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ईस्टर पर पादरियों ने की ऑनलाइन प्रार्थना
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ईस्टर पर रविवार को मसीही समुदाय के घर-घर में प्रभु यीशु के पुनर्जन्म की खुशियां साझा की गईं। कोरोना वायरस के संक्रमण के डर से गिरजाघरों में सामूहिक प्रार्थनाएं स्थगित कर दी गईं। जबकि फेसबुक पर पादरी लाइव हुए और ऑनलाइन सर्विस की गई। घरों में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए प्रभु यीशु के पुर्नजन्म पर क्रोध, परनिंदा, झूठ के परित्याग का संकल्प लिया गया। बिशप राफी मंजली ने कहा कि अंधकार रूपी बुराइयों को जड़ से मिटाने का यह दिन है। हमें इस मौके पर कोरोना वायरस रूपी महामारी से लड़ने के लिए एकजुट होना चाहिए। प्रभु यीसु को सूली पर लटकाए जाने के बाद भी पूरी दुनिया में अंधकार छा गया था।
रविवार को मसीही समुदाय के प्रमुख पर्व ईस्टर पर भी गिरजाघरों के ताले नहीं खुले। न सामूहिक पूजा हुई न दीप जलाए गए। अलबत्ता घर-घर में प्रार्थनाएं की गईं। म्योराबाद कॉलोनी स्थित सेंट पीटर्स चर्च के पादरी प्रवीण मैसी ने ऑनलाइन सर्विस की। इस कॉलोनी की नीलम ईसुबियस ने बताया कि इस बार लॉकडाउन की वजह से चर्च में सर्विस नहीं हो सकी। भोर में ही घरों में कैंडिल जलाई गई। इसके बाद पादरी ने फेसबुक लाइव सर्विस शुरू की, जिसमें हम लोगों ने घर बैठे हिस्सा लिया। इसी तरह पत्थर गिरजाघर, सेंट जोसेफ चर्च, कम्युनिटी चर्च, जमुना चर्च में भी ऑन लाइन सर्विस की गई। सेंट जोसेफ चर्च के फादर स्टीफन ने बताया कि यह दिन प्रभु यीशु के पुनर्जन्म का है। ऐसे में हम सबको अपने आसपास के अंधेरे को दूर करने का संकल्प लेना चाहिए। प्रभु यीशु की मृत्यु के समय उनके शिष्यों के दिलों में भी अंधेरा छाया था। भय का अंधेरा, निराशा का अंधेरा, दिशाहीनता का अंधेरा। ठीक उसी तरह कोरोना महामारी के दौर में सर्वत्र अंधेरा छाया हुआ है। इस अंधेरे को दूर करने के लिए हमें संयम और संकल्प का परिचय देना चाहिए। फादर स्टीफन मनोज ने भी ऑनलाइन सर्विस की।
प्यारे भाइयों और बहनों। आपको और मुझे, अपने जीवन में इस बात की गवाही देनी चाहिए कि प्रभु यीशु सचमुच जी उठे हैं। अगर हम अपने पुराने स्वभाव को और अपने जीवन की त्रुटियों को दूर कर नया स्वभाव धारण करेंगे तो लोग जान जाऐंगे कि प्रभु जीवित हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो यदि हम क्रोध, अशुद्धता, परनिंदा, झूठ बोलना इत्यादि को छोड़कर अनुकंपा, सहनशीलता, क्षमा, आपसी प्रेम इत्यादि को धारण करेंगे तो दुनिया जान जाएगी कि प्रभु यीसु जिंदा है।
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- बिशप राफी मंजली, प्रयागराज धर्मप्रांत
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रविवार को मसीही समुदाय के प्रमुख पर्व ईस्टर पर भी गिरजाघरों के ताले नहीं खुले। न सामूहिक पूजा हुई न दीप जलाए गए। अलबत्ता घर-घर में प्रार्थनाएं की गईं। म्योराबाद कॉलोनी स्थित सेंट पीटर्स चर्च के पादरी प्रवीण मैसी ने ऑनलाइन सर्विस की। इस कॉलोनी की नीलम ईसुबियस ने बताया कि इस बार लॉकडाउन की वजह से चर्च में सर्विस नहीं हो सकी। भोर में ही घरों में कैंडिल जलाई गई। इसके बाद पादरी ने फेसबुक लाइव सर्विस शुरू की, जिसमें हम लोगों ने घर बैठे हिस्सा लिया। इसी तरह पत्थर गिरजाघर, सेंट जोसेफ चर्च, कम्युनिटी चर्च, जमुना चर्च में भी ऑन लाइन सर्विस की गई। सेंट जोसेफ चर्च के फादर स्टीफन ने बताया कि यह दिन प्रभु यीशु के पुनर्जन्म का है। ऐसे में हम सबको अपने आसपास के अंधेरे को दूर करने का संकल्प लेना चाहिए। प्रभु यीशु की मृत्यु के समय उनके शिष्यों के दिलों में भी अंधेरा छाया था। भय का अंधेरा, निराशा का अंधेरा, दिशाहीनता का अंधेरा। ठीक उसी तरह कोरोना महामारी के दौर में सर्वत्र अंधेरा छाया हुआ है। इस अंधेरे को दूर करने के लिए हमें संयम और संकल्प का परिचय देना चाहिए। फादर स्टीफन मनोज ने भी ऑनलाइन सर्विस की।
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प्यारे भाइयों और बहनों। आपको और मुझे, अपने जीवन में इस बात की गवाही देनी चाहिए कि प्रभु यीशु सचमुच जी उठे हैं। अगर हम अपने पुराने स्वभाव को और अपने जीवन की त्रुटियों को दूर कर नया स्वभाव धारण करेंगे तो लोग जान जाऐंगे कि प्रभु जीवित हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो यदि हम क्रोध, अशुद्धता, परनिंदा, झूठ बोलना इत्यादि को छोड़कर अनुकंपा, सहनशीलता, क्षमा, आपसी प्रेम इत्यादि को धारण करेंगे तो दुनिया जान जाएगी कि प्रभु यीसु जिंदा है।
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- बिशप राफी मंजली, प्रयागराज धर्मप्रांत