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सीएमओ दफ्तर में हॉट सीट पर बैठ कई और हैं अजगर

Mon, 16 Dec 2019 11:43 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 16 Dec 2019 11:43 PM IST
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Many more 'Pankaj' are sitting on hot seat in CMO office
प्रयागराज। सीएमओ दफ्तर में सोरांव से आकर पंजीयन की हॉट सीट पर बैठे पंकज पांडेय जैसे कई और बाबू और अफसर हैं, जिनकी मर्जी के बगैर कोई सही काम भी नहीं करा सकता। करीब एक वर्ष पहले पटल परिवर्तन के बाद भी सीएमओ दफ्तर में तैनात बाबुओं की हनक कम नहीं हुई। ताज्जुब तो इस बात पर है कि बड़ी रकम डकारने वाले इन बाबुओं पर कार्रवाई तो छोड़िए उन्हें कारण बताओ नोटिस तक नहीं दिया गया।
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सीएमओ कार्यालय में मेडिकल, एएनएम, आशा, विकलांग, एनएचएम, टीकाकरण समेत कई ऐसे पटल हैं, जहां बिना चढ़ावा चढ़ाए काम नहीं होता। मातृ शिशु महिला कर्मचारियों का कई बार किया गया आंदोलन इसका प्रमाण है। मेडिकल के मामले में भी बिना चौथ चढ़ाए फाइल आगे नहीं बढ़ती।
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विकलांग भत्ता या चिकित्सकीय भुगतान (मेडिकल) अवकाश के मामलों में बिल पास कराने के लिए दस से पांच लोग हर दिन वहां चक्कर लगाते देखे जा सकते हैं। इसी तरह मलेरिया विभाग, पीएनडीटी पंजीयन और जांच के नाम पर वसूली की चर्चाएं सीएमओ दफ्तर ही नहीं चिकित्सकीय पेशे से जुड़े लोगों में आम हैं। पचड़े से बचने के लिए लोग लिखित शिकायत करने से कतराते हैं।
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विवादों में रहे आरोपी अफसर
सोरांव में तैनात रहे पंकज पांडेय को अस्पतालों, क्लीनिकों के पंजीयन का जिम्मा दिए जाने के तुरंत बाद ही वसूली के आरोप लगे। अस्पतालों के संचालक डॉक्टरों के मुताबिक सब कुछ दुरुस्त होने के बाद भी बड़ी रकम की मांग इस बार ही की गई। मुंडेरा के एक अस्पताल के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद पंकज विवादों में आए लेकिन उनकी सीट बरकरार रही। इसी तरह लूकरगंज में डॉ. आरती घोष के अस्पताल के पंजीयन मामले में अधिवक्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया। आरोप था कि उनसे बड़ी रकम मांगी गई थी। हालांकि वकील आंदोलन करते सीएमओ ने बीचबचाव किया,फिर डॉक्टर की अस्वस्थता के आधार पर उनके पंजीयन प्रपत्र पर हस्ताक्षर कर मामला संभाला। पंजीयन मामलों में किस कदर लापरवाही बरती जा रही है, इसका प्रमाण इस वर्ष आंकड़ों का अपटेड न होना है। और तो और सूची में नंबर और क्लीनिक या अस्पताल का नाम होने के बावजूद तुरंत फाइल का मिलना बड़ी बीमारी है।

सीएमओ दिल्ली में तो कैंप आफिस में क्या कर रहे थे आरोपी
विजिलेंस ने जिस वक्त स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी पंकज पांडेय को गिरफ्तार किया, उस वक्त सीएमओ दिल्ली के लिए निकल चुके थे। मौत के मामले में पेशी पर दिल्ली गए सीेएमओ को जब इस संबंध में जानकारी मिली तो वह भी हैरत में पड़ गए। सीएमओ थे नहीं तो पंकज वहां क्या करने गए थे। उन्हें गेट के बाहर से गिरफ्तार किया गया। साफ है कि आरोपों में दम है, अब पुलिस की जांच में सामने आएगा कि वह क्या करने गए थे।
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