{"_id":"6738719415e8b201dc0dc72a","slug":"passing-order-without-recording-reason-is-violation-of-justice-order-of-eviction-from-land-canceled-2024-11-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट : बिना कारण दर्ज किए आदेश पारित करना न्याय का उल्लंघन, भूमि से बेदखल करने का आदेश रद्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट : बिना कारण दर्ज किए आदेश पारित करना न्याय का उल्लंघन, भूमि से बेदखल करने का आदेश रद्द
Sat, 16 Nov 2024 03:49 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 16 Nov 2024 03:49 PM IST
सार
तहसीलदार ने 29 जनवरी 2024 को याची को विवादित जमीन से बेदखल करने का आदेश पारित किया था। कहा कि याची ने ग्रामसभा की भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। एक लाख 20 हजार चार सौ 88 रुपये हर्जाना भी लगाया गया। इस आदेश में कोई कारण दर्ज नहीं किया गया था। ऐसे में याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, बिना कारण दर्ज किए आदेश पारित करना प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन है। यह टिप्पणी कर न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर तहसीलदार का विवादित भूमि से याची को बेदखल करने का आदेश रद्द कर दिया। कहा कि पक्षों को सुनने के बाद चार माह में नया आदेश पारित करें।
विज्ञापन
तहसीलदार ने 29 जनवरी 2024 को याची को विवादित जमीन से बेदखल करने का आदेश पारित किया था। कहा कि याची ने ग्रामसभा की भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। एक लाख 20 हजार चार सौ 88 रुपये हर्जाना भी लगाया गया। इस आदेश में कोई कारण दर्ज नहीं किया गया था। ऐसे में याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
विज्ञापन
याची के वकील राकेश त्रिपाठी ने दलील दी कि तहसीलदार की ओर से बिना कोई कारण दर्ज किए आदेश पारित किया गया है। हर्जाना क्यों लगाया है, इसका भी कोई कारण दर्ज नहीं किया गया है। न्यायालय के आदेश का हवाला दिया कि कोई भी आदेश बिना कारण दर्ज किए जारी नहीं किए जाएंगे।
विज्ञापन