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विकास कार्यों पर लगा राजनीतिक ग्रहण

Sun, 02 Oct 2016 02:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 02 Oct 2016 02:38 AM IST
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Political eclipse was on development
दोनों प्रापर्टी आईडी और नक्शे अलग-अलग नाम से जारी किये गये - फोटो : demo pic
इलाहाबाद(ब्यूरो)। नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते ही विकास कार्यों पर राजनीतिक ग्रहण लग गया। 14वें वित्त और अवस्थापना निधि से जुड़े कार्यों पर कमिश्नर ने सख्त रुख अपनाया तो मेयर के नेतृत्व में पार्षदों ने भी कमिश्नर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। तमाम दबाव के बावजूद अवस्थापना निधि से वार्डवार पैसा आवंटन की मंजूरी नहीं मिली, अब कमिश्नर को विकास कार्यों में रोड़ा बताते हुए नगर निगम सदन ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की खींचतान में विकास कार्य विवाद में फंस गए हैं।
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कमिश्नर राजन शुक्ला का कहना है कि अवस्थापना निधि से होने वाले विकास कार्यों पर निर्णय लेने का अधिकार उनकी अध्यक्षता वाली समिति के पास है। यह व्यवस्था शासन ने लागू कर रखी है। समिति विकास कार्यों पर निर्णय लेने के लिए सक्षम है और आवश्यकता के अनुसार कार्य कराए जा रहे हैं। दूसरी ओर महापौर और पार्षद चाह रहे हैं कि विकास कार्यों का आवंटन वार्डवार बराबरी से किया जाए। हालांकि अन्य योजनाओं के तहत कई वार्डों में काफी विकास कार्य कराए जा चुके हैं जबकि कुछ वार्डों में बिल्कुल काम नहीं हुआ है। प्रशासनिक समिति इसी का हवाला देकर उन वार्डों में प्राथमिकता के आधार पर काम करना चाहती है, जहां विकास कार्य बिल्कुल नहीं हुए हैं। 
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तीन दिन पहले कमिश्नर राजन शुक्ला ने इसी को आधार बनाते हुए नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। साथ ही इस बात का भी खुलासा किया कि निगम ने बिना बजट के कई काम करा डाले और ठेकेदारों को भुगतान नहीं किया। मामला शासन में लंबित है। कमिश्नर ने निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए तो पार्षदों और महापौर ने उनके खिलाफ निगम सदन में निंदा प्रस्ताव पारित कर डाला। दरअसल, यह पूरी कवायद आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर की जा रही है। इससे पहले भी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली समिति ही अवस्थापना निधि से कराए जाने वाले विकास कार्यों पर निर्णय लेती रही है। इस बार जनप्रतिनिधियों को जनता के सामने जवाब देना है, सो वे किसी भी कीमत पर काम चाहते हैं। निंदा प्रस्ताव पर कमिश्नर का कहना है कि इस मसले पर टिप्पणी नहीं करेंगे। यह सदन का फैसला है। उन्हें जो कुछ कहना था, तीन दिन पहले प्रेस कांफ्रेंस में बोल चुके हैं।
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