Magh Mela : त्रिवेणी की लहरों के बीच पूरे माघ हिलोरे मारेंगी युवा उमंगें, एनसीजेडसीसी आयोजित करेगा कार्यक्रम
इस बार माघ मेले में त्रिवेणी की धाराओं के बीच शास्त्रीय संगीत व भक्ति गीतों की लहरों के साथ युवा उमंगें भी हिलोरे मारेंगी। खास यह कि सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ का आयोजन पूरे माह किया जाएगा।
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इस बार माघ मेले में त्रिवेणी की धाराओं के बीच शास्त्रीय संगीत व भक्ति गीतों की लहरों के साथ युवा उमंगें भी हिलोरे मारेंगी। खास यह कि सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ का आयोजन पूरे माह किया जाएगा। एनसीजेडसीसी के साथ संस्कृति विभाग भी इस आयोजन की जिम्मेदारी संभालेगा।
हर वर्ष मेले में एनसीजेडसीसी की ओर से 10 दिनों का ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ कार्यक्रम होता है। इसमें देश भर के पारंपरिक भक्ति संगीत एवं नाट्य कलाकारों को बुलाया जाता है। इस वर्ष प्रचलित नए भक्ति संगीत कलाकारों के कार्यक्रम कराने की भी योजना तैयार की गई है। इसमें युवाओं में प्रचलित नए नामों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
शनिवार को मेला प्राधिकरण कार्यालय में आयोजित बैठक में मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने संबंधित विभागों को नए कलाकारों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए। युवाओं में प्रचलित यह नए भक्ति संगीत कलाकार आधुनिक वाद्य यंत्रों का प्रयोग करते हुए भारतीय संगीत और लोक धुनों को प्रस्तुत करेंगे।
मुख्य स्नान पर्वों के आसपास जिन दिनों पर यातायात डायवर्जन प्लान लागू रहेगा उन दिनों को छोड़कर पूरी मेला अवधि में लगभग 30 दिनों तक कार्यक्रम होंगे। एनसीजेडसीसी की ओर से 12 दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इसके बाद संस्कृत विभाग के पास बाकी 18 दिनों तक कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी होगी। बैठक के बाद मंडलायुक्त ने ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ कार्यक्रम के लिए आयोजन स्थल का निरीक्षण किया।
मेले में इस बार पैराग्लाइडिंग और वाटर स्पोर्ट्स भी
महाकुंभ के बाद होने वाला पहला माघ मेला इस बार खास होगा। एक तरफ भक्ति, कला व सांस्कृतिक का संगम होगा तो दूसरी ओर मनोरंजन, पर्यटन और साहसी खेल की त्रिवेणी में गोता लगाने का मौका भी मिलेगा। मेले का स्वरूप काफी कुछ महाकुंभ जैसा होगा। महाकुंभ की तरह माघ मेले में भी श्रद्धालुओं व पर्यटकों को हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराने की तैयारी है। हेलीकॉप्टर पर बैठकर पूरे मेले का नजारा देख जा सकेगा। इसके अलावा पैराग्लाइडिंग की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी और हॉट एयर बैलून में आसमान के रास्ते मेला क्षेत्र की सैर करने का मौका मिलेगा।
मेले में आने वालों के लिए वाटर स्पोर्ट्स एवं मनोरंजन के अन्य संसाधन भी उपलब्ध रहेंगे। इसके साथ ही महाकुंभ की तरह कला ग्राम व संस्कृति ग्राम भी बसेगा। कला ग्राम बसाने की जिम्मेदारी पर्यटन निगम को सौंपी गई है। अरैल की तरफ मेले की रौनक बने, इसके लिए संगीत, पर्यटन व संस्कृति के क्षेत्र में अरैल को विकसित किया जा रहा है। ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ का आयोजन स्थल भी अरैल की तरफ ले जाने की योजना है। हालांकि, इस पर अभी अंतिम मुहर नहीं लगी है लेकिन वहां पार्किंग की बेहतर व्यवस्था होने के कारण इस कार्यक्रम के लिए अरैल को वरीयता दी जा सकती है।