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मकर संक्रांति आज, लबालब हुआ संगम
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Tue, 13 Jan 2015 11:36 PM IST
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संगम पर जल की कमी से आहत श्रद्धालुओं को मक्रर संक्रांति पर हताश नहीं होना पड़ेगा। प्रशासन की मेहनत सफल रही। पोकलैंड और ड्रेजर मशीन से खोदाई के बाद संगम घाट को गंगा की मुख्य धारा से जोड़ने के बाद मंगलवार को संगम घाट लबालब हो गया। इस अतिरिक्त प्रयास से संगम पर डुबकी लगाने के लिए पर्याप्त जल तो मुहैया करा दिया गया लेकिन प्रदूषण की समस्या अब भी बनी हुई है। इस बीच नारौरा से छोड़ गया जल भी इलाहाबाद पहुंचने लगा है। ऐसे में जलस्तर बढ़ने के कारण मंगलवार शाम दंडीबाड़ा के आसपास कुछ घाटों को नुकसान भी पहुंचा। हालांकि प्रशासन का दावा है कि सभी तैयारियां पूरी हैं और स्नान के लिए मेला क्षेत्र में संगम सहित दस घाट बनाकर तैयार कर लिए गए हैं।
तमाम लोग मकर संक्रांति बुधवार को मना रहे हैं तो बड़ी संख्या में लोग 15 जनवरी को भी पुण्य की डुबकी लगाएंगे। ऐसे में प्रशासन ने मकर संक्रांति के स्नान पर्व के लिए दो दिन के हिसाब से तैयारियां की हैं। मेले की व्यवस्था हो या ट्रैफिक डायवर्जन, सबकुछ दो दिनों तक लागू रहेगा। हालांकि प्रशासन को इससे राहत भी मिली है। प्रशासन का अनुमान था कि मकर संक्रांति पर 50 लाख स्नानार्थी डुबकी लगाएंगे लेकिन अब भीड़ बंट जाएगी और अतिरिक्त कवायद से फुरसत मिल जाएगी। सबसे बड़ी चुनौती संगम पर जल की उपलब्धता थी। इसके लिए संगम पर ड्रेजिंग और पोकलैंड मशीनें लगाकर खोदाई की गई और फिर संगम घाट को मुख्य धारा से जोड़ दिया गया। इस बीच नरौरा से छोड़ा गया जल भी इलाहाबाद पहुंचने लगा। दोपहर दो बजे से जलस्तर बढ़ने लगा लेकिन इसकी वजह से दंडीबाड़ा क्षेत्र के आसपास के घाटों को काफी नुकसान पहुंचा। कटान रोकने के लिए की गई व्यवस्था भी ध्वस्त हो गई और प्रशासन को सबकुछ व्यवस्थित करने के लिए नए सिरे से मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि संगम पर जल की पर्याप्त उपलब्धता अफसरों के लिए भी राहत भरी रही, क्योंकि इसी वजह से कुछ दिनों पहले सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता सोन को निलंबित कर दिया गया था।
- मकर संक्रांति पर दोनों दिन बुधवार और बृहस्पतिवार को मेला क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा। वीआईपी वाहनों को भी मेला क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। ऐसे में प्रशासन ने अरैल की तरफ भी एक वीआईपी घाट बनवा दिया है। वीआईपी उस घाट तक वाहन से पहुंचेंगे और वहां से नाव के जरिये संगम आएंगे। जो वीआईपी मंगलवार को ही मेला क्षेत्र में आकर रुक गए हैं, वे किलाघाट की तरफ बने वीआईपी घाट से संगम पहुंच सकेंगे।
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तमाम लोग मकर संक्रांति बुधवार को मना रहे हैं तो बड़ी संख्या में लोग 15 जनवरी को भी पुण्य की डुबकी लगाएंगे। ऐसे में प्रशासन ने मकर संक्रांति के स्नान पर्व के लिए दो दिन के हिसाब से तैयारियां की हैं। मेले की व्यवस्था हो या ट्रैफिक डायवर्जन, सबकुछ दो दिनों तक लागू रहेगा। हालांकि प्रशासन को इससे राहत भी मिली है। प्रशासन का अनुमान था कि मकर संक्रांति पर 50 लाख स्नानार्थी डुबकी लगाएंगे लेकिन अब भीड़ बंट जाएगी और अतिरिक्त कवायद से फुरसत मिल जाएगी। सबसे बड़ी चुनौती संगम पर जल की उपलब्धता थी। इसके लिए संगम पर ड्रेजिंग और पोकलैंड मशीनें लगाकर खोदाई की गई और फिर संगम घाट को मुख्य धारा से जोड़ दिया गया। इस बीच नरौरा से छोड़ा गया जल भी इलाहाबाद पहुंचने लगा। दोपहर दो बजे से जलस्तर बढ़ने लगा लेकिन इसकी वजह से दंडीबाड़ा क्षेत्र के आसपास के घाटों को काफी नुकसान पहुंचा। कटान रोकने के लिए की गई व्यवस्था भी ध्वस्त हो गई और प्रशासन को सबकुछ व्यवस्थित करने के लिए नए सिरे से मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि संगम पर जल की पर्याप्त उपलब्धता अफसरों के लिए भी राहत भरी रही, क्योंकि इसी वजह से कुछ दिनों पहले सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता सोन को निलंबित कर दिया गया था।
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- मकर संक्रांति पर दोनों दिन बुधवार और बृहस्पतिवार को मेला क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा। वीआईपी वाहनों को भी मेला क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। ऐसे में प्रशासन ने अरैल की तरफ भी एक वीआईपी घाट बनवा दिया है। वीआईपी उस घाट तक वाहन से पहुंचेंगे और वहां से नाव के जरिये संगम आएंगे। जो वीआईपी मंगलवार को ही मेला क्षेत्र में आकर रुक गए हैं, वे किलाघाट की तरफ बने वीआईपी घाट से संगम पहुंच सकेंगे।
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