प्रोटोकाल का नहीं दिखा असर
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान साप्ताहिक बंदी और कोविड गाइडलाइन की खुलेआम धज्जियां उड़ाईं गईं। पंचायत भवन से कलक्ट्रेट, म्योहाल चौराहे से मनमोहन पार्क और म्योहाल से ट्रैफिक चौराहा तक सड़क के दोनों तरफ कतार से वाहन खड़े थे। आनंद अस्पताल, म्योहाल आदि स्थानों पर सैकड़ों समर्थक मौजूद रहे। इनमें से ज्यादातर ने मास्क भी नहीं लगा रखा था। इतना ही नहीं बालसन चौराहा समेत अन्य स्थानों से समर्थक जुलूस बनाकर जिला पंचायत भवन तक पहुंचे।
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में मतदान और मतगणना के दौरान डीएम संजय कुमार खत्री, एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी और प्रेक्षक अनिल कुमार जिला पंचायत भवन परिसर में मौजूद रहे। तीनों अफसर सुबह साढ़े नौ बजे ही मतदान स्थल पर पहुंच गए थे और परिणाम की घोषणा तक तक डटे रहे। इनके अलावा मतदान के दौरान दोनों तरफ से दो-दो सदस्य भी मौजूद रहे। मतगणना के दौरान दोनों पक्ष से पांच से अधिक सदस्य मौजूद रहे।
केशरी देवी की पहली बार नहीं रही सीधी भागीदारी
जिला पंचायत अध्यक्ष का यह पहला चुनाव है, जिसमें सांसद केशरी देवी पटेल की सीधी भागीदारी नहीं रही। हालांकि भाजपा समर्थित उम्मीदवार की जीत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए पहला चुनाव 1995 में पहला हुआ था। इससे पहले जिला परिषद हुआ करती थी। पहले चुनाव में विश्राम दास अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। वहीं केशरी देवी पटेल उपाध्यक्ष चुनी गईं थीं।
1999 में विश्राम दास को अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद केशरी देवी एक साल के लिए अध्यक्ष रहीं। वहीं 2000 में हुए चुनाव में वह अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। उन्होंने सपा की उमा यादव को हराया था। इसके बाद 2005 से केशरी देवी और पूर्व अध्यक्ष रेखा सिंह के बीच मुकाबला होता रहा। यह मुकाबला 2015 तक चला। इसके बाद भी केशरी देवी रेखा सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाईं थीं। सूबे में सरकार बदलने के साथ अध्यक्ष की कुर्सी भी इन दोनों नेताओं के पाले में आती रही। अब दोनों नेता भाजपा में हैं और यह पहला मौका है जब केशरी देवी या उनके परिवार से कोई भी व्यक्ति जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित नहीं हुआ है। हालांकि रेखा सिंह इस बार भी सदस्य निर्वाचित हुई हैं।