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कौन थीं पहली महिला वकील कॉर्नेलिया?: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1921 में अपनाया, ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई; 20 साल संघर्ष

Tue, 25 Aug 2026 02:14 PM IST
अनुज कुमार शशांक वर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
शशांक वर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: अनुज कुमार Updated Tue, 25 Aug 2026 02:14 PM IST
सार

Who Was Cornelia Sorabji: कॉर्नेलिया सोराबजी भारत की पहली महिला वकील थीं, जिन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1921 में प्रवेश दिया। ऑक्सफोर्ड से कानून की पढ़ाई करने वाली वह दुनिया की पहली भारतीय महिला थीं। 

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Cornelia Sorabji became India first female lawyer After 20-year struggle
कॉर्नेलिया सोराबजी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हजार बाधाओं को पार कर आगे बढ़ीं कॉर्नेलिया सोराबजी भारत की पहली वकील हैं, जिन्हें 19021 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रवेश दिया। खास यह कि करीब 20-22 वर्षों तक तत्कालीन अंग्रेजी कोर्ट उन्हें वकील बनने से यह कह कर रोकता रहा कि वह एक महिला हैं, जिसका कानून से क्या लेना-देना। ऐसी शख्सियत की तस्वीर से इलाहाबाद हाईकोर्ट का विधि संग्रहालय रोशन है। न्यायिक दस्तावेज सुर्ख हैं।

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ऑक्सफोर्ड से कानून की पढ़ाई करने वाली दुनिया की पहली महिला
नासिक में जन्मीं कॉर्नेलिया ऑक्सफोर्ड से कानून की पढ़ाई करने वाली दुनिया की पहली महिला थीं। भारत की पहली लॉ ग्रेजुएट थीं, लेकिन उनका पेशेवर जीवन संघर्षों की तपती दोपहरी रहा। बॉम्बे हाईकोर्ट ने जब महिला होने का हवाला देकर वकालत के लिए उनका आवेदन निरस्त कर दिया तो 1899 में इलाहाबाद हाईकोर्ट आईं। यहां प्लीडर की परीक्षा पास की, जिसके बाद वह भारत के किसी भी कोर्ट में वकील के रूप में पैरवी कर सकती थीं। इसके बाद भी उनका नामांकन नहीं किया गया।

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महिला होने के कारण ठुकराई गईं
कलकत्ता हाईकोर्ट में भेदभाव की शिकार हुईं, तल्ख टिप्पणियां सुनीं। मुख्य लाइब्रेरी में वह नहीं जा सकती थीं, अलग जगह दी गई। पढ़ने के लिए कुछ ही किताबें दी जाती थीं। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी, लड़ती ही रहीं। अंतत: अगस्त 1921 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ससम्मान बतौर वकील उनका पंजीकरण किया। अधिवक्ता रूपाली गुप्ता ने अपने लेख (कॉर्नेलिया सोराबजी : इंडियाज फर्स्ट लेडी एडवोकेट) में इसका उल्लेख किया है।

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'जानती नहीं हो तुम किसके सामने खड़ी हो'
वर्ष 1904 में ब्रिटिश शासन ने कॉर्नेलिया को बंगाल, बिहार, उड़ीसा (अब ओडिशा) और असम में कोर्टस ऑफ वार्ड्स की लीगल एडवाइजर नियुक्त किया, जिसका काम महिलाओं और अनाथों को कानूनी सहायता देना था। रियासतों से संबंधी अदालतों में जब पैरवी करने का मौका मिला तो भी उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की गई। एक बार एक नामचीन भारतीय वकील ने उनसे कहा कि तुम जानती भी हो कि किसके सामने खड़ी हो...।

मैडम, कोर्ट आपका ड्राइंगरूम नहीं...
कॉर्नेलिया की बायोग्राफी लिखने वाली सुपर्ना गूप्तू लिखती हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक बार कॉर्नेलिया के सामने देश के बड़े वकील थे, जिन्होंने उनकी ड्राफ्टिंग को तथ्यहीन काव्यात्मक लेख बताते हुए मजाक उड़ाया। उनकी टिप्पणी को कॉर्नेलिया ने पेशेवर व्यवहार के विरुद्ध बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई तो उन्होंने कहा कि मैडम यह कोर्ट है, आपका ड्राइंगरूम नहीं, शिष्टाचार के लिए मत रोइए।

कोर्ट ऑफ वार्ड में मैडम कॉर्नेलिया सोराबजी का कोई सानी नहीं है। हालांकि, उन्होंने अदालतों में जिन व्यवधानों का सामना किया, आज भी महिला वकील उन दिक्कतों से रूबरू हो रही हैं।- अशोक मेहता, अपर महाधिवक्ता एवं पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भारत सरकार
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