हरिद्वार, कानपुर और नरौरा के बैराज से कई लाख क्यूसेक बाढ़ का पानी छोड़े जाने से झूंसी के कछारी गांव के ग्रामीणों की नींद उड़ गई है। कछार के आधा दर्जन से ज्यादा गांव बृहस्पतिवार की शाम बाढ़ की चपेट में आ गए। शुक्रवार की शाम तक बाढ़ के पानी के बढ़ने का क्रम लगातार जारी रहा। इससे आधा दर्जन से ज्यादा कछारी गांव का संपर्क टूट गया है। जलस्तर के बढ़ने से इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही भी ठप्प पड़ गई है। ग्रामीणों के आवागमन के लिए प्रशासन की ओर से दो नाव की व्यवस्था की गई है। बाढ़ की चपेट में आने से सैकड़ों बीघे फसल भी बर्बाद हो गई है।
2 of 5
prayagraj news : तेजी से बढ़ रहा है गंगा-यमुना का जलस्तर।
- फोटो : prayagraj
तीन दिन पहले कानपुर, हरिद्वार और नरौरा के बांध और बैराज से कई लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से गंगा और यमुना ने बृहस्पतिवार कोर रौद्र रूप ले लिया। गंगा-यमुना के बढ़े जलस्तर के कारण प्रभावित इलाकों के ग्रामीणों की मुसीबत बढ़ गई है। शुक्रवार की शाम तक गंगा-यमुना के बढ़ रहे जलस्तर ने और रफ्तार पकड़ ली। देखते ही देखते देर रात तक बाढ़ का पानी झूंसी के कछारी गांवों में दाखिल हो गया। इससे गंगा तट के आसपास की बस्ती बाढ़ के पानी में समा गई। साथ ही बदरा-सोनौटी मार्ग भी बाढ़ की चपेट में आ गया।
3 of 5
prayagraj news : तेजी से बढ़ रहा है गंगा-यमुना का जलस्तर।
- फोटो : prayagraj
इससे आधा दर्जन से ज्यादा गांवों का संपर्क टूट गया है। शुक्रवार की रात तक हालात और भयावह होने की आशंका जताई जा रही थी। प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों की सालभर की कमाई भी चौपट हो गई है। बाढ़ के कारण बदरा, सोनौटी, ढोलबजवा, बहादुरपुर, गंजिया, हेतापट्टी, इब्राहिमपुर, खजुरी, मदारपुर, पैगंबरपुर समेत तकरीबन डेढ़ दर्जन गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से टूट गया। ग्रामीणों के आवागमन के लिए शुक्रवार की सुबह प्रशासन की ओर से दो नावों की व्यवस्था की गई थी। गंगा तट से सटे नई तथा पुरानी झूंसी इलाके में भी भारी संकट खड़ा होने से प्रभावित लोग परेशान हैं। लोग अपने मकान के ऊपरी मंजिल में ठिकाना बनाए हुए हैं।
4 of 5
prayagraj news : तेजी से बढ़ रहा है गंगा-यमुना का जलस्तर।
- फोटो : prayagraj
चार साल पहले के बाढ़ जैसा नजारा
तकरीबन चार साल पहले कछारी गांवों और झूंसी के किनारे बसे इलाकों में आए भीषण बाढ़ की स्थिति ग्रामीणों के जेहन में ताजा होने लगी है। अगस्त 2017/18 में दो दफे बाढ़ के पानी ने ग्रामीणों को हैरान कर दिया था। झूंसी में गंगा के किनारे बसे लोग कई दिनों तक अपने घरों में कैद रहने को मजबूर हुए थे। ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरीके से गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है। उससे बाढ़ी की त्रासदी से इंकार नहीं किया जा सकता है।
5 of 5
prayagraj news : तेजी से बढ़ रहा है गंगा-यमुना का जलस्तर।
- फोटो : prayagraj
दाह संस्कार में आ रही दिक्कत
बाढ़ के पानी के कारण नई झूंसी तथा छतनाग घाट पर शवों के अंतिम संस्कार में भारी दिक्कत पैदा हो रही है। नई झूंसी श्मशान घाट पर तो पिछले एक सप्ताह से शवों का अंतिम संस्कार जलस्तर बढऩे से रूक गया है। उधर, छतनाग घाट पर भारी ऊंचाई पर शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। यहां पर बनाया गया बारादरी बाढ़ के पानी में डूबने की कगार पर पहुंच गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जलस्तर थमा नहीं तो आने वाले दिनों में स्थिति भयावह हो सकती है।