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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   MahaKumbh 2025 Rishi Samvidhan Unveiled Mission to Connect 5.5 Lakh Villages with Sanatan Dharma

MahaKumbh: ऋषि संविधान... साढ़े पांच लाख गांवों तक पहुंचने का एलान, पुराणों के अध्ययन के बाद किया गया तैयार

Tue, 18 Feb 2025 01:10 PM IST
शाहरुख खान आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, प्रयागराज
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 18 Feb 2025 01:10 PM IST
सार

Rishi Samvidhan: ऋषि संविधान निर्माण के लिए पहली बैठक प्रयागराज 2001 के कुंभ में की गई थी। इसके बाद दूसरी 2007 के अर्द्धकुंभ, तीसरी बैठक 2013 के कुंभ और चौथी बैठक 2019 के कुंभ में हुई। चार बैठकों के निर्णय को आधार बनाकर ऋषि संविधान को तैयार किया गया है। 

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MahaKumbh 2025 Rishi Samvidhan Unveiled Mission to Connect 5.5 Lakh Villages with Sanatan Dharma
ऋषि संविधान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 Mahakumbh Nagar: धर्मांतरण को रोकने और भारत को सनातनी राष्ट्र बनाने के लिए साधु-संतों, दंडी संन्यासियों ने अभियान शुरू कर दिया है। इसके तहत ऋषि संविधान को आधार बनाकर देश के साढ़े पांच लाख गांवों को सनातन धर्म से जोड़ेंगे। 
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इसके लिए 20 साल का लक्ष्य तय किया गया है। 24 साल के मंथन और पुराणों के अध्ययन के बाद महाकुंभ में पहली बार ऋषि संविधान को आम जनता के सामने पेश किया गया।
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महाकुंभ में भारत को सनातन राष्ट्र बनाने की ओर साधु-संतों ने पहला कदम बढ़ा दिया है। वसुधैव कुटुंबकम को आधार बनाकर साधु-संतों ने ऋषि संविधान को तैयार किया है। 
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इसका मुख्यालय ऋषिकेश के ऋषि दर्शन क्षेत्र को बनाया जाएगा। इसके अलावा चार अस्थायी मुख्यालय भी रहेंगे, जिनमें प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन के नाम शामिल हैं। हर महाकुंभ में धर्मसंसद के जरिये पूरे देश के लिए ब्रह्मर्षि विश्वशांति के लिए संदेश देंगे।

ऋषि संविधान निर्माण के लिए पहली बैठक प्रयागराज 2001 के कुंभ में की गई थी। इसके बाद दूसरी 2007 के अर्द्धकुंभ, तीसरी बैठक 2013 के कुंभ और चौथी बैठक 2019 के कुंभ में हुई। चार बैठकों के निर्णय को आधार बनाकर ऋषि संविधान को तैयार किया गया है। 

हर सनातनी को दी जाएगी जिम्मेदारी
इसमें पूरब, पश्चिम, उत्तर-दक्षिण के 15 संतों की टीम ने वैदिक सनातनी धर्मग्रंथों और पुराणों को आधार बनाकर इसे तैयार किया है। इसके तहत हर सनातनी को एक गांव को सनातनी गांव बनाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। 

इसके लिए तीन सौ संतों की टोली तैयार की गई है, जो ऋषि संविधान के आधार पर पहले चरण में तीन सौ गांवों में तैनात किए जाएंगे। इसकी शुरुआत ओडिशा, पंजाब और पश्चिम बंगाल के गांवों से होगी। 
 

हिंदू राष्ट्र घोषित करने का संकल्प
चार लाख गांवों तक ऋषि संविधान का प्रसार होने के बाद इसका विस्तार किया जाएगा। देश के साढ़े पांच लाख गांवों को सनातनी गांव बनाने की योजना है। साथ ही आने वाले 20 साल में भारत को वैदिक सनातनी हिंदू राष्ट्र घोषित करने का संकल्प भी संतों ने महाकुंभ में लिया है।

