उमेश पाल हत्याकांड : माफिया अतीक बोला- उमेश से अदावत थी, पर हत्या की साजिश की बात गलत, खुद को बताया निर्दोष
उमेश पाल से मेरी अदावत थी, इस बात को मैं कुबूल करता हूं। लेकिन उसकी हत्या की साजिश मैंने रची, यह इल्जाम बेबुनियाद है। मैं हजारों किमी दूर साबरमती जेल में हूं। वहां एक-एक बंदी पर नजर रखी जाती है। अब बताइए, कैसे साजिश रच सकता हूं।
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उमेश पाल से मेरी अदावत थी, इस बात को मैं कुबूल करता हूं। लेकिन उसकी हत्या की साजिश मैंने रची, यह इल्जाम बेबुनियाद है। मैं हजारों किमी दूर साबरमती जेल में हूं। वहां एक-एक बंदी पर नजर रखी जाती है। अब बताइए, कैसे साजिश रच सकता हूं।’ यह बातें माफिया अतीक अहमद ने पुलिस के उस सवाल के जवाब में कही, जो उससे कस्टडी रिमांड के दौरान पूछा गया।
माफिया अतीक और उसके भाई अशरफ से कस्टडी रिमांड के दूसरे दिन गहन पूछताछ हुई। दोपहर में एटीएस के पहुंचने से पहले पुलिस ने तीन घंटे तक उनसे उमेश पाल हत्याकांड के राज उगलवाने की कोशिश की। सुबह 10 बजे से दोनों से विवेचक ने सवाल पूछना शुरू किया। सूत्रों के मुताबिक, सबसे पहले विवेचक ने पूछा कि उमेश पाल को उसने क्यों मरवाया।
इस आरोप को अतीक ने सिरे से नकार दिया। कहा कि उमेश राजू पाल हत्याकांड में गवाह नहीं था। सीबीआई ने उसे गवाह नहीं बनाया था। हां, वह मेरी खिलाफत करता था, जिसे लेकर मेरी उससे अदावत थी। लेकिन उसकी हत्या की साजिश मैंने रची, यह बात कोरी बकवास है। जहां तक अपहरण के केस की बात है, तो उसकी गवाही हो चुकी थी। ऐसे में उसके रहने या न रहने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था।
असद ने क्यों किया, यह मैं नहीं जानता
साजिश रचने के सवाल पर खुद को निर्दोष बताने वाले अतीक से दूसरा सवाल वारदात में असद की मौजूदगी के बारे में पूछा गया। इस पर उसने जवाब दिया कि असद वहां क्यों गया, उसने उमेश पर क्यों गोली चलाई, इस बारे में वह कुछ नहीं जानता।
कई सवालों पर साधी चुप्पीकस्टडी रिमांड में पूछताछ के दौरान अतीक ने कुछ सवालों के जवाब बेबाकी से दिए। लेकिन कई सवाल ऐसे भी रहे, जिस पर उसने चुप्पी साध ली। विवेचक उससे बार-बार जवाब देने को कहते रहे लेकिन वह कुछ नहीं बोला। बहुत कुरेदने पर कुछ बोला भी, तो सिर्फ गोलमोल बातें करता रहा।
अशरफ फिर बोला- जेल में रहते हुए कैसे साजिश होगी
अशरफ पर भी कस्टडी रिमांड के दूसरे दिन सवाल दर सवाल दागे गए। अशरफ से पूछा गया कि उस पर उमेश पाल की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। इस पर उसका कहना था कि वह बरेली जेल में बंद है। उसने कहा कि क्या जेल में रहते हुए हत्या की साजिश रची जा सकती है। गौरतलब है कि उमेश पाल अपहरण केस में बरी किए जाने के बाद वापस बरेली जेल जे जाते वक्त भी उसने मीडिया के सवाल पर यही बात कही थी।
इन सवालों पर बंद हो गई बोली
- उमेश पाल की हत्या के बाद अखलाक से फोन पर क्यों बात की?
- अखलाक के भतीजे अतीकुर्रहमान ने पेटीएम से 50 हजार रुपये गुजरात में किसे ट्रांसफर किए?
- असद इतनी बड़ी वारदात बिना उससे पूछे कैसे अंजाम दे सकता है?
- उसकी रजामंदी नहीं थी, तो गुलाम, गुड्डू मुस्लिम जैसे गुर्गे कैसे वारदात में शामिल हुए?
- असद 11 फरवरी को बरेली जेल में गुलाम को लेकर क्यों गया था?
- बिना आईडी पर एक साथ आठ लोगों से अशरफ की मुलाकात का क्या मकसद था?
- सदाकत के मोबाइल फोन पर मिले व्हाट्सएप चैट का क्या राज है?
- शाइस्ता साजिश में शामिल नहीं तो क्यों भाग रही पुलिस से?- फुटेज वायरल होने के बाद भी गुड्डू मुस्लिम को उसकी बहन आयशा नूरी ने क्यों दी पनाह?
दोनों भाइयों को लेकर कौशाम्बी में दबिश
दिन भर चली पूछताछ के बाद रात आठ बजे के करीब अतीक व अशरफ को लेकर धूमनगंज पुलिस ने कौशाम्बी पहुंची। सूत्रों का कहना है कि पुलिस को पता चला है कि उमेश पाल हत्याकांड में प्रयुक्त कुछ असलहे कौशाम्बी के महगांव में छिपाए गए हैं। इसी की बरामदगी के लिए दोनों भाइयों को लेकर पुलिस टीम महगांव स्थित अतीक के उस बेशकीमती प्लॉट पर पहुंची, जिसे कुछ महीनों पहले कुर्क किया गया था।
माफिया कभी यहां शॉपिंग कॉम्पलेक्स बनवाना चाहता था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इनपुट था कि उमेश की हत्या में प्रयुक्त कुछ असलहे इसी प्लॉट पर छिपाए गए हैं। हालांकि सघन तलाशी के बाद भी वहां कुछ नहीं मिला। इसके बाद दोनों भाइयों का कॉल्विन अस्पताल लाकर मेडिकल परीक्षण कराया गया और फिर उन्हें 11 बजे के करीब वापस धूमनगंज थाने ले आया गया।
अतीक ने खाई मेस की दाल-रोटी, अशरफ ने चाय पीकर खोला रोजा
बेटे असद के एनकाउंटर की खबर मिलने से दुखी अतीक ने बृहस्पतिवार रात खाना खाने से मना कर दिया था, लेकिन शुक्रवार को उसने मेस में बनी दाल-रोटी खाई। उधर अशरफ ने शाम को चाय पीकर रोजा खोला। सूत्रों का कहना है कि बेटे की मौत से दुखी अतीक ने सुबह पहले तो खाना खाने से इंकार कर दिया था, लेकिन भाई अशरफ ने उसे खराब सेहत का हवाला देकर खाना खाने की गुजारिश की। जिस पर वह मान गया। इसके बाद उसने दाल-रोटी खाने के बाद अपनी दवाएं लीं।