High Court : पीठासीन अधिकारी पर बेबुनियादी आरोप लगाने पर पांच हजार रुपये जुर्माना के साथ याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पीठासीन अधिकारी पर लगाए गए आरोप आधारहीन और बिना किसी ठोस प्रमाण के हैं। ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे यह कहा जाए कि पीठासीन अधिकारी पक्षपाती हैं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पीठासीन अधिकारी पर लगाए गए आरोप आधारहीन और बिना किसी ठोस प्रमाण के हैं। ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे यह कहा जाए कि पीठासीन अधिकारी पक्षपाती हैं। मामले की सुनवाई में विलंब होता है तो वह चिंता का विषय हो सकता है, किंतु यह पक्षपात का प्रमाण नहीं है। पीठासीन अधिकारी और प्रतिवादी के बीच मिलीभगत का आरोप आपराधिक अवमानना की सीमा को छूता है। ऐसे आरोप स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार का उपयोग नहीं, बल्कि अनुशासनहीनता और मर्यादाहीनता का प्रदर्शन हैं, जो एक सभ्य समाज के लिए अनुपयुक्त हैं।
यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की पीठ ने पांच हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए याचिका खारिज दी। बरेली निवासी याचिकाकर्ता जय सिंह ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के अंतर्गत संशोधन संख्या 791/2021 (गणेशनुज दास बनाम गोपाल राम एवं अन्य) को अपर आयुक्त (न्यायिक) तृतीय, बरेली की अदालत से किसी अन्य सक्षम न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की थी। यह स्थानांतरण आवेदन राजस्व बोर्ड ने अस्वीकार कर दिया गया। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि परिषद का आदेश कारण रहित और अत्यंत संक्षिप्त है। पीठासीन अधिकारी ने 25 मई 2023 की एक प्रार्थना-पत्र को न सुनकर सीधे अंतिम सुनवाई के लिए तारीख नियत कर दी, जो पक्षपातपूर्ण आचरण को दर्शाता है। प्रतिवादी संख्या 4 (गणेशनुज दास) और पीठासीन अधिकारी के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया। कोर्ट ने आरोपों को बेबुनियाद और आधारहीन बताते हुए पांच हजार रुपये जुर्माने के साथ याचिका खारिज दी। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि यह आदेश सिविल जज (सीनियर डिवीजन), बरेली के माध्यम से अपर आयुक्त (न्यायिक) तृतीय, बरेली को भेजा जाए।