2001 के कुंभ में शुरू हुआ था काम 
श्री काशी सुमेरपीठ के शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि 2001 से वह ऋषि संविधान के लिए कार्य कर रहे थे। प्रयागराज में कुंभ के दौरान चार बैठकों के बाद इसे तैयार करके आम जनता के लिए प्रस्तुत किया गया है। 

 

हर गांव में एक-एक ऋषि की तैनाती होगी। ग्राम देवता को आधार बनाकर ब्लॉक, तहसील और जनपद स्तर से काम होगा। गांव में रहने वालों को ग्राम देवता की पूजा अनिवार्य होगी। धर्मांतरण की घटनाओं को रोकने के लिए इसे लागू करना जरूरी है।
 

ऋषि से ब्रह्मर्षि तक की करनी होगी यात्रा 
ऋषि संविधान की पहली इकाई ऋषि को रखा गया है। इसमें यम, जप, तप, संयम और नियम को आधार बनाकर युवाओं को जोड़ा जाएगा। ऋषि के बाद राजर्षि, महर्षि, देवर्षि और ब्रह्मर्षि बनाए जाएंगे। श्रेष्ठ विद्वान, संन्यासी, शास्त्रों के ज्ञानी व्यक्ति को ही ब्रह्मर्षि के सर्वोच्च पद पर नियुक्त किया जाएगा। महाकुंभ में ब्रह्मर्षि की घोषणा की जाएगी।  

विश्वशांति योजना का स्तर मनुष्य से विश्व तक 
ऋषि संविधान में विश्वशांति योजना की शुरुआत मनुष्य से लेकर विश्व तक है। इसमें सबसे पहले मनुष्य, घर, ग्राम, पंचायत, ब्लॉक, जिला, राज्य, देश, महादेश, पृथ्वी और सबसे अंत में विश्व को रखा गया है।

चलाने होंगे 17 अभियान
ऋषि संविधान के तहत 17 अभियान चलेंगे। इनमें विचारक्रांति, साधनाक्रांति, संपर्क क्रांति, सेवाक्रांति, धर्मजागरण, संस्कारक्रांति, गोक्रांति, युवाक्रांति, व्यवस्थाक्रांति, नारीजागरण, समता क्रांति, शिक्षाक्रांति, स्वास्थ्यक्रांति, व्यसनमुक्ति, स्वावलंबन, हरितक्रांति और सामाजिक समरसता को शामिल किया गया है।
 

कुंभ में होगी तैनाती 
ब्रह्मर्षि का निर्वाचन प्रयागराज महाकुंभ, महर्षि का हरिद्वार अर्द्धकुंभ, राजर्षि का निर्वाचन नासिक महाकुंभ, ऋषि निर्वाचन उज्जैन महाकुंभ, आचार्य की नियुक्ति प्रयागराज कुंभ, धर्मरक्षक नियुक्ति हरिद्वार कुंभ, सेवाव्रती की नियुक्ति हर साल ऋषि पंचमी पर और सेवासैनिक की नियुक्ति हर मकर संक्रांति पर की जाएगी।

 

यह है ऋषि संविधान की शृंखला
ऋषि संविधान के सफल संचालन के लिए तीन अवधारणाएं बनाई गई हैं। इसमें लक्ष्य, मार्ग और मार्गदर्शक को रखा गया है। ऋषि संविधान का लक्ष्य विश्वशांति स्थापित करना और गोमाता को केंद्र में रखकर विश्वशांति योजना तैयार की गई है। इसका उद्देश्य जनजागरण के जरिये समाज में महाक्रांति लाना है। इसलिए सुदर्शन चक्र को केंद्र में रखकर महाक्रांति अभियान तैयार किया गया है। 
 

विश्व में धार्मिक गतिविधियों को सुनियंत्रित करने के लिए उनका जीवन समर्पित रहा है। इसलिए ऋषितंत्र व्यवस्था पेश की गई है। गणतंत्र की तरह ही ऋषितंत्र व्यवस्था में नेतृत्व निर्वाचित किया जाएगा। ऋषि संविधान में तीन अवधारणाएं और तीन सौ से अधिक सिद्धांत अनुच्छेद पेश किए गए हैं। इसमें कुल मिलाकर 1056 धर्मधाराओं का उल्लेख है।
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