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रबर फैक्टरी में मौजूद बाघिन की भी दहशत बढ़ी
Wed, 30 Sep 2020 02:05 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2020 02:05 AM IST
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- फोटो : demo photo
फैक्टरी के जंगल से बाहर निकलकर चहलकदमी करने को माना जा रहा खतरे का संकेत
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लाखों खर्च करके ट्रेंक्युलाइज करने में नहीं मिली कामयाबी
फतेहगंज पश्चिमी। रबर फैक्टरी के जंगल में पिछले कई महीनों से घूम रही बाघिन से भी खतरा अभी टला नहीं है। अक्सर फैक्टरी परिसर के बाहर उसकी चहलकदमी के संकेत मिल रहे हैं। लाखों खर्च करने के बाद भी दूर-दूर से आए विशेषज्ञ उसे ट्रेंक्युलाइज करने में कामयाब नहीं हो सके हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में भी कोई बड़ी घटना हो सकती है।
बंद पड़ी रबर फैक्ट्री के जंगल में एक बाघिन अपने शावकों के साथ पिछले कई महीने से डेरा जमाए हुए है। रबर फैक्टरी के रबर, डिस्टलरी और कोयला प्लांट में बाघिन की सटीक लोकेशन मिलने के बावजूद वन विभाग, दुधवा पार्क, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, कानपुर चिड़ियाघर के विशेषज्ञ उसे पकड़ने में नाकाम साबित हुए। इसी बीच मानसून आया तो जंगल के गड्ढों में पानी भर गया और फिर उसे पकड़ने का ऑपरेशन रोक दिया गया। तब से वन विभाग की टीम बाघिन की लोकेशन तो ट्रेस कर रही है लेकिन उसे ट्रेंक्युलाइज करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है।
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कई बार तो बाघिन एक-एक सप्ताह तक रबर फैक्टरी क्षेत्र में नहीं दिखी। वहीं कई बार रबर फैक्टरी के पीछे अगरास-शंखा रोड पर फैक्टरी गेट के पास उसके पगचिह्न मिलने से साफ है कि वह जंगल के बाहर चहलकदमी कर रही है। इससे जंगल के आसपास के खेतों और गांवों में लगातार खतरा बना हुआ है। लोगों का कहना है कि अगर इस बाघिन को पकड़ा नहीं गया तो वहां भी शीशगढ़ के बुझिया जैसी घटना हो सकती है।
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लाखों खर्च करके ट्रेंक्युलाइज करने में नहीं मिली कामयाबी फतेहगंज पश्चिमी। रबर फैक्टरी के जंगल में पिछले कई महीनों से घूम रही बाघिन से भी खतरा अभी टला नहीं है। अक्सर फैक्टरी परिसर के बाहर उसकी चहलकदमी के संकेत मिल रहे हैं। लाखों खर्च करने के बाद भी दूर-दूर से आए विशेषज्ञ उसे ट्रेंक्युलाइज करने में कामयाब नहीं हो सके हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में भी कोई बड़ी घटना हो सकती है।
बंद पड़ी रबर फैक्ट्री के जंगल में एक बाघिन अपने शावकों के साथ पिछले कई महीने से डेरा जमाए हुए है। रबर फैक्टरी के रबर, डिस्टलरी और कोयला प्लांट में बाघिन की सटीक लोकेशन मिलने के बावजूद वन विभाग, दुधवा पार्क, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, कानपुर चिड़ियाघर के विशेषज्ञ उसे पकड़ने में नाकाम साबित हुए। इसी बीच मानसून आया तो जंगल के गड्ढों में पानी भर गया और फिर उसे पकड़ने का ऑपरेशन रोक दिया गया। तब से वन विभाग की टीम बाघिन की लोकेशन तो ट्रेस कर रही है लेकिन उसे ट्रेंक्युलाइज करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है।
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कई बार तो बाघिन एक-एक सप्ताह तक रबर फैक्टरी क्षेत्र में नहीं दिखी। वहीं कई बार रबर फैक्टरी के पीछे अगरास-शंखा रोड पर फैक्टरी गेट के पास उसके पगचिह्न मिलने से साफ है कि वह जंगल के बाहर चहलकदमी कर रही है। इससे जंगल के आसपास के खेतों और गांवों में लगातार खतरा बना हुआ है। लोगों का कहना है कि अगर इस बाघिन को पकड़ा नहीं गया तो वहां भी शीशगढ़ के बुझिया जैसी घटना हो सकती है।