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मुफ्त की सर्जरी के लिए ले रहे लाखों
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 24 Oct 2016 02:18 AM IST
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केस.1. बेली अस्पताल के न्यू वार्ड में महीने भर से भर्ती सहसों के अशोक पाल पुत्र केसरी पाल ट्रैक्टर से गिरने पर दाहिने पैर में कई जगह चोटें आई है। डॉक्टर ने अब तक तीन बार ऑपरेशन किया है। अशोक की मां और पिता ने बताया कि उपचार में उसका डेढ़ लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। बेटे के पैर का तीन बार ऑपरेशन हुआ है। डॉक्टर ने पहली बार 22 हजार, दूसरी बार 11 हजार और तीसरी बार चार हजार रुपये लिए। दवा भी बाहर से मंगाई जा रही है। पैर की हफ्ते में दो बार पट्टी हो रही है। उसके लिए भी 400 रुपये लिए जाते हैं।
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केस.2. बारा तहसील के त्रिजुगी नारायण को हार्निया की समस्या थी। 15 दिन पहले वह कॉल्विन अस्पताल में भर्ती हुए। त्रिजुगी नारायण और उनकी पत्नी ने बताया कि डॉक्टर ने उनसे ऑपरेशन करने केलिए 20 हजार रुपये लिए। बिना पैसे लिए ऑपरेशन करने को वह तैयार नहीं हो रहे थे। डॉक्टर साहब ने रकम खुद नहीं एक अन्य नजदीकी के मार्फत ली। एक पूरी रकम मिलने के बाद ही ऑपरेशन की तिथि निर्धारित की गई। फिलहाल त्रिजुगी उपचार करा घर जा चुके हैं।
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केस. 3. करेली के रहने वाले मो. शाहिद के दोनों कान का पर्दा फट गया था। उन्होंने बेली अस्पताल के नाक, कान, गला के डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने ऑपरेशन करने की सलाह दी। डॉक्टर ने उसने एक कान के पर्दे का ऑपरेशन करने के लिए 12 हजार रुपये लिए। शाहिद ने बताया कि बिना रकम लिए डॉक्टर ऑपरेशन करने ओटी में नहीं आए। अब वह घर में आराम कर रहा है।
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ये तीनों मामले तो महज उदाहरण हैं। ऑपरेशन करने के लिए निजी अस्पतालों में तो मोटी रकम लगती ही है। शहर के सरकारी अस्पतालों में वसूली का खुला खेल हो रहा है। बेली, कॉल्विन के डॉक्टर मरीज से ऑपरेशन के एवज में बड़ी मुंहमांगी रकम वसूल करने के बाद ही ओटी में जाते हैं। ऐसा गिने-चुने मामलों में नहीं बल्कि दोनों अस्पतालों में होने वाले कुल ऑपरेशनों के 80 फीसदी मामलों में हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक अस्पताल प्रशासन की भी इसमें मिलीभगत है।
एक तरफ जहां प्रदेश की सपा सरकार मरीजों को हर तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं नि:शुल्क मुहैया कराने का दावा कर रही है। दवाइयां, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड समेत सभी जांचें बिल्कुल मुफ्त कर दी गईं हैं। भर्ती शुल्क भी समाप्त कर दिया गया है। मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल से लेकर जिला प्रशासन तक को रोगी कल्याण समेत तमाम योजनाओं में अलग से करोड़ों रुपये का बजट मुहैया कराया गया है, वहीं जिला अस्पतालों के सर्जन सरकार के मंसूबों पर पानी फेर रहे हैं। हर ऑपरेशन के लिए मरीजों से रुपये मांगे जा रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत के दौरान भुक्तभोगी मरीजों और तीमारदारों ने कैमरे के सामने वसूली की दास्तान बेबाकी से बताई।
