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पुलिस, पीएसी भर्ती 2019: दोबारा अवसर देने के मामले में हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी

Tue, 03 Aug 2021 08:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 03 Aug 2021 08:01 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व पुलिस भर्ती बोर्ड से पूछा,  लॉकडाउन में मेडिकल जांच न करा पाने वालों के लिए क्या है सरकार की नीति

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Police, PAC Recruitment 2019: High Court sought information in the matter of giving re-opportunities
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व पुलिस भर्ती बोर्ड से पूछा है कि कोविड 19 व लॉकडाउन के कारण पुलिस, पीएसी भर्ती की मेडिकल जांच न करा पाने वाले सफल अभ्यर्थियों के बारे में क्या नीति तय की है। क्या लॉकडाउन में फंसे अभ्यर्थियों की बाद में मेडिकल जांच कराने का कोई उपबंध है। कोर्ट ने इसकी जानकारी 16 अगस्त को मांगी है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने उन्नाव के श्यामू कुमार की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि उसे पुलिस, पीएसी भर्ती परीक्षा 2019 व शारीरिक टेस्ट में सफल घोषित किया गया। मेडिकल जांच के लिए 10 सितंबर 20 को डीआईजी कानपुर नगर द्वारा बुलाया गया। उस समय वह मुंबई में था। देश में लॉकडाउन के कारण जांच के लिए पहुंच पाना मुश्किल था। एसपी जालौन ने याची की अभ्यर्थिता निरस्त कर दी तो कठिनाइयों की जानकारी के साथ पुनर्विचार के लिए प्रत्यावेदन भेजा, जिस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। डीआईजी प्रशासन लखनऊ ने अधिसूचना जारी की है, जिसमें 17360 सफल अभ्यर्थियों को मेडिकल जांच के लिए 8 मार्च को बुलाया था और सफल होने के बावजूद याची को अवसर नहीं दिया जा रहा है।

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शिक्षा सत्र परिवर्तन पर सत्र लाभ के बकाया वेतन भुगतान का निर्देश

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीनियर बेसिक स्कूल, टीकर, जालौन के सेवानिवृत्त सहायक अध्यापक को शिक्षा सत्र बदलाव से मिले सत्र लाभ के बकाया वेतन के भुगतान करने का निर्देश दिया है।

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कोर्ट ने कहा है कि याची 30 जून 15 से दोबारा कार्यभार ग्रहण करने की तिथि 22 अक्तूबर 15 तक का अंगद यादव केस के फैसले के आलोक में बकाया वेतन पाने का हकदार है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने घनश्याम विश्वकर्मा की याचिका पर दिया है। याची को जून 15 में सेवानिवृत्त होना था। सरकार ने शिक्षा सत्र में बदलाव किया। जुलाई से सत्र शुरू होने के बजाय अप्रैल से शुरू करने की घोषणा की गई। नियमानुसार अध्यापक यदि सत्र के बीच में सेवानिवृत्त हो रहा है तो छात्रों की पढ़ाई का नुकसान बचाने के लिए सत्रांत तक सेवा जारी रखने का प्रावधान है। सत्र बदलने से जो अध्यापक जून में सेवानिवृत्त हो रहे थे, उन्होंने नए सत्र का लाभ दिए जाने की मांग की। हाईकोर्ट ने अंगद यादव केस में कहा ज्वाइन कराते और सत्रांत तक कार्य करने दें।

याची को भी अक्तूबर में दोबारा ज्वाइन कराया गया, किंतु काम नहीं तो वेतन नहीं के सिद्धांत पर जून से अक्तूबर 15 तक का वेतन नहीं दिया गया। कोर्ट ने कहा कि सत्र बदलने में याची की कोई भूमिका नहीं है। अंगद यादव केस के फैसले के तहत बकाया वेतन दिया जाए।

परीक्षा में सफल अभ्यर्थी का चयन न करने पर जवाब तलब

हाईकोर्ट 24 अगस्त तक मांगी जानकारी

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि राज्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के अनुदेशक पद पर सफल याची को अंतिम चयन सूची में शामिल क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने 24 अगस्त तक सरकार से जानकारी मांगी है।

यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने प्रयागराज के कुमार किशोर की याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि वर्कशाप कैलकुलेशन एंड साइंस, इंजीनियरिंग ड्राइंग, ड्राफ्टमैन, पेंटर, सर्वेयर, प्लंबर आदि की योग्यता वाले अनुदेशकों की भर्ती परीक्षा में याची सफल हुआ। उसे साक्षात्कार के लिए बुलाया गया और लखनऊ में साक्षात्कार में शामिल हुआ। जब चयन सूची जारी की गई तो उसका नाम नहीं था। साक्षात्कार व शैक्षिक योग्यता के लिए अलग से अंक नहीं दिए गए। परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को चयनित किया गया।



सफल होने के बावजूद उसका चयन नहीं किया गया। याची ने प्रत्यावेदन भेजा, आरटीआई के तहत सूचना मांगी, कोई जवाब नहीं दिया गया। मुख्यमंत्री को भी लिखा। सुनवाई न होने पर याचिका दायर की है। याची का कहना है कि जब वह परीक्षा में सफल है तो उसे नियुक्ति पाने का हक है।

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