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MNNIT : एमएनएनआईटी के छात्र एआई तकनीक लैस लाइब्रेरी में कर सकेंगे अध्ययन
Tue, 18 Nov 2025 01:08 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 18 Nov 2025 01:08 PM IST
सार
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं के लिए भी केंद्रीय पुस्तकालय में पढ़ाई करना आसान हो गया। एआई आधारित स्मार्ट चश्मों से युक्त कॉर्नर दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को समर्पित किया गया है।
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एमएनएनआईटी
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं के लिए भी केंद्रीय पुस्तकालय में पढ़ाई करना आसान हो गया। एआई आधारित स्मार्ट चश्मों से युक्त कॉर्नर दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को समर्पित किया गया है। निदेशक प्रो.आरएस वर्मा ने सोमवार को इसका उद्घाटन किया।
संस्थान में 66 विद्यार्थी दृष्टिबाधित हैं। इनमें से करीब 15 छात्र एआई आधारित इस चश्मे का उपयोग कर सकेंगे। इस योजना के प्रमुख डॉ.धीरज आहूजा ने बताया कि एआई आधारित यह चश्मा आधुनिकतम तकनीक से लैस है। यह तकनीकी पुस्तकों, दस्तावेजों और डिजिटल स्क्रीन पर लिखे टेक्स्ट को तुरंत आवाज में परिवर्तित करता है। ऐसे में विद्यार्थी पाठ्य सामग्री को रियल टाइम में सुनकर अध्ययन कर सकते हैं।
डॉ.धीरज ने बताया कि यह तकनीक छात्रों की सीखने की गति, समझने की क्षमता और आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगी। उन्होंने बताया कि स्मार्ट चश्मों के उपयोग के बाद छात्रों को एक विस्तृत प्रश्नावली दी जाएगी, जिसमें वे इसके लाभ, सीमाएं और सुधार संबंधी सुझाव देंगे ताकि खामियों में सुधार किया जा सके।
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कॉर्नर की स्थापना के साथ केंद्रीय पुस्तकालय, एकेडमिक बिल्डिंग, ईडीसी गेस्ट हाउस और मुख्य गंगा गेट पर ऐड योरसेल्फ योजना के अंतर्गत व्हीलचेयर रखवाई गईं, ताकि विद्यार्थियों को तुरंत सहायता मिल सके। इसके अलावा पुस्तकालय में दो विशेष कुशन और स्पाइनल दिव्यांगता से परेशान छात्रों के लिए दो कमर बेल्ट भी उपलब्ध कराई गईं।
इसके बाद निदेशक के अलावा प्रो. रवि प्रकाश तिवारी, प्रो. रमेश पांडेय और प्रो. बसंत सिंह की सक्षम संस्था के पदाधिकारियों के साथ बैठक हुई जिसमें दिव्यांग सेवा केंद्र स्थापित करने पर विचार किया गया। यह केंद्र 21 प्रकार की दिव्यांगताओं से संबंधित समस्याओं की पहचान, सहायक उपकरणों में नवाचार और नए उपकरणों के विकास पर कार्य करेगा। इसी क्रम में सक्षम की ओर से एआई युक्त स्मार्ट उपकरणों का उपयोग सुगम बनाने के लिए पांच मोबाइल फोन प्रदान करने का प्रस्ताव भी रखा गया। इसकी कार्यवाही शीघ्र ही पूरी की जाएगी। इस दौरान चंद्रशेखर, डॉ. कमला कांत पांडेय, रंजन बाजपेई, प्रो. राजेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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संस्थान में 66 विद्यार्थी दृष्टिबाधित हैं। इनमें से करीब 15 छात्र एआई आधारित इस चश्मे का उपयोग कर सकेंगे। इस योजना के प्रमुख डॉ.धीरज आहूजा ने बताया कि एआई आधारित यह चश्मा आधुनिकतम तकनीक से लैस है। यह तकनीकी पुस्तकों, दस्तावेजों और डिजिटल स्क्रीन पर लिखे टेक्स्ट को तुरंत आवाज में परिवर्तित करता है। ऐसे में विद्यार्थी पाठ्य सामग्री को रियल टाइम में सुनकर अध्ययन कर सकते हैं।
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डॉ.धीरज ने बताया कि यह तकनीक छात्रों की सीखने की गति, समझने की क्षमता और आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगी। उन्होंने बताया कि स्मार्ट चश्मों के उपयोग के बाद छात्रों को एक विस्तृत प्रश्नावली दी जाएगी, जिसमें वे इसके लाभ, सीमाएं और सुधार संबंधी सुझाव देंगे ताकि खामियों में सुधार किया जा सके।
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कॉर्नर की स्थापना के साथ केंद्रीय पुस्तकालय, एकेडमिक बिल्डिंग, ईडीसी गेस्ट हाउस और मुख्य गंगा गेट पर ऐड योरसेल्फ योजना के अंतर्गत व्हीलचेयर रखवाई गईं, ताकि विद्यार्थियों को तुरंत सहायता मिल सके। इसके अलावा पुस्तकालय में दो विशेष कुशन और स्पाइनल दिव्यांगता से परेशान छात्रों के लिए दो कमर बेल्ट भी उपलब्ध कराई गईं।
इसके बाद निदेशक के अलावा प्रो. रवि प्रकाश तिवारी, प्रो. रमेश पांडेय और प्रो. बसंत सिंह की सक्षम संस्था के पदाधिकारियों के साथ बैठक हुई जिसमें दिव्यांग सेवा केंद्र स्थापित करने पर विचार किया गया। यह केंद्र 21 प्रकार की दिव्यांगताओं से संबंधित समस्याओं की पहचान, सहायक उपकरणों में नवाचार और नए उपकरणों के विकास पर कार्य करेगा। इसी क्रम में सक्षम की ओर से एआई युक्त स्मार्ट उपकरणों का उपयोग सुगम बनाने के लिए पांच मोबाइल फोन प्रदान करने का प्रस्ताव भी रखा गया। इसकी कार्यवाही शीघ्र ही पूरी की जाएगी। इस दौरान चंद्रशेखर, डॉ. कमला कांत पांडेय, रंजन बाजपेई, प्रो. राजेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।