ऑपरेशन के लिए मरीजों से रुपये सीधे डॉक्टर नहीं लेते। यह रकम वह अस्पताल के वार्ड ब्वाय समेत दूसरे कर्मचारियों के जरिए वसूली जा रही है। कई आर्थोपेडिक तो प्लेट, रॉड का बहाना भी बनाते हैं। कई डॉक्टर रुपये न देने पर मरीजों को डांटकर भगा देते हैं, ऑपरेशन नहीं करते हैं, स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय समेत दूसरे अस्पताल रेफर कर देते हैं। बेली अस्पताल में भर्ती अशोक की मां ने बताया कि उसके बेटे की शनिवार को तीसरी बार ऑपरेशन किया गया। जब अपने बेटे को वह ओटी में लेकर पहुंची तो डॉक्टर ने कहा राधेश्याम नामक व्यक्ति का नाम लेते हुए कहा चार हजार रुपये नहीं दिया ना, जाओ यहां से, ऑपरेशन नहीं होगा। बाद में उन्होंने चार हजार रुपये दिए, तब बेटे की पैर का ऑपरेशन हुआ।
दोनों अस्पतालों में मरीज या तो ओपीडी में ऑपरेशन कराने केलिए आते हैं या फिर हादसे का शिकार होकर इमरजेंसी में भर्ती होते हैं। डॉक्टर से संपर्क करने पर भर्ती के एक दिन बाद उससे रुपये मांगे मांगे जाते हैं डॉक्टर यह कहते हैं कि रुपये देने की बाद ही ऑपरेशन होगा। डॉक्टर मरीजों से सीधे रुपये न लेकर दूसरे माध्यमों से वसूली करते हैं।
- मेरे सामने भी अस्पताल में ऑपरेशन के लिए रुपये लिए जाने की कई शिकायतें आईं हैं। मैं उसकी जांच करा रहा हूं। मरीजों से रकम वसूली के अन्य मामलों में भी मिली शिकायतों भी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. वीके सिंह, प्रमुख अधीक्षक, बेली अस्पताल
- किसी मरीज ने अभी ऐसी शिकायत नहीं की है। अगर शिकायत आती है तो जांच कराई जाएगी। डॉ. एके सिंह, प्रमुख अधीक्षक, कॉल्विन अस्पताल
= ऑपरेशन के लिए रुपये लिए जाने की बात गंभीर है। मरीजों के साथ ऐसा हो रहा है तो जांच कराई जाएगी। दोषी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. दिलीप रंजन, एडी हेल्थ
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केस.2. बारा तहसील के त्रिजुगी नारायण को हार्निया की समस्या थी। 15 दिन पहले वह कॉल्विन अस्पताल में भर्ती हुए। त्रिजुगी नारायण और उनकी पत्नी ने बताया कि डॉक्टर ने उनसे ऑपरेशन करने केलिए 20 हजार रुपये लिए। बिना पैसे लिए ऑपरेशन करने को वह तैयार नहीं हो रहे थे। डॉक्टर साहब ने रकम खुद नहीं एक अन्य नजदीकी के मार्फत ली। एक पूरी रकम मिलने के बाद ही ऑपरेशन की तिथि निर्धारित की गई। फिलहाल त्रिजुगी उपचार करा घर जा चुके हैं।
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केस. 3. करेली के रहने वाले मो. शाहिद के दोनों कान का पर्दा फट गया था। उन्होंने बेली अस्पताल के नाक, कान, गला के डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने ऑपरेशन करने की सलाह दी। डॉक्टर ने उसने एक कान के पर्दे का ऑपरेशन करने के लिए 12 हजार रुपये लिए। शाहिद ने बताया कि बिना रकम लिए डॉक्टर ऑपरेशन करने ओटी में नहीं आए। अब वह घर में आराम कर रहा है।
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ये तीनों मामले तो महज उदाहरण हैं। ऑपरेशन करने के लिए निजी अस्पतालों में तो मोटी रकम लगती ही है। शहर के सरकारी अस्पतालों में वसूली का खुला खेल हो रहा है। बेली, कॉल्विन के डॉक्टर मरीज से ऑपरेशन के एवज में बड़ी मुंहमांगी रकम वसूल करने के बाद ही ओटी में जाते हैं। ऐसा गिने-चुने मामलों में नहीं बल्कि दोनों अस्पतालों में होने वाले कुल ऑपरेशनों के 80 फीसदी मामलों में हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक अस्पताल प्रशासन की भी इसमें मिलीभगत है।
एक तरफ जहां प्रदेश की सपा सरकार मरीजों को हर तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं नि:शुल्क मुहैया कराने का दावा कर रही है। दवाइयां, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड समेत सभी जांचें बिल्कुल मुफ्त कर दी गईं हैं। भर्ती शुल्क भी समाप्त कर दिया गया है। मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल से लेकर जिला प्रशासन तक को रोगी कल्याण समेत तमाम योजनाओं में अलग से करोड़ों रुपये का बजट मुहैया कराया गया है, वहीं जिला अस्पतालों के सर्जन सरकार के मंसूबों पर पानी फेर रहे हैं। हर ऑपरेशन के लिए मरीजों से रुपये मांगे जा रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत के दौरान भुक्तभोगी मरीजों और तीमारदारों ने कैमरे के सामने वसूली की दास्तान बेबाकी से बताई।
ऑपरेशन के लिए मरीजों से रुपये सीधे डॉक्टर नहीं लेते। यह रकम वह अस्पताल के वार्ड ब्वाय समेत दूसरे कर्मचारियों के जरिए वसूली जा रही है। कई आर्थोपेडिक तो प्लेट, रॉड का बहाना भी बनाते हैं। कई डॉक्टर रुपये न देने पर मरीजों को डांटकर भगा देते हैं, ऑपरेशन नहीं करते हैं, स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय समेत दूसरे अस्पताल रेफर कर देते हैं। बेली अस्पताल में भर्ती अशोक की मां ने बताया कि उसके बेटे की शनिवार को तीसरी बार ऑपरेशन किया गया। जब अपने बेटे को वह ओटी में लेकर पहुंची तो डॉक्टर ने कहा राधेश्याम नामक व्यक्ति का नाम लेते हुए कहा चार हजार रुपये नहीं दिया ना, जाओ यहां से, ऑपरेशन नहीं होगा। बाद में उन्होंने चार हजार रुपये दिए, तब बेटे की पैर का ऑपरेशन हुआ।
दोनों अस्पतालों में मरीज या तो ओपीडी में ऑपरेशन कराने केलिए आते हैं या फिर हादसे का शिकार होकर इमरजेंसी में भर्ती होते हैं। डॉक्टर से संपर्क करने पर भर्ती के एक दिन बाद उससे रुपये मांगे मांगे जाते हैं डॉक्टर यह कहते हैं कि रुपये देने की बाद ही ऑपरेशन होगा। डॉक्टर मरीजों से सीधे रुपये न लेकर दूसरे माध्यमों से वसूली करते हैं।
- मेरे सामने भी अस्पताल में ऑपरेशन के लिए रुपये लिए जाने की कई शिकायतें आईं हैं। मैं उसकी जांच करा रहा हूं। मरीजों से रकम वसूली के अन्य मामलों में भी मिली शिकायतों भी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. वीके सिंह, प्रमुख अधीक्षक, बेली अस्पताल
- किसी मरीज ने अभी ऐसी शिकायत नहीं की है। अगर शिकायत आती है तो जांच कराई जाएगी। डॉ. एके सिंह, प्रमुख अधीक्षक, कॉल्विन अस्पताल
= ऑपरेशन के लिए रुपये लिए जाने की बात गंभीर है। मरीजों के साथ ऐसा हो रहा है तो जांच कराई जाएगी। दोषी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. दिलीप रंजन, एडी हेल्